सैंकड़ों छात्र प्रदर्शनकारियों को इश्तेहारी मुजरिम बनाने वाली बिहार सरकार ने भारी आलोचना और दबाव के बाद 27 जुलाई की रात नौ बजे जब यह ऐलान किया कि वह सभी ऐसे मुकदमे वापस लेगी और इस सिलसिले में गिरफ्तार सभी आंदोलनकारी को रिहा करेगी तो दरअसल बिहार ‘योगी राज’ बनने के दरवाजे से लौट आया।
 
22 जुलाई से 25 जुलाई तक बिहार में पहली बार लोगों ने यह देखा कि छात्रों के आंदोलन पर न सिर्फ फायरिंग की गई बल्कि इसके लिए एके-47 तक का इस्तेमाल किया गया। बिहार के लोगों ने पहली बार यह भी देखा कि छात्र प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें उपद्रवी बताकर अखबारों में इश्तेहार के तौर पर दी गईं और उन पर दुर्दांत अपराधी की तरह इनाम भी घोषित किया गया।
बिहार में इस बात को बेहद हैरत के साथ देखा जा रहा था कि आखिर जब दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की समाप्ति के साथ केंद्र सरकार ने सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का समझौता किया था तो बिहार में यह क्रैकडाउन क्यों चल रहा है।

बिहार प्रोटेस्ट पर प्लान दिल्ली में?

दरअसल, बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि 22 जुलाई के बाद बिहार के आंदोलन को नियंत्रित करने का प्लान पटना में नहीं, बल्कि दिल्ली में बन रहा था। ध्यान रहे कि 22 जुलाई को पटना में छात्रों के आंदोलन के दौरान बैरिकेडिंग को उठा-उठा कर फेंक दिया गया और छात्रों ने वाटर कैनन के पानी से डरने के बजाय उसमें बारिश की पानी की तरह नहाने का मजा लिया तो इसके वीडियो वायरल हो गए। इसी दौरान जहानाबाद में पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कम से कम 30 राउंड फायरिंग की बात मानी जो कि स्थानीय लोगों का कहना है कि फायरिंग साठ राउंड तक की गई है।

लोगों ने यह सवाल करना शुरू किया कि जैसे पुलिस कहती है कि प्रदर्शनकारियों में उपद्रवी शामिल थे वैसे ही कहीं पुलिस वालों में उपद्रवी तो शामिल नहीं हो गए हैं। फिर 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान बड़े पैमाने पर छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं जबकि पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों के नाम पर उपद्रवियों ने पुलिस पर हमले किए हैं।

छात्रों पर कैसी-कैसी कार्रवाई?

लाठी चार्ज और फायरिंग के अलावा बड़े पैमाने पर छात्रों को उनके घरों, हॉस्टल्स और छात्र संघ के कार्यालय से गिरफ्तार किया जाने लगा। यहां तक कि बड़े पैमाने पर नाबालिग भी गिरफ्तार किए गए जिन्हें बाद में पुलिस ने मजबूरी में छोड़ तो दिया लेकिन उनसे भी बॉन्ड भरवा लिए। माना यह जा रहा है कि दरअसल यह सारा क्रैकडाउन दिल्ली के बीजेपी नेतृत्व के इशारे पर और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रहा था। यह भी माना जा रहा है कि हालांकि नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का काफी हद तक भगवाकरण और भाजपाकरण हो चुका है लेकिन उसकी ओर से भी इस मामले में सरकार की क्रैकडाउन कार्रवाई का विरोध किया गया।

बिहार में कौन सा मॉडल चलेगा?

बिहार में बीजेपी की पहली सरकार के मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी अक्सर यह कहते थे कि बिहार में कोई और मॉडल नहीं चलेगा और वह अपने बारे में रहते थे कि वह केवल सम्राट चौधरी हैं। इसके बावजूद 22 जुलाई से 26-27 जुलाई तक बिहार में वैसी ही कार्रवाइयां हो रही थीं जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजपाट में होती हैं। इन सबके बीच पटना में यह चर्चा भी जारी थी कि एक ओर केंद्रीय गृह मंत्रालय बिहार में आंदोलन को हर हथकंडे के साथ कुचलने के निर्देश दे रहा था तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में सतर्कता बरतते हुए ऐसी कार्रवाइयों से बचने को कह रहा था क्योंकि उसे बिहार में भी जंतर मंतर जैसे हालात पैदा होने का खतरा नजर आ रहा था।
इन सब कार्रवाइयों की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुई और कॉकरोच जनता पार्टी ने ऐलान किया कि अगर सरकार ने समझौते के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सारे मुकदमे वापस नहीं लिए तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही विदेश दौरे से लौटे तेजस्वी यादव आते ही आक्रामक हुए और उन्होंने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो 28 जुलाई से आरजेडी पूरे राज्य में प्रदर्शन करेगा।

बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव

ध्यान रहे कि 30 जुलाई को पटना के बांकीपुर सीट पर विधानसभा का उपचुनाव के लिए मतदान है जो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। यहां से बीजेपी के उम्मीदवार को कमजोर माना जा रहा है और पार्टी को अपना उम्मीदवार भी बदलना पड़ा था। एक ओर जहाँ तेजस्वी यादव ने बड़ा रोड शो किया है, वहीं इस सीट से सबसे चर्चित उम्मीदवार जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर को माना जा रहा है।
माना यह जा रहा है कि इन हालात और मजबूरियों के मद्देनजर बिहार सरकार ने दिल्ली के निर्देश पर ही सभी मुक़दमे वापस लेने और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को जेल से छोड़ने की घोषणा की है। जब रात 9:00 बजे सरकार ने मुकदमे वापस लेने की घोषणा की तो बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार को जनता के दबाव में झुकना पड़ा। राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेजस्वी ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता है। तेजस्वी ने खास तौर पर सीवान में एके-47 से गोली चलाने के मामले में मांग की कि वहाँ के एसपी और बड़े अधिकारियों को भी सस्पेंड किया जाए। ध्यान रहे कि इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जाने के बाद एके-47 से फायरिंग करने वाले सिपाही को सस्पेंड किया गया था।