दिल्ली के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उपदेश दे रही थी तो आम आदमी पार्टी सेवक के रूप में अपनी सरकार के 5 साल के कामकाज को गिना रही थी।
दिल्ली के विधानसभा चुनाव की विशेषता यह रही कि दोनों मुख्य दावेदार दल अपनी बनाई पिच पर ही खेले तथा तमाम ललकारों के बावजूद प्रतिद्वंद्वी की पिच पर खेलने से परहेज किया।
बीजेपी और ‘आप’, दोनों की ओर से अंतिम तीन हफ्तों का प्रचार पूरी ताक़त के साथ हुआ। दोनों ही दलों ने एक-एक सीट पर टिकट देते समय हर स्थानीय समीकरण का ध्यान रखते हुए सबसे ताक़तवर उम्मीदवार उतारे।