दिल्ली आबकारी नीति मामले में कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई अधिकारी ने बिना सबूत ही केजरीवाल से लेकर अधिकारियों तक को फँसाया। जानिए अदालत ने सीबीआई के ख़िलाफ़ क्या-क्या कहा।
जिस दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को सीएम की कुर्सी तक गँवानी पड़ी, उसके मामले में दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने जाँच एजेंसी सीबीआई की बखिया उधेड़ कर रख दी है। इसने जाँच करने वाले सीबीआई अधिकारी पर कार्रवाई तक करने का आदेश दे दिया है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि इस मामले में आरोपियों के ख़िलाफ़ केस चलाने में तथ्यों की पूरी तरह अनदेखी की गई।
सीबीआई अदालत ने इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी करते हुए जाँच एजेंसी सीबीआई के ख़िलाफ़ बेहद सख़्त टिप्पणियाँ की। अदालत ने इस मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने मामले को गलत तरीके से आगे बढ़ाया। कोर्ट ने अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। यह फ़ैसला सुनाते हुए जज ने सीबीआई की जांच में कई खामियां गिनाईं और कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में झूठे और बिना सबूत वाले दावे हैं।
कोर्ट ने सीबीआई पर क्या-क्या कहा?
अदालत ने सीबीआई की जांच को 'बेहद परेशान करने वाला' बताया। जज ने कहा कि जांच अधिकारी ने तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि जो खुद आरोपी बन सकता था सिर्फ उसकी ही गवाही की सुनी-सुनाई बातों पर आधारित बयानों के आधार पर सरकारी अधिकारियों को फँसाया। इन अधिकारियों ने अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी भी नहीं निभाई और सीबीआई ने बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें अपराधी बना दिया।
जाँच में कोई ठोस सबूत नहीं: कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि जाँच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला, फिर भी आरोप लगाए गए। जज ने जाँच अधिकारी की रणनीति को 'जानबूझकर की गई चालाकी' क़रार दिया। कोर्ट ने कहा, जाँच अधिकारी ने आरोपों को जानबूझकर 'लचीला' रखा, ताकि अगर अदालत में मामला कमजोर पड़े तो उसी गवाह को फँसा सकें जिसके बयान पर पूरा केस टिका था। इससे साफ़ होता है कि अधिकारी को पता था कि उनके आरोप कमजोर हैं और अदालत की जाँच में टिक नहीं पाएंगे।
चार्जशीट में कई झूठे दावे
जज ने चार्जशीट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें कई झूठे दावे हैं, जो किसी गवाह या सबूत से मैच नहीं करते। चार्जशीट में आंतरिक विरोधाभास हैं, जो पूरे साजिश के सिद्धांत को ही खारिज कर देते हैं।
- कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनाया। खासकर मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं था, न ही कोई रिकवरी हुई।
- अरविंद केजरीवाल को बिना किसी मजबूत सबूत के फंसाया गया, जो कानून के नियमों के खिलाफ है, खासकर जब वह एक संवैधानिक पद पर थे।
- एक और आरोपी कुलदीप सिंह के बारे में कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई सबूत ही नहीं था।
- कोर्ट ने सीबीआई की 12 परसेंट होलसेल मार्जिन थ्योरी को 'साफ़ तौर पर गलत, आर्थिक रूप से इलिटरेट' कहा। इसने कहा कि यह क़ानूनी रूप से नहीं टिकने वाला' नहीं है।
- अदालत ने सीबीआई की जांच को लापरवाही से भरा बताया और कहा कि बिना बुनियादी सबूतों के किसी को साजिश में फंसाना गलत है।
सभी आरोपी बरी, कौन-कौन थे शामिल?
अदालत ने कुल 23 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें शामिल हैं- कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, मनीष सिसोदिया, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडे, बुच्चिबाबू गोरंटला, राजेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद कुमार सिंह, चनप्रीत सिंह, के. कविता, अरविंद केजरीवाल, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष चंद माथुर और शरत रेड्डी।
दिल्ली शराब नीति क्या थी?
दिल्ली शराब नीति 2021 में दिल्ली सरकार ने बनाई थी। इसका मकसद राजस्व बढ़ाना और शराब व्यापार में सुधार लाना था। इस नीति के तहत शराब व्यापार को पूरी तरह निजी हाथों में सौंप दिया गया। लेकिन बाद में इसमें अनियमितताओं के आरोप लगे। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। ईडी और सीबीआई ने दावा किया कि इस नीति से निजी कंपनियों को ग़लत फायदा पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुक़सान हुआ और भ्रष्टाचार हुआ।
मनीष सिसोदिया को सबसे पहले 26 फ़रवरी 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, फिर 9 मार्च 2023 को ईडी ने। सीबीआई की एफ़आईआर में कहा गया कि सिसोदिया और अन्य ने 2021-22 की शराब नीति में सिफारिशें कीं और फ़ैसले लिए, बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी के, ताकि लाइसेंसधारकों को अनुचित फायदा मिले। एजेंसी ने दावा किया कि सिसोदिया ने जाँच में सहयोग नहीं किया और गोलमोल जवाब दिए।
अरविंद केजरीवाल को 26 जून 2024 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, जब वह ईडी की कस्टडी में थे। केजरीवाल कुल दो बार जेल में रहे। उन्हें 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई मामले में जमानत दी, जबकि ईडी मामले में पहले अंतरिम जमानत मिली थी।
आप के लिए बड़ी राहत
मनीष सिसोदिया की तरफ़ से सीनियर एडवोकेट रेबेका एम जॉन और एडवोकेट विवेक जैन ने पैरवी की। अरविंद केजरीवाल की तरफ़ से सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन और एडवोकेट मुदित जैन ने।
यह फ़ैसला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इस मामले ने दिल्ली सरकार की छवि को काफी प्रभावित किया था। पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इसको बड़ा मुद्दा बनाया। चुनाव में केजरीवाल की हार हुई और कहा जाता है कि शराब नीति मामले में लगाए गए आरोप ने उनकी हार में बड़ी भूमिका निभाई। सीबीआई अब जांच अधिकारी पर कार्रवाई करेगी, जो जांच में लापरवाही बरतने का सबक सिखाएगा। बहरहाल, सीबीआई अदालत के इस फ़ैसले से जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।