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दिल्ली दंगा: 12 में से 9 आरोपियों के कबूलनामे के बयान एक-दूसरे की नकल

क्या किसी एक ही घटना में 9 अलग-अलग आरोपियों के बयान एक समान हो सकते हैं? एक-एक वाक्य ही नहीं बल्कि क़रीब-क़रीब एक-एक शब्द बिल्कुल वही जो दूसरे आरोपी ने कहा हो। क्या एक ही घटना अलग-अलग जगहों पर घटी हो और अलग-अलग आरोपी हों तो क्या यह संभव है? लेकिन दिल्ली दंगे में ऐसा ही मामला सामने आया है। एक मामले में 12 आरोपियों में से 9 आरोपियों के बयान एक समान हैं। 

यह मामला जुड़ा है दिल्ली दंगे के दौरान 26 फ़रवरी को 20 वर्षीय वेटर दिलबाग नेगी की हत्या से। नेगी का शव शिव विहार में अनिल स्वीट्स में क्षत-विक्षत मिला था। वह वहीं काम करते थे। इस हत्या के मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश रचने, दंगा करने, समूहों के ख़िलाफ़ शत्रुता बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के बयान दर्ज किए हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने इन बयानों की पड़ताल की है और पाया है कि 12 में से 9 आरोपियों के बयान क़रीब-क़रीब एक-एक वाक्य और शब्द समान हैं। हालाँकि बाक़ी तीन के बयान थोड़े अलग हैं क्योंकि वे यह बता रहे हैं कि उन्होंने पिस्तौल कैसे ली और कैसे अँधाधुँध फ़ायरिंग की। 

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जिनके बयान एक समान हैं वे हैं-

आज़ाद का बयान

आज़ाद ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे; मेरे दोस्तों ने मुझे बताया कि जिनके पास सबूत नहीं है (नागरिकता साबित करने के लिए) उनको देश से निकाल दिया जाएगा। इसके आधार पर 24 फ़रवरी को सीलमपुर में दंगे शुरू हो गए थे; और धीरे-धीरे यह जमनापार तक फैल गया। लगभग 2-3 बजे शिव विहार तिराहा पर कई लोग इकट्ठा होने लगे और हिंदू घरों पर पथराव शुरू कर दिया। हिंदुओं ने भी हम पर पथराव शुरू कर दिया; यह काफ़ी लंबे समय तक चला।'

'…तब मुस्तफाबाद में बहुत से लोग इकट्ठा हुए थे और कहा गया था कि मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा और आज हमें उन्हें मुसलमानों की ताक़त दिखानी होगी। पूरी भीड़ के साथ-साथ मैं भी चला गया, जो भीड़ कह रही थी... शिव विहार में भीड़ जमा हो गई, जहाँ हिंदूओं ने हम पर पथराव किया, हमने उन पर पत्थर फेंके। हमारी तरफ़ से, भीड़ नारे लगा रही थी: उन्हें मार डालो, हम आज काफिरों को नहीं छोड़ेंगे। मैं उनकी बातों में आ गया और मैंने पथराव शुरू कर दिया। मैं बहुत देर तक पथराव करता रहा।'

'... इसके बाद, भीड़ ने अनिल स्वीट शॉप और राजधानी स्कूल के गोदाम पर चढ़ना शुरू कर दिया और पथराव कर दिया। मैं रात में अपने घर लौट आया और वहीं रहा। मुझसे ग़लती हो गई, कृपया मुझे माफ़ कर दें।'

मोनू का बयान

मोनू ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे; मेरे दोस्तों ने मुझे बताया कि जिनके पास सबूत नहीं है (नागरिकता साबित करने के लिए) उनको देश से निकाल दिया जाएगा। इसके आधार पर 24 फ़रवरी को सीलमपुर में दंगे शुरू हो गए थे; और धीरे-धीरे यह जमनापार तक फैल गया। लगभग 2-3 बजे शिव विहार तिराहा पर कई लोग इकट्ठा होने लगे और हिंदू घरों पर पथराव शुरू कर दिया। हिंदुओं ने भी हम पर पथराव शुरू कर दिया; यह काफ़ी लंबे समय तक चला।'

'…तब मुस्तफाबाद में बहुत से लोग इकट्ठा हुए थे और कहा गया था कि मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा और आज हमें उन्हें मुसलमानों की ताक़त दिखानी होगी। पूरी भीड़ के साथ-साथ मैं भी चला गया, जो भीड़ कह रही थी... शिव विहार में भीड़ जमा हो गई, जहाँ हिंदूओं ने हम पर पथराव किया, हमने उन पर पत्थर फेंके। हमारी तरफ़ से, भीड़ नारे लगा रही थी: उन्हें मार डालो, हम आज काफिरों को नहीं छोड़ेंगे। मैं उनकी बातों में आ गया और मैंने पथराव शुरू कर दिया। मैं बहुत देर तक पथराव करता रहा।'

