दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 तेज़ी से फैल रहा है। यह कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी नहीं है, बेशक, लक्षण उससे मिलते हैं। दिल्ली में सैकड़ों पीड़ित सामने आए हैं, मौत एक भी नहीं हुई है। लेकिन डॉक्टरों ने जो एहतियाती उपाय बताए हैं, उन्हें करना ज़रूरी हैं।
दिल्ली में एच 1 एन 1 फ्लू तेजी से फैल रहा है
दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामलों में तेज बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। 22 अगस्त 2026 तक राजधानी में H1N1 के 1,777 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इस साल अब तक H1N1 से दिल्ली में एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली में बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों की समीक्षा की, जबकि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मामलों में वृद्धि को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए सोशल मीडिया पर इसे “कोरोना की तरह फैलता हुआ” बताया। हालांकि विशेषज्ञों और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक H1N1 और कोरोना वायरस यानी SARS-CoV-2 की संक्रमण क्षमता और बीमारी के स्वरूप में महत्वपूर्ण अंतर है।
दिल्ली में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है
H1N1 क्या है और इसकी शुरुआत कहां से हुई?
H1N1 वायरस की पहचान पहली बार 2009 में मैक्सिको में हुई थी। वैज्ञानिकों ने पाया था कि इसके आठ जीन खंड अलग-अलग समय में उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में सूअरों, पक्षियों और इंसानों में मौजूद इन्फ्लुएंजा वायरस से विकसित हुए थे और बाद में एक ऐसे वायरस का रूप ले लिया जो इंसानों में फैलने लगा।इसी वजह से यह स्वाइन फ्लू के नाम से ज्यादा जाना जाता है। हालांकि बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे Influenza A(H1N1) 2009 नाम से संबोधित करना शुरू किया, क्योंकि यह बीमारी इंसान से इंसान में फैलती है और इसका संक्रमण सूअर का मांस खाने या सूअरों के संपर्क में आने से नहीं होता।
WHO ने 11 जून 2009 को H1N1 को महामारी घोषित किया था और 10 अगस्त 2010 को महामारी चरण समाप्त कर दिया। इसके बाद H1N1 का महामारी वाला स्ट्रेन A(H1N1) pdm09 मौसमी इन्फ्लुएंजा के वायरस समूह का हिस्सा बन गया। अब यह H3N2 और B/Victoria जैसे अन्य इन्फ्लुएंजा वायरस के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसमी रूप से फैलता है। 2009 की महामारी के शुरुआती 12 महीनों में इस वायरस से दुनियाभर में करीब 2.84 लाख श्वसन और हृदय संबंधी मौतें होने का अनुमान लगाया गया था।
क्या H1N1 कोरोना जितना तेजी से फैलता है?
यहां H1N1 और कोरोना के बीच अंतर समझना जरूरी है। वैज्ञानिक अध्ययनों में H1N1 की संक्रमण दर SARS-CoV-2 की तुलना में कम पाई गई है। 2009 की H1N1 महामारी पर 57 अध्ययनों और 78 अनुमानों की समीक्षा में इसका औसत R0 करीब 1.46 पाया गया। ज्यादातर अनुमान 1.30 से 1.70 के बीच थे। सामान्य मौसमी फ्लू का R0 लगभग 1.28 रहा। इसके मुकाबले शुरुआती SARS-CoV-2 के लिए एक अध्ययन में R0 करीब 2.5 पाया गया था, जिसकी सीमा 1.8 से 3.6 के बीच थी। बाद में ओमिक्रॉन के कुछ वेरिएंट में संक्रमण क्षमता और अधिक देखी गई।
इसका मतलब है कि H1N1 एक संक्रमित व्यक्ति से औसतन एक से दो अन्य लोगों तक पहुंच सकता है, लेकिन इसकी मूल संक्रमण क्षमता कोरोना के शुरुआती वायरस से कम रही है। फिर भी H1N1 कभी-कभी बहुत तेजी से फैलता हुआ दिखाई दे सकता है। इसका एक बड़ा कारण serial interval है- यानी एक संक्रमित व्यक्ति में बीमारी शुरू होने और उसके संपर्क में आए दूसरे व्यक्ति में लक्षण आने के बीच का समय। फ्लू में यह अंतर आम तौर पर करीब तीन दिन होता है, जबकि शुरुआती SARS-CoV-2 में यह लगभग 5.2 दिन था। यानी फ्लू का एक संक्रमण चक्र अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है और इससे स्थानीय स्तर पर मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दिखाई दे सकती है।
H1N1 कैसे फैलता है?
H1N1 मुख्य रूप से मुंह से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकली बूंदें आसपास मौजूद व्यक्ति के शरीर में पहुंच सकती हैं। खराब वेंटिलेशन वाले बंद कमरों में छोटे एरोसोल कण भी वायरस को कुछ दूरी तक पहुंचा सकते हैं। संक्रमित सतहों से संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है, लेकिन वायरस कठोर सतहों जैसे दरवाजे के हैंडल या मोबाइल फोन पर कुछ समय तक मौजूद रह सकता है। इसीलिए विशेषज्ञ खांसते और छींकते समय मुंह ढकने, हाथ धोने और घरों तथा कार्यालयों में पर्याप्त वेंटिलेशन रखने की सलाह देते हैं।H1N1 के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
H1N1 के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
बुखार और ठंड लगना
सूखी खांसी
गले में खराश
सिरदर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
अत्यधिक थकान
नाक बहना या नाक बंद होना
कुछ मरीजों में मतली, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। H1N1 में ये पाचन संबंधी लक्षण पुराने मौसमी फ्लू के कुछ अन्य स्ट्रेन की तुलना में अधिक देखे जा सकते हैं।दिल्ली के PSRI Institute of Pulmonary, Critical Care and Sleep Medicine के चेयरपर्सन जीसी खिलनानी के अनुसार, फिलहाल अधिकांश मरीजों में गले में खराश, सीने में दर्द और नाक बहने जैसे हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं। लेकिन बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती कराने या वेंटिलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है।
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर मरीज को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, होंठों का नीला पड़ना या ठीक होने के बाद दोबारा बुखार आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, पांच साल से कम उम्र के बच्चे और हृदय, फेफड़े, किडनी, लीवर या मेटाबॉलिक बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में भी गंभीर बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।H1N1 का इलाज क्या है?
H1N1 के इलाज में ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) प्रमुख एंटीवायरल दवा है, जिसे Tamiflu नाम से भी जाना जाता है। इसका फायदा बीमारी के लक्षण शुरू होने के 48 घंटे के भीतर इस्तेमाल करने पर सबसे ज्यादा होता है। भारत में ओसेल्टामिविर आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है और सरकारी अस्पतालों तथा बड़े निजी अस्पतालों में इसकी उपलब्धता रहती है। भारत में H1N1 का इतिहास
भारत में 2009 की महामारी के बाद से H1N1 हर साल मौसमी रूप से सामने आता रहा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) का Integrated Disease Surveillance Programme इसके मामलों और प्रकोपों की निगरानी करता है। भारत में बड़े स्तर पर H1N1 के मामले 2010, 2015, 2017, 2019, 2022 और 2024 में देखे गए। 2010 में भारत में 20,604 लैब-पुष्ट मामले और 1,763 मौतें दर्ज हुई थीं। उस समय केस-फैटेलिटी रेट करीब 8.5 प्रतिशत था। इसके मुकाबले 2024 में 20,414 मामले और 347 मौतें दर्ज हुईं, यानी मृत्यु दर करीब 1.7 प्रतिशत रही।दिल्ली में पहले भी बड़े प्रकोप
दिल्ली में 2015 के बाद H1N1 के तीन बड़े प्रकोप देखे गए हैं।
2015: 4,307 मामले
2019: 3,627 मामले
2024: 3,151 मामले
2015 में कम से कम 12 और 2019 में 31 मौतें दर्ज हुई थीं। लेकिन 2024 और 2026 में अब तक दिल्ली में H1N1 से कोई मौत दर्ज नहीं हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक मृत्यु दर में कमी के पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं- पहला, आबादी में वायरस के खिलाफ बनी कुछ प्रतिरोधक क्षमता और दूसरा, बीमारी की पहचान तथा इलाज में सुधार। H1N1 के खिलाफ वार्षिक फ्लू वैक्सीन में अब महामारी वाले स्ट्रेन से सुरक्षा भी शामिल है। इसके अलावा ओसेल्टामिविर का समय पर इस्तेमाल, बेहतर क्रिटिकल केयर और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की उपलब्धता ने गंभीर मामलों के इलाज को बेहतर बनाया है।क्या दिल्ली में कोरोना जैसी महामारी का खतरा है?
मौजूदा आंकड़ों से H1N1 को कोरोना जैसी नई महामारी मानने का आधार नहीं है। H1N1 वर्ष 2009 की महामारी के बाद अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा बन चुका है और आबादी में इसके खिलाफ कुछ स्तर की प्रतिरोधक क्षमता भी मौजूद है। हालांकि दिल्ली में इस साल मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए निगरानी और अस्पतालों की तैयारी जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की निगरानी व्यवस्था मुख्य रूप से उन मरीजों पर निर्भर करती है जो लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। इसलिए वास्तविक संक्रमण की तस्वीर परीक्षण की मात्रा और अस्पतालों में मरीजों की पहुंच के आधार पर कुछ अलग हो सकती है। दिल्ली में 1,777 H1N1 मामलों का आंकड़ा निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन अभी तक मौतों का न होना और H1N1 का मौसमी इन्फ्लुएंजा के रूप में स्थापित होना राहत देता है।