शाहदरा थाने में झड़प के बाद ACP और SHO के तबादले के खिलाफ दिल्ली पुलिसकर्मियों ने सोमवार को धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शन किया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने सवाल उठाते हुए पूछा- क्या पुलिस अपने ही जवानों पर अब FIR करेगी?
दिल्ली पुलिस के कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा
दिल्ली पुलिस के भीतर अधिकारियों के तबादले को लेकर उठे असंतोष ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एक असामान्य रूप ले लिया। शाहदरा थाने में वकीलों के साथ हुई झड़प के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के विरोध में दिल्ली पुलिस के जवान पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे।
इस प्रदर्शन पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस इलाके में पुलिस मुख्यालय स्थित है, वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है।
नेहा बोरा ने अपने ट्वीट में लिखा: “नई दिल्ली में दिल्ली पुलिस मुख्यालय उस इलाके में आता है, जहां BNSS की धारा 163 लागू है।
क्या दिल्ली पुलिस उन दिल्ली पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगी, जो दिल्ली पुलिस से नाराज हैं? आपकी बिखरती हुई व्यवस्था के संकेत हर जगह दिखाई दे रहे हैं...।”
करीब 100 पुलिसकर्मी पहुंचे पुलिस मुख्यालयः द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के करीब 100 जवान पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। पुलिसकर्मियों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शाहदरा थाने में हुई घटना के बाद उनके अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने चाहिए। पुलिसकर्मियों ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों के बीच बातचीत भी हुई। नई दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से पुलिस मुख्यालय के भीतर जाकर अपनी शिकायतें रखने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने 'पुलिस एकता जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
शाहदरा थाने में वकीलों से झड़प के बाद शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प से हुई थी। वकीलों के मुताबिक, इस घटना में वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी। इसके बाद वकील शाहदरा थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर उन्हें धमकाया। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप भी लगाए।धारा 163 को लेकर नेहा बोरा का सवाल
नेहा बोरा की टिप्पणी का मुख्य आधार BNSS की धारा 163 है। यह प्रावधान तत्काल खतरे, सार्वजनिक शांति भंग होने या किसी अप्रिय घटना की आशंका की स्थिति में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने से संबंधित है। दिल्ली पुलिस ने हाल के दिनों में नई दिल्ली के कई इलाकों में इसी प्रावधान के तहत प्रदर्शनों और सभाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। नेहा बोरा ने अपने ट्वीट में इसी प्रतिबंधात्मक व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल किया कि यदि पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र हुए हैं, तो क्या उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी?उनकी टिप्पणी का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि बोरा हाल के दिनों में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध को लेकर लगातार सवाल उठाती रही हैं। अक्टूबर में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत मुचलका भरने को कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस प्रतिबंधात्मक कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए कर रही है।
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन ने उठाए कई सवाल
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने ही विभाग के अधिकारियों के तबादले के खिलाफ पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ वकील पुलिस अधिकारियों पर दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों का एक वर्ग अपने अधिकारियों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहा है। नेहा बोरा ने इस स्थिति को दिल्ली पुलिस की व्यवस्था के बिखरने के संकेतों से जोड़ते हुए सवाल उठाया है कि क्या पुलिस अपने ही जवानों के खिलाफ उसी कानून का इस्तेमाल करेगी, जिसका इस्तेमाल आम नागरिकों और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जाता है?हालांकि, पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के संबंध में धारा 163 के उल्लंघन या एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले में अब पुलिस कमिश्नर की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों की मांगों पर प्रशासन के फैसले का इंतजार है