'... इसके बाद, भीड़ ने अनिल स्वीट शॉप और राजधानी स्कूल के गोदाम पर चढ़ना शुरू कर दिया और पथराव कर दिया। मैं रात में अपने घर लौट आया और वहीं रहा। मुझसे ग़लती हो गई, कृपया मुझे माफ़ कर दें।'

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‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, अशरफ अली और मोहम्मद फैसल के बयानों में भी इन सभी वाक्यों को दोहराया गया है।

जफ़राबाद दंगों से संबंधित मोहम्मद शोएब (22) और शाहरुख (24) के बयानों में भी ऐसी ही समानता है।

शोयब का बयान

शोयब ने कहा, ‘सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे; मेरे दोस्तों ने मुझे बताया कि जिनके पास सबूत नहीं है (नागरिकता साबित करने के लिए) उनको देश से निकाल दिया जाएगा। इसके आधार पर 24 फ़रवरी को जाफराबाद में दंगे शुरू हो गए थे; और धीरे-धीरे यह जमनापार तक फैल गया।’

‘...लगभग 2-3 बजे शिव विहार तिराहा पर कई लोग इकट्ठा होने लगे और हिंदू घरों पर पथराव शुरू कर दिया।'

‘...मुस्तफाबाद में बहुत से लोग इकट्ठा हुए और कहने लगे कि मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा, और आज हमें उन्हें मुसलमानों की ताक़त दिखानी होगी। मैंने भी नारेबाज़ी शुरू कर दी और जो मेरे साथ थे उन्होंने भी हिंदुओं के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी शुरू कर दी। इसके बाद पूरी भीड़ ने नारे लगाने शुरू कर दिए- आग लगा दो, काफिरों को बाहर भगाओ और नारे तकबीर, अल्लाह हू अकबर; और हिंदू घरों में गुलेल का उपयोग करके मार्बल और पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।'

शाहरुख का बयान

शाहरुख ने कहा, ‘सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे; मेरे दोस्तों ने मुझे बताया कि जिनके पास सबूत नहीं है (नागरिकता साबित करने के लिए) उनको देश से निकाल दिया जाएगा। इसके आधार पर 24 फ़रवरी को जाफराबाद में दंगे शुरू हो गए थे; और धीरे-धीरे यह जमनापार तक फैल गया।’

‘...लगभग 2-3 बजे शिव विहार तिराहा पर कई लोग इकट्ठा होने लगे और हिंदू घरों पर पथराव शुरू कर दिया।'

‘...मुस्तफाबाद में बहुत से लोग इकट्ठा हुए और कहने लगे कि मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा, और आज हमें उन्हें मुसलमानों की ताक़त दिखानी होगी। मैंने भी नारेबाज़ी शुरू कर दी और जो मेरे साथ थे उन्होंने भी हिंदुओं के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी शुरू कर दी। इसके बाद पूरी भीड़ ने नारे लगाने शुरू कर दिए- आग लगा दो, काफिरों को बाहर भगाओ और नारे तकबीर, अल्लाह हू अकबर; और हिंदू घरों में गुलेल का उपयोग करके मार्बल और पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।'

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‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, ताहिर (38), परवेज (34) और रशीद (22) के एक समान बयान हैं। बाक़ी जो आरोपी हैं बिल्कुल उनसे मिलता-जुलता ही।

ताहिर का बयान

ताहिर ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे; मेरे दोस्तों और विशेषज्ञों ने मुझे बताया कि जिन लोगों के पास सबूत नहीं है (नागरिकता साबित करने के लिए) उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। इसके आधार पर 24 फ़रवरी को जाफराबाद में दंगे शुरू हो गए थे; और धीरे-धीरे यह जमनापार में फैल गया...।'

‘…लगभग 3 बजे, शिव विहार तिराहा पर कई लोग इकट्ठा होने लगे और हिंदू घरों पर पथराव शुरू कर दिया।’

‘…मुस्तफाबाद में बहुत से लोग इकट्ठे हुए और बताने लगे कि मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा और आज हमें उन्हें मुसलमानों की ताक़त दिखानी होगी। इसके बाद, पूरी भीड़ ने नारे लगाने शुरू कर दिए- आग लगा दो, काफिरों को बाहर भगाओ और नारे तकबीर, अल्लाह हू अकबर; और हिंदू घरों में गुलेल का उपयोग करके मार्बल और पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।’

ताहिर के बयान के ये पैराग्राफ़ परवेज और राशिद दोनों के स्वीकारोक्ति बयानों में दोहराए गए हैं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, हालाँकि इस्तेमाल किए गए हथियारों पर इन आरोपियों के बयान अलग-अलग हैं। आजाद और अशरफ अली ने कहा कि उनके पास ‘लकड़ी का बल्ला’ था; मोनू ने कहा कि उसके पास ‘लोहे की छड़’ थी। फैजल ने दावा किया कि उसके पास ‘छड़ी’ थी। शोएब, शाहरुख, ताहिर, परवेज़ और रशीद ने दावा किया कि उन्होंने अपने घरों पर लाठियाँ इकट्ठी की थीं।

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