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सुशील मोदी (फ़ाइल फ़ोटो)

तारकिशोर बने विधानमंडल के नेता; सुशील मोदी क्या करेंगे?

सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं, इस पर अटकलें लगाई ही जा रही हैं कि तारकिशोर प्रसाद को विधानमंडल दल का नेता चुन कर बीजेपी ने राज्य में बड़े हेरफेर के संकेत दिए हैं। बिहार में बीजेपी के सबसे बडे़ नेता फ़िलहाल सुशील मोदी ही हैं, लेकिन नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा के साथ सुशील मोदी के बारे में कोई घोषणा नहीं होने से कई अटकलें लगाई जा रही हैं। एक अटकल तो यही है कि क्या बिहार में दो उप मुख्यमंत्री होंगे। एक अटकल यह भी है कि सुशील मोदी दिल्ली भेजे जाएँगे। हालाँकि इस बारे में अभी तक एनडीए की ओर से कोई साफ़ संकेत नहीं दिए गए हैं।
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बिहार की राजधानी पटना में मुख्यमंत्री आवास पर रविवार को एनडीए की बैठक में तारकिशोर प्रसाद को बीजेपी के विधानमंडल दल का नेता चुनने के साथ ही रेणु देवी को उप नेता चुना गया है। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तारकिशोर के नाम का एलान किया। कटिहार ज़िले से आने वाले तारकिशोर प्रसाद को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के बाद सुशील मोदी ने एक लाइन में ट्वीट करते हुए तारकिशोर प्रसाद को बधाई दी। उन्होंने लिखा, ‘तारकिशोरजी को भाजपा विधानमंडल का नेता सर्वसम्मति से चुने जाने पर कोटिशः बधाई!’
ताज़ा घटनाक्रमों के बाद लगाई जा रही अटकलों के पीछे सिर्फ़ यही वजह नहीं है कि उप मुख्यमंत्री पद के लिए सुशील मोदी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। दूसरी कई वजहें भी हैं। पर्यवेक्षक मानते रहे हैं कि सुशील मोदी नीतीश के नज़दीक हैं और इसका नुक़सान सुशील मोदी को भी हो सकता है। नीतीश की स्थिति कमज़ोर हुई है और शायद सुशील मोदी की भी। इस संशय को इससे भी बल मिला कि नीतीश कुमार के साथ राजभवन तक सुशील कुमार मोदी नहीं गए।
नीतीश कुमार से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या सुशील मोदी भी आपके साथ शपथ लेंगे, नीतीश कुमार ने कहा, इन बातों के बारे में थोड़ी देर में पता चल जाएगा। यानी यह साफ़ है कि सुशील मोदी के उप मुख्यमंत्री बनने पर संदेह बरक़रार है।
अब सवाल उठता है कि जब तारकिशोर प्रसाद को विधानमंडल दल का नेता चुन लिया गया तो सुशील मोदी के लिए इससे ऊपर का पद अब क्या बचता है? सुशील मोदी को उप मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा नहीं की गई है। इसमें दो चीजें हो सकती हैं। एक, यह कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली ले जाए, जिसके अब तक कोई संकेत नहीं हैं। दूसरा, यह कि सुशील मोदी के साथ शायद एक और उप मुख्यमंत्री बनाया जाए और उस नाम पर सहमति नहीं बन पाई हो। और इसी कारण सुशील मोदी के उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बारे में घोषणा नहीं की गई। 
वीडियो में देखिए, जेडीयू-एलजेपी के बीच फँसी बीजेपी?
बिहार चुनाव में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद सरकार बनाने में देरी और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर अब तक कई मामलों में अकटलें लगाई जाती रही हैं। ऐसा इसलिए है कि एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू और बीजेपी ने जो सीटें जीती हैं उनमें भारी अंतर है। जेडीयू ने 43 सीटें जीती हैं जबकि बीजेपी ने 74 सीटें जीती हैं। लेकिन इसमें दिक्कत यह है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया है लेकिन उनकी पार्टी की सीटें काफ़ी कम रह गई हैं और बीजेपी की सीटें काफ़ी ज़्यादा। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कमज़ोर मुख्यमंत्री होंगे, उनकी नहीं चलेगी और वे बीजेपी के सभी कार्यक्रम लागू करने को मजबूर होंगे।

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