जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति यानी ICC ने जांच शुरू कर दी है। हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि ये आरोप मई के पहले हफ़्ते में हुई वाइवा परीक्षाओं से जुड़े हैं, जब प्रोफ़ेसर ने कथित तौर पर यौन टिप्पणियां की थीं।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU में एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ 11 छात्राओं ने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति यानी ICC के पास शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत मिलने के बाद आईसीसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई छात्राओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। हालाँकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। प्रोफेसर का नाम भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि यह मामला मई 2026 का है। इसी दौरान विश्वविद्यालय में लगभग 45 दिनों की सेमेस्टर छुट्टियां शुरू हो गई थीं। जुलाई के मध्य में नए सत्र के साथ जब छात्र-छात्राएं वापस लौटे, तब इस मामले की चर्चा फिर तेज हो गई। इस बीच आईसीसी ने प्रारंभिक जांच शुरू की और संबंधित छात्राओं को अपने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया।
वाइवा परीक्षा के दौरान हुई कथित घटना
यह मामला मई के पहले सप्ताह में हुई वाइवा परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि वाइवा के दौरान संबंधित प्रोफेसर ने कुछ छात्राओं से यौन संकेतों वाली ग़लत टिप्पणियां कीं। अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार बाद में एक छात्रा ने अपना अनुभव छात्रों के एक अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया। इसके बाद कई अन्य छात्राओं ने भी बताया कि उनके साथ भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद कुल 11 छात्राओं ने एक साथ शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।
अतिरिक्त अंक देने का भी आरोप
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रोफेसर ने छात्राओं से कहा कि यदि वे उनकी यौन इच्छाओं को स्वीकार करें तो उन्हें परीक्षा में अतिरिक्त अंक दिए जा सकते हैं। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इसे विश्वविद्यालय के यौन उत्पीड़न विरोधी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
इतनी देरी से क्यों मामला सामने आया?
बताया जा रहा है कि शुरुआत में यह मामला सार्वजनिक नहीं था। दूसरे सप्ताह में एक छात्रा ने अपने साथ हुई घटना का जिक्र केवल छात्रों वाले एक व्हाट्सएप समूह में किया। इसके बाद कई छात्राओं ने एक जैसी शिकायतें सामने रखीं।
सभी शिकायतों को एक साथ बाद में विश्वविद्यालय की आईसीसी के पास औपचारिक शिकायत दी गई। इसके बाद समिति ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए जेएनयू प्रशासन से संपर्क किया गया था, लेकिन ख़बर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। विश्वविद्यालय ने यह भी साफ़ नहीं किया है कि जाँच पूरी होने तक संबंधित प्रोफेसर के ख़िलाफ़ कोई अंतरिम प्रशासनिक कार्रवाई की गई है या नहीं।
विश्वविद्यालयों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया जाता है। यह समिति शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों का पक्ष सुनती है, गवाहों के बयान दर्ज करती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी सिफारिश विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजती है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल यह मामला जाँच के अधीन है। छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं और आईसीसी ने जाँच शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित प्रोफेसर की ओर से भी सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जाँच पूरी होने के बाद ही यह साफ़ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह पहला मौक़ा नहीं है जब जेएनयू में किसी शिक्षक पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हों। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने एक वरिष्ठ प्रोफेसर सहित चार कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उस मामले में एक जापानी अधिकारी ने प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।विश्वविद्यालय की जांच में आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित प्रोफेसर को नौकरी से हटा दिया गया था। उस समय भी बताया गया था कि उनके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी थीं।