दिल्ली सरकार ने नवंबर 2024 में नई आबकारी नीति को सामने रखा था। उस समय आम आदमी पार्टी की सरकार थी। अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री थे। मनीष सिसोदिया डिप्टी सीएम थे, आबकारी विभाग उनके पास था। नई आबकारी नीति को लेकर तत्कालीन दिल्ली सरकार का तर्क था कि दिल्ली में 849 शराब की दुकानों में से 60 फ़ीसदी दुकानें सरकार की हैं और ये दुकानें निजी दुकानों के मुक़ाबले सरकार को बहुत कम टैक्स देती हैं। 
तत्कालीन दिल्ली सरकार का कहना था कि दिल्ली में शराब माफ़िया की जबरदस्त पकड़ है और सरकार की 849 दुकानों के अलावा 2 हज़ार दुकानें शराब माफिया चलाते हैं। ये दुकानें घरों-गोदामों से चलती हैं। दिल्ली सरकार का कहना था कि सरकारी दुकानों में टैक्स चोरी से लेकर तमाम तरह की गड़बड़ियां हैं और बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी हो रही है। इसलिए नई आबकारी नीति ज़रूरी है।
नई आबकारी नीति को लेकर केजरीवाल सरकार का कहना था कि शराब की दुकानों को पॉश और स्टाइलिश दुकानों में बदला जाएगा। इस नीति में यह भी कहा गया था कि शराब पीने वाले अब सुबह 3 बजे तक होटल, क्लब, रेस्तरां और बार में आराम से शराब पी सकते हैं।
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जमकर बिकी थी शराब

दिल्ली में नई आबकारी नीति का एलान होने के बाद शराब की दुकानों के बाहर लंबे वक्त तक अच्छी-खासी लाइनें लगी रही। इसकी वजह यह थी कि शराब की एक बोतल के साथ एक बोतल फ्री मिल रही थी और एक पेटी के साथ एक पेटी फ्री। कई जगहों पर शराब की कीमत बहुत ज्यादा गिरा दी गई थी। नई आबकारी नीति आने के बाद शराब बेहद सस्ती हो गई थी। कई शराब विक्रेताओं ने एमआरपी पर 40 प्रतिशत तक छूट दी थी।

नई शराब नीति से कंपनियों और दुकानदारों को छूट मिली कि वे एमआरपी से कम दाम पर शराब बेच सकते थे। क़ीमतें कम होने से उनकी बिक्री ज़्यादा हो गई थी और इससे कंपनियों और दुकानदारों के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी। 

एलजी वीके सक्सेना की नज़र

दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना की नजर इस घटनाक्रम पर थी। एलजी ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी से इस पर रिपोर्ट मांगी। मुख्य सचिव ने जांच के बाद दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पहली नजर में ऐसा स्पष्ट होता है कि जीएनसीटीडी अधिनियम 1991, व्यापार नियमों का लेनदेन (टीओबीआर) 1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम 2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम 2010 का उल्लंघन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि शराब लाइसेंसधारियों को निविदा के बाद ‘अनुचित’ लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर चूक की गई।
मुख्य सचिव की यह रिपोर्ट उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों को भेजी गई थी और इसमें कहा गया था कि शीर्ष राजनीतिक स्तर पर किसी चीज के बदले में किया गया फेवर या फायदा दिए जाने के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि आबकारी विभाग के प्रभारी मंत्री मनीष सिसोदिया ने तमाम फैसले लिए। इस दौरान स्थापित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ और नई आबकारी नीति को नोटिफाइड कर दिया गया जिसका वित्तीय मामलों में बड़ा असर पड़ा।

सिसोदिया ने तब क्या कहा था

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना था कि दिल्ली सरकार की जिस आबकारी नीति को लेकर विवाद हो रहा था, वह सबसे अच्छी आबकारी नीति थी और दिल्ली सरकार उस आबकारी नीति को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू कर रही थी। उन्होंने कहा था कि अगर दिल्ली के तत्कालीन उप राज्यपाल ने 48 घंटे पहले उस आबकारी नीति को फेल करने की साजिश के तहत अपना फैसला नहीं बदला होता तो दिल्ली सरकार को इस आबकारी नीति से कम से कम 10000 करोड़ रुपये हर साल मिलते। उन्होंने कहा था कि नई आबकारी नीति में किसी तरह का कोई घोटाला नहीं हुआ था।

केजरीवाल सरकार के द्वारा लाई गई और फिर वापस ली गई आबकारी नीति के मामले में जांच एजेंसी ईडी ने बीते महीनों में देशभर में कई जगहों पर छापेमारी की है। ईडी ने दिल्ली में 25 जगहों पर छापेमारी की थी जबकि उससे पहले दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हैदराबाद में 35 जगहों पर ईडी के अफसरों की टीम पहुंची थी। आरोप था कि विजय नायर, मनोज राय, अमनदीप ढल और समीर समीर महेंद्रु दिल्ली की नई आबकारी नीति बनाने और इसे लागू करