Delhi SIR 2026- राजधानी के 33 लाख से अधिक वोटरों में पूर्व सीएम अरविन्द केजरीवाल, सीएम रेखा गुप्ता, मशहूर वकील कपिल सिब्बल भी हैं, जिन्हें चुनाव आयोग का नोटिस मिला है। कोर्ट में सुनवाई 21 सितंबर 2026 को है।
दिल्ली एसआईआर के तहत 33 लाख नोटिस दिये गये, जिनमें ये लोग भी हैं।
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से जारी नोटिस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, बेटे पुलकित केजरीवाल और उनके माता-पिता गोबिंद राम केजरीवाल तथा गीता देवी के नाम शामिल हैं। इन सभी को पिछले SIR रिकॉर्ड से विवरण का मिलान नहीं होने यानी “No Mapping” श्रेणी में नोटिस दिया गया है।
दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी नोटिस पाने वाले मतदाताओं में शामिल है। हालांकि, उनके मामले की स्थिति केजरीवाल परिवार से अलग है। चुनाव आयोग के अनुसार रेखा गुप्ता के रिकॉर्ड में उनके और उनके माता-पिता की उम्र के बीच 15 साल से कम का अंतर दर्ज होने के कारण विसंगति सामने आई थी। दस्तावेजों और विवरण के सत्यापन के बाद उनकी मतदाता प्रविष्टि को सही मान लिया गया है और इसे अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
मशहूर वकील कपिल सिब्बल को भी नोटिस
जाने-माने वकील कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल का नाम भी नोटिस पाने वालों में है। इन दोनों के नाम भी पिछली मतदाता सूची में नहीं मिले हैं। इन्हें भी अनपैपिंग में डाला गया है। कपिल सिब्बल ने अभी तक इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं दिल्ली BJP के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, उनकी पत्नी और उनके भाई को नाम में विसंगति के आधार पर नोटिस दिए गए हैं। इससे पता चलता है कि नोटिस अलग-अलग तरह की डेटा विसंगतियों के आधार पर जारी किए गए हैं और इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल हैं।
केजरीवाल परिवार के पांच सदस्यों को नोटिस
चुनाव आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता हैं। उनके परिवार के सदस्यों समेत पार्ट-51, KG मार्ग के 110 मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। केजरीवाल परिवार के पांच सदस्यों- अरविंद केजरीवाल, सुनीता केजरीवाल, पुलकित केजरीवाल, गोबिंद राम केजरीवाल और गीता देवी- के मामले में पिछले SIR रिकॉर्ड से विवरण का मिलान नहीं हो सका।इस श्रेणी को चुनाव अधिकारियों ने “Unmapped with Last SIR” के तौर पर दर्ज किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को मतदाता के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया है। नोटिस का उद्देश्य संबंधित मतदाता को अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर देना है।
AAP ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
केजरीवाल और उनके परिवार को नोटिस मिलने के बाद आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया पर सवाल करते हुए कहा कि आखिर तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से संबंधित इस प्रक्रिया में कैसे सामने आए।AAP ने अपने बयान में तंज करते हुए पूछा, “क्या इस देश में सब कुछ सुप्रीम लॉर्ड को खुश रखने के लिए हो रहा है?” पार्टी ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में “मिसिंग” या मैपिंग से बाहर कैसे हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध चुनाव आयोग के आंकड़े यह बताते हैं कि इसी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अन्य मतदाताओं को भी अलग-अलग तरह की विसंगतियों के आधार पर नोटिस दिए गए हैं। इसलिए केजरीवाल परिवार को जारी नोटिस अपने आप में उनके मतदाता अधिकार समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
रेखा गुप्ता को किस वजह से मिला नोटिसः मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मामला “Logical Discrepancy” श्रेणी में आया। चुनाव आयोग के अनुसार उनके रिकॉर्ड में उनकी उम्र और माता-पिता की उम्र के बीच 15 वर्ष से कम का अंतर दर्ज था। सत्यापन के बाद उनके दस्तावेजों और चुनावी रिकॉर्ड को सही पाया गया और उनकी प्रविष्टि को अंतिम मतदाता सूची में बनाए रखने की पुष्टि की गई। उनका नाम AC-14, शालीमार बाग की अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, जिसे 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित किया जाना निर्धारित है।
33.12 लाख मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली SIR के दौरान कुल 33,12,919 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद हैं, लेकिन उनके रिकॉर्ड में संभावित विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें:
- 13,79,785 मतदाता पिछले SIR रिकॉर्ड से मैप नहीं हो सके।
- 19,33,134 मतदाताओं के रिकॉर्ड में “Logical Discrepancies” दर्ज की गई हैं।
इन सभी मामलों में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में हैं, लेकिन संबंधित मतदाताओं को सुनवाई और दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47.57 लाख नाम कम
दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित की गई थी। इसमें 97,53,577 मतदाता दर्ज हैं। SIR शुरू होने से पहले 30 जून को दिल्ली की मतदाता सूची में 1,45,10,299 मतदाता थे। यानी ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या करीब 32.8 फीसदी कम हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 47.57 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं। इन्हें मुख्य रूप से Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others श्रेणियों में रखा गया है। इनमें लगभग 43.3 लाख मतदाता अनुपस्थित या स्थानांतरित बताए गए हैं, करीब 2.8 लाख नाम मृत मतदाताओं की श्रेणी में और करीब 1.4 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियों के तौर पर दर्ज किए गए हैं।नोटिस का मतलब नाम हटना नहींः SIR प्रक्रिया में नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अंतिम फैसला नहीं है। संबंधित मतदाता को अपने दस्तावेज और आपत्ति/स्पष्टीकरण देने का अवसर मिलता है। इसके बाद चुनाव अधिकारी रिकॉर्ड की जांच करते हैं और अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है। इसी वजह से केजरीवाल परिवार को नोटिस दिए जाने और उनका नाम अंतिम सूची से हट जाने के बीच अंतर है। अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक परिवार को पिछले SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस जारी किया गया है।
अलग-अलग तरह की विसंगतियां
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा नई दिल्ली और शालीमार बाग के दो मतदान केंद्रों के दस्तावेजों के विश्लेषण में नोटिस जारी करने के कई कारण सामने आए हैं।
सरोजिनी नगर के एक मतदान केंद्र पर 84 मतदाताओं को विसंगति या पुराने SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने के कारण सूचीबद्ध किया गया। इनमें 37 मामले पुराने SIR से मैप नहीं होने, 24 माता-पिता के नाम में अंतर और 13 मतदाताओं के अपने नाम में अंतर से जुड़े थे। सात मामलों में संतान की उम्र के बीच नौ महीने से कम का अंतर दर्ज था। एक मामले में माता-पिता और मतदाता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर पाया गया।
शालीमार बाग के एक मतदान केंद्र पर 233 मतदाताओं को नोटिस सूची में रखा गया। इनमें 108 पुराने SIR से मैप नहीं हो सके, 54 मामलों में माता-पिता के नाम में अंतर और 37 मामलों में मतदाता के अपने नाम में विसंगति थी। इसके अलावा माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर, संतान की जन्मतिथि के बीच नौ महीने से कम का अंतर और दादा-दादी की उम्र से जुड़े कुछ मामलों को भी विसंगति के तौर पर दर्ज किया गया।
मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ी
SIR के तहत दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या में भी बदलाव किया गया है। सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है। यानी इसमें करीब 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। चुनाव अधिकारियों ने सभी 14,947 मतदान केंद्रों की सूची भी अपलोड की है।सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा
दिल्ली SIR में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि नोटिस पाने वाले सभी मतदाताओं की एक समेकित और खोज योग्य सूची सार्वजनिक की जाए और यह बताया जाए कि प्रत्येक मतदाता को किस विशेष कारण से नोटिस दिया गया है। याचिका में “Logical Discrepancies” की श्रेणी तय करने के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंड, परिभाषा और अन्य प्रक्रियात्मक मापदंडों को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां
दिल्ली SIR में ड्राफ्ट मतदाता सूची के खिलाफ दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। अधिकारियों को नोटिस और दावों का निपटारा 29 अक्टूबर तक करना है, जबकि SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने का कार्यक्रम है। इस बीच, 31 अगस्त से 16 सितंबर के बीच कुल 91,826 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें 22,715 आवेदन मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड में सुधार या बदलाव के लिए Form 8 के तहत थे, 922 Form 7 आवेदन नाम हटाने से संबंधित थे और 146 Form 6A आवेदन विदेशी मतदाताओं से जुड़े थे। Form 6 के जरिए नए नाम जोड़ने या दोबारा शामिल करने के आवेदन भी प्राप्त हुए हैं।