भारतीय समाज में पति का पत्नी को थप्पड़ मार देना मामूली घटना समझी जाती है। अगर महिला इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाये तो रिश्तेदार, मायके वाले तक उसका साथ नहीं देते।
महिला आवाज़ उठाये तो उसके मायके और ससुराल वाले उसे समझाते हैं कि यह तो चलता रहता है। इतनी सी बात पर तलाक़ नहीं लिया जा सकता, लेकिन उस महिला का भी आत्मसम्मान है, यह बात कोई नहीं समझता।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आए दिन होने वाली घरेलू हिंसा को महिलाएं अपने जीवन का सहज हिस्सा मान लेती हैं और इसलिए कोई शिकायत भी नहीं करतीं। जब ये उत्पीड़न हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो महिलाएं आत्महत्या का रास्ता चुन लेती हैं।