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दिल्ली दंगा: पूर्व आईपीएस रिबेरो ने बीजेपी नेताओं को ‘लाइसेंस’ देने पर उठाए सवाल

दिल्ली दंगों की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस पर लगातार सवाल दाग रहे पूर्व आईपीएस अफ़सर जूलियो रिबेरो ने एक बार फिर उसे कटघरे में खड़ा किया है। रिबेरो ने बुधवार को दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को ख़त लिखकर कहा है कि कमिश्नर ने ‘बीजेपी के तीन बड़े नेताओं को लाइसेंस’ दिए जाने की बात का जवाब नहीं दिया है। 

इस साल फ़रवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर और जाफ़राबाद समेत कुछ इलाक़ों में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। 

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे रिबेरो ने कुछ दिन पहले कमिश्नर श्रीवास्तव को ख़त लिखकर कहा था कि दिल्ली पुलिस उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे जबकि हिंसा से पहले सांप्रदायिक और उकसाने वाला भाषण देने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने लिखा था कि 'सच्चे देशभक्तों' को आपराधिक मामलों में घसीटा जा रहा है। 

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पंजाब और गुजरात के डीजीपी जैसे अहम ओहदों पर काम कर चुके रिबेरो ने अब ताज़ा ख़त में दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को लिखा है, ‘मेरे द्वारा लिखे गए खुले ख़त में कुछ संदेह हैं, जिन पर आपने ध्यान नहीं दिया है। मुझे लगता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को धमकाने वाले बीजेपी के तीन वरिष्ठ नेताओं को लाइसेंस दिए जाने को सही ठहराना बेहद मुश्किल या वास्तव में असंभव है।’

रिबेरो आगे लिखते हैं कि अगर भाषण देने वाले लोग मुसलिम या वामपंथी होते तो पुलिस निश्चित रूप से उन पर देशद्रोह का मुक़दमा लगा देती। 

बीते रविवार को रिबेरो ने कमिश्नर श्रीवास्तव को चिट्ठी लिखकर कहा था कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा से दिल्ली दंगों को लेकर पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।

रिबेरो ने लिखा था, ‘दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, लेकिन वह जानबूझकर नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने वालों के ख़िलाफ़ संज्ञेय अपराध दर्ज करने में विफल रही, जिससे पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे भड़क गए।’ रिबेरो को पद्म भूषण अवार्ड भी मिल चुका है और वह रोमानिया में भारत के राजदूत रहे हैं। 

दिल्ली दंगों को लेकर देखिए, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष का वीडियो- 
आपको याद दिला दें कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान हुई एक जनसभा में देश के गद्दारों को…का नारा लगाया था। इसे लेकर सोशल मीडिया व आम जनमानस में तीख़ी प्रतिक्रिया हुई थी। जबकि कपिल मिश्रा व प्रवेश वर्मा ने भी नफ़रती बयानबाज़ी की थी। रिबेरो ने लिखा था कि हर्ष मंदर और प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद जैसे सच्चे देशभक्तों को आपराधिक मामलों में घसीटना एक और चिंता की बात है।
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इसके बाद श्रीवास्तव की ओर से रिबेरो को लिखे ख़त में कहा गया था, ‘पुलिस बिना धर्म या पार्टी से जुड़ाव को देखकर लोगों से पूछताछ कर रही है और हमने सबूत इकट्ठा किए हैं, जो इस केस में काफी मददगार हैं।’ 

पुलिस ने दाख़िल की चार्जशीट 

दिल्ली पुलिस ने बुधवार को फ़रवरी में हुए दंगों को लेकर अदालत में 17,500 पेज की चार्जशीट पेश की थी। चार्जशीट में जिन 15 लोगों को नामजद किया गया है, उनमें प्रमुख नाम आम आदमी पार्टी से निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का है। चार्जशीट में वे लोग ज़्यादा नामजद हैं, जो सीएए विरोधी आंदोलन से जुड़े हुए थे और जिन्होंने दिल्ली में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए थे। पुलिस ने चार्जशीट में सबूत के तौर पर कॉल डेटा रिकॉर्ड और वॉट्सएप चैट को शामिल किया है। पुलिस ने इन अभियुक्तों पर अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ प्रीवेन्शन एक्ट यानी यूएपीए लगाने के लिए सरकार से अनुमति ले ली है।

9 पूर्व आईपीएस अफ़सरों के भी सवाल

रिबेरो के अलावा 9 पूर्व आईपीएस अफ़सरों ने भी दिल्ली दंगों की जांच को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को ख़त लिखकर कहा था कि सीएए के ख़िलाफ़ विचार रखने के लिए नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को तो घसीटा जा रहा है, लेकिन जिन्होंने हिंसा भड़काई और जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं उन्हें छोड़ दिया गया है। 

ख़त लिखने वालों में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो से सेवानिवृत्त हुए सफ़ी आलम, सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक के. सलीम अली, पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) मोहिंद्र पाल औलख, प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व ओएसडी एएस दुलत सहित कई लोग शामिल हैं। 

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