सम्राट चौधरी सरकार ने जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर व वीडियो साझा करने वाले 225 सोशल मीडिया आईडी पर FIR दर्ज की है, पोक्सो एक्ट लगाया है। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया है कि अब नियम तोड़ने वाले खुद सीएम सम्राट पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
बिहार विधानसभा चुनाव की पहली सूची में सम्राट चौधरी का नाम।
जमुई में यौन हिंसा की शिकार नाबालिग छात्रा और उसके परिवार के साथ तस्वीर खिंचवाकर कथित तौर पर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सार्वजनिक करने के मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सवालों के घेरे में आ गए हैं। हालाँकि, यह तस्वीर हटा ली गई है लेकिन इसके बारे में सरकार और पुलिस की ओर से कोई बयान या सफाई जारी नहीं की गई है।
हाल के दिनों में किसी बड़ी वारदात के बाद जब सरकार की बहुत किरकिरी होती है तो मुख्यमंत्री आवास में पीड़ित परिवार को बुलाकर तस्वीर खिंचवाने का सिलसिला शुरू हुआ है। इसके बाद पीड़ित परिवार के ज़रिए सरकार की प्रशंसा में और प्रशासन की कार्रवाई पर संतोष प्रकट करने वाला बयान भी सामने आता है। ऐसी ही तस्वीर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भी मुख्यमंत्री के साथ खिंचवाई और साझा की गई थी।
ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया टीम ने यह तय किया है कि हर बड़ी वारदात के बाद पीड़ित परिवार के साथ तस्वीर साझा कर मुख्यमंत्री की छवि को बेहतर किया जाए लेकिन इस बार यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। इस मामले में पीड़िता की मां का बयान भी आया है जिसमें वह मुख्यमंत्री से मिलने के बाद उनके द्वारा आश्वासन मिलने की बात कह रही हैं।
इस तस्वीर को साझा किए जाने का विवाद ऐसे माहौल में आया है जबकि बिहार पुलिस ने बड़े पैमाने पर उन सोशल मीडिया हैंडल्स पर कार्रवाई की है जिसके ज़रिए इस कांड का वीडियो वायरल या शेयर किया गया था। ख़बरों में बताया गया है कि इस मामले में कम से कम 225 सोशल मीडिया आईडी पर एफआईआर दर्ज की गई है और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसमें पॉक्सो एक्ट भी लगाया गया है।
जिन लोगों ने वीडियो शेयर किया उनका मक़सद तो यह था कि पुलिस इस पर कार्रवाई करे लेकिन पुलिस ने यह कहते हुए उन पर कार्रवाई की कि ऐसे मामलों में नाबालिग की तस्वीर या पहचान सार्वजनिक करना कानूनन गलत है और इसमें पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
सोशल मीडिया पर बहुत बड़ी संख्या में लोग यह पूछ रहे हैं कि जब सम्राट चौधरी के हैंडल से ऐसे ही तस्वीर साझा की गई तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सोशल मीडिया पर उपलब्ध पोस्ट्स में यह देखा जा सकता है जिसमें अपने सरकारी आवास पर मुलाकात के दौरान खींची गई तस्वीर को साझा करते हुए सम्राट चौधरी ने लिखा, “लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची एवं उनके परिवार से मुलाकात की। बेटी को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया। परिवार ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया। सभी दोषियों के विरुद्ध स्पीडी ट्रायल के माध्यम से एक माह के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी।”
तेजस्वी यादव ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की गई तस्वीर को साझा तो किया लेकिन इसमें पीड़ित परिवार की तस्वीर को ब्लर कर दिया है और उनका कहना है कि कम से कम यही काम सम्राट चौधरी को भी करना चाहिए था।
बिहार सरकार ने इस बारे में तेजस्वी यादव के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पुलिस ने इस तस्वीर के फर्जी होने के बारे में कोई दावा किया है। हालाँकि कुछ लोगों का कहना है कि इसे मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया टीम की गलती बता कर पूरे मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सोशल मीडिया टीम के एक-दो लोगों पर गाज गिर सकती है।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर विधि सम्मत कार्रवाई करने की मांग की है और यह सवाल खड़ा किया है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर पॉक्सो एक्ट को कौन मानेगा? तेजस्वी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री खुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता के परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे हैं।”
उन्होंने यह याद दिलाया कि पॉक्सो एक्ट के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को गुप्त रखना कानूनन अनिवार्य है और इसे सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है। उन्होंने लिखा, “पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती है। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके। पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।”
हालाँकि सम्राट चौधरी के एक मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने मीडिया को दिए अपने बयान में दावा किया कि फोटो वायरल होने से पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन नहीं होता। ऐसा लगता है कि भगवान सिंह कुशवाहा इस मामले में या तो पूरी तरह से अनजान हैं या बिहार पुलिस जिन लोगों पर इसी एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है वह गलत है।
अगर यह मान भी लिया जाए कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सोशल मीडिया टीम ने इस तस्वीर को उनके हैंडल से जारी कर कोई गलती कर दी तो यह सवाल फिर भी बरकरार रहता है कि आखिर पीड़ित परिवार के साथ मुख्यमंत्री को तस्वीर खिंचवाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या मुख्यमंत्री को इस बात का एहसास नहीं था कि उनके साथ जिसकी तस्वीर खिंचवाई जा रही है वह एक नाबालिग पीड़िता है और उनकी पुलिस ऐसी ही तस्वीर और वीडियो शेयर करने के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है?