दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में खुद अपनी बात रखते हुए कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के आदेशों और व्यवहार से उनके मन में निष्पक्ष सुनवाई की आशंका पैदा हो गई है। इसलिए उन्होंने जस्टिस शर्मा से रिक्यूजल यानी मामले से खुद को अलग करने की मांग की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के चार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है, जो आरएसएस से जुड़ा संगठन है। उन्होंने दलील दी कि आपका चार बार वहां जाना मेरे मन में आशंका पैदा करता है कि मुझे न्याय मिलेगा या नहीं।
केजरीवाल दिल्ली शराब नीति घोटाले के मामले में जस्टिस शर्मा की बेंच के सामने अपनी रिक्यूजल याचिका पर व्यक्तिगत रूप से बहस कर रहे थे। सुनवाई करीब 4.5 घंटे चली, जिसके बाद जज ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया यानी फ़ैसला बाद में सुनाया जाएगा।

केजरीवाल की मुख्य दलीलें

रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल ने कहा, 'एक ट्रेंड दिख रहा है कि सीबीआई और ईडी की हर बात कोर्ट मान लेती है। जब भी वे कुछ कहते हैं, तो तुरंत ऑर्डर उनके पक्ष में पास हो जाता है। उनकी हर प्रार्थना को जजमेंट बना दिया जाता है।'
ताज़ा ख़बरें
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने तीन महीने की सुनवाई और 40000 पेज के दस्तावेज पढ़ने के बाद 27 फरवरी 2026 को उन्हें और 22 अन्य आरोपियों को पूरी तरह बरी कर दिया था। लेकिन जस्टिस शर्मा ने सिर्फ 5-10 मिनट की सुनवाई में उस फ़ैसले को आंशिक रूप से रोक दिया और कहा कि ट्रायल कोर्ट के कुछ निष्कर्ष गलत हैं।
केजरीवाल ने दलील दी, 'जब मेरे मामले में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनने वाले की बात आई तो आपने पहले कहा था कि अप्रूवर के बयान मान्य हैं। लेकिन अब 5 मिनट की सुनवाई में आपने कहा कि ट्रायल कोर्ट का निष्कर्ष गलत है। यह सबसे चिंताजनक बात है।'
केजरीवाल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पूरी तरह बेकसूर माना, जबकि हाई कोर्ट में उन्हें लगभग भ्रष्ट और दोषी घोषित कर दिया गया था। सिर्फ सजा बाकी रह गई थी। 

केजरीवाल ने दलील दी कि सीबीआई का पूरा केस सिर्फ अप्रूवर के बयानों पर टिका है, और जस्टिस शर्मा ने उन बयानों को लेकर सवाल उठाकर ट्रायल कोर्ट के पूरे फैसले को कमजोर कर दिया।

सत्येंद्र जैन मामले का हवाला

केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन वाले पुराने मामले का जिक्र किया। उसमें ईडी ने जज से रिक्यूजल की मांग की थी क्योंकि उन्हें पक्षपात की आशंका थी। कोर्ट ने ईडी की मांग मान ली थी। केजरीवाल ने कहा, 'ईडी को आशंका थी तो रिक्यूजल हो गया। अब मेरे मन में भी आशंका है। मुझे भी वही बराबरी चाहिए। कानून यही कहता है कि जज वास्तव में पक्षपाती हैं या नहीं, यह नहीं देखा जाता। अगर मुकदमे वाले व्यक्ति के मन में आशंका है तो रिक्यूजल हो जाना चाहिए।'
केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी, संजय सिंह, कविता की जमानत याचिकाओं में भी ऐसी टिप्पणियां कीं जो लगभग फैसले जैसी थीं। उन्होंने दावा किया कि इस केस में सुनवाई की रफ्तार बहुत तेज है, जबकि अन्य आपराधिक रिवीजन याचिकाओं में इतनी तेजी नहीं दिखती। दोनों मामले प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं से जुड़े हैं।
दिल्ली से और ख़बरें
उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के चार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है, जो आरएसएस से जुड़ा संगठन है। केजरीवाल ने कहा, 'उनकी विचारधारा हम खुलकर विरोध करते हैं। आपका चार बार वहां जाना मेरे मन में आशंका पैदा करता है कि मुझे न्याय मिलेगा या नहीं।' इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जज के कार्यक्रम में शामिल होने का बचाव करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट के मौजूदा जजों ने भी बार एसोसिएशन के इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की प्रतिक्रिया

सीबीआई की तरफ़ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा, 'रिक्यूजल याचिका जज में डर पैदा करने की कोशिश है। इसे सख्ती से खारिज किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'जज जवाब नहीं दे सकते। ऐसी मोटिवेटेड याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट भी सख्ती से निपटाने को कहता है।' उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा ने पहले भी शराब नीति मामले में कुछ आरोपियों को राहत दी है, इसलिए पक्षपात का आरोप गलत है।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

जस्टिस शर्मा ने क्या कहा?

जस्टिस शर्मा ने बीच-बीच में कहा, 'मुझे आपकी यह दलील समझ नहीं आ रही। आप जज की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि अपनी आशंका बता रहे हैं।' सुनवाई के अंत में उन्होंने कहा, 'मेरी जिंदगी में पहली बार किसी ने मुझे रिक्यूजल करने को कहा। मैंने रिक्यूजल कानून पर बहुत कुछ सीखा। उम्मीद है कि मैं अच्छा फैसला दूंगी।'

ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला क्या था?

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। सीबीआई ने उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किया और ट्रायल कोर्ट के कुछ आदेशों को आंशिक रूप से रोक दिया।

अब कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की रिक्यूजल याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस शर्मा जल्द ही बताएंगी कि वे मामले से खुद को अलग करेंगी या नहीं। यह मामला दिल्ली की राजनीति और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए काफी चर्चित है। फ़ैसला आने के बाद आगे की सुनवाई तय होगी।