जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट पर पत्थरों से लदे जिस ट्रक को आंदोलन को बदनाम करने के लिए साज़िश के रूप में देखा जा रहा था उसको लेकर अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। न्यूज़लॉन्ड्री की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह ट्रक कोई सामान्य वाहन नहीं था, बल्कि दिल्ली पुलिस ने इसे प्रदर्शन से चार दिन पहले एक सड़क दुर्घटना के बाद जब्त किया था। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि पुलिस द्वारा ज़ब्त यह ट्रक आखिर जंतर-मंतर तक कैसे पहुँच गया। इसकी पड़ताल में और भी बड़े रहस्य का पता चला। ट्रक को जब्त किए जाने के बाद कम से कम चार अलग-अलग जगहों पर देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रदर्शन के दिन सीजेपी ने उठाया था मुद्दा

20 जुलाई की सुबह क़रीब 8 बजे जब कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जुटे तब उन्होंने संसद मार्ग से प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाली सड़क पर पत्थरों से भरा एक डंपर ट्रक देखा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पूछा था कि भारी पुलिस सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बावजूद यह ट्रक प्रदर्शन स्थल तक कैसे पहुंच गया।
सीजेपी ने आरोप लगाया था कि ट्रक में भरे पत्थरों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को फँसाने या हिंसा भड़काने के लिए किया जा सकता था। उस समय दिल्ली पुलिस की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया गया था।

चार दिन पहले पुलिस ने किया था जब्त

इस ट्रक के पूरे घटनाक्रम को लेकर न्यूज़लॉन्ड्री ने पड़ताल कर रिपोर्ट दी है कि ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर HR63 E 6865 है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 16 जुलाई की सुबह करीब 4:15 बजे फिरोजशाह रोड और कस्तूरबा गांधी मार्ग के चौराहे पर इस ट्रक की एक मारुति ईको वैन से टक्कर हुई थी। इस मामले में एक एफ़आईआर भी दर्ज हुई थी।
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एफआईआर के अनुसार दुर्घटना में वैन में सवार सात लोग घायल हो गए थे। हादसे के बाद ट्रक और वैन दोनों को संसद मार्ग थाने लाया गया और ट्रक पुलिस के मालखाने की निगरानी में रखा गया।

ट्रक के मालिक ने क्या कहा?

रिपोर्ट में ट्रक के अंतिम पंजीकृत मालिक केशव कुमार साहनी के हवाले से कहा गया है कि ट्रक ईंट और पत्थर ढोने के काम में इस्तेमाल होता था। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद से ट्रक पुलिस के कब्जे में था। हालाँकि उनका कहना है कि उन्होंने यह ट्रक क़रीब दो महीने पहले बेच दिया था और बिक्री का समझौता उनके पास मौजूद है। वहीं दुर्घटनाग्रस्त वैन के मालिक के रिश्तेदार चरण सिंह ने भी बताया कि ट्रक में दुर्घटना के समय ईंट और पत्थर भरे हुए थे।

पुलिस के तीन अलग-अलग बयान

रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्ग थाने के अधिकारियों ने ट्रक की आवाजाही को लेकर अलग-अलग दावे किए। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर न्यूज़लॉन्ड्री से कहा कि ट्रक थाने के बाहर खड़ा था, लेकिन 20 जुलाई को उसका वीडियो वायरल होने के बाद उसे भलस्वा ले जाकर खाली कराया गया और फिर वापस लाया गया।

जांच अधिकारी मोहित भाटी ने कहा कि प्रदर्शन के कारण थाने में जगह कम थी, इसलिए ट्रक को दूसरी जगह भेजा गया था। हालाँकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि बाद में ट्रक यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर कैसे पहुँचा। दूसरी ओर संसद मार्ग थाना प्रभारी नीरज कुमार ने दावा किया कि ट्रक को 19 जुलाई यानी प्रदर्शन से एक दिन पहले ही खाली कर दिया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पुराने थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस के ये तीनों बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।

यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी मिला वही ट्रक

रिपोर्ट के अनुसार, 25 जुलाई को भारतीय युवा कांग्रेस ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें यही ट्रक रायसीना रोड स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर खड़ा दिखाई दिया। दिल्ली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने दावा किया कि ट्रक करीब चार दिनों तक उनके कार्यालय के बाहर खड़ा रहा।

उन्होंने कहा कि कई शिकायतों के बाद पुलिस ने 25 जुलाई को दोपहर में इसे वहां से हटाया। लाकड़ा ने सवाल उठाया कि जिस इलाके में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक है, वहां यह ट्रक कई दिनों तक बिना किसी कार्रवाई के कैसे खड़ा रहा।

यूट्यूबर ने भी किया था दावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 जुलाई को यूट्यूबर रतन रंजन ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर दावा किया था कि यह वही ट्रक है जो जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान देखा गया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी जांच की मांग भी की थी।

क्षतिग्रस्त वैन को लेकर भी सवाल

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने आरोप लगाया था कि एक टूटी हुई वैन को प्रदर्शन स्थल के पास रखकर बाद में प्रदर्शनकारियों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया जा सकता है। हालांकि संसद मार्ग थाने के कुछ कर्मचारियों ने कहा कि यह वैन प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी थी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की अपनी एफआईआर बताती है कि यह वही मारुति ईको वैन थी, जो 16 जुलाई की सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुई थी।

वैन से जुड़े व्यक्ति चरण सिंह ने भी कहा कि उन्होंने वाहन जहां छोड़ा था, वह जगह अलग थी और बाद में उसे कहीं और पहुंचा दिया गया।
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ट्रक आखिर है कहां?

रिपोर्ट के अनुसार, मालखाने के एक पुलिसकर्मी ने दावा किया कि ट्रक फिलहाल कालीबाड़ी मार्ग स्थित ट्रैफिक पिट में रखा गया है। हालाँकि न्यूज़लॉन्ड्री ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब उनकी टीम वहां पहुंची, तो ट्रक वहां मौजूद नहीं था।

न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की हिरासत में रखा गया ट्रक जंतर-मंतर कैसे पहुंचा? ट्रक को लेकर पुलिस अधिकारियों के बयान अलग-अलग क्यों हैं? ट्रक बाद में यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर कैसे पहुंच गया? जब्त वाहन की आवाजाही का रिकॉर्ड क्या है? यदि ट्रक पहले ही खाली किया जा चुका था, तो प्रदर्शन के दौरान वह पत्थरों से भरा कैसे दिखाई दिया?

इन सवालों पर फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आयी है। वहीं, रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच की आवश्यकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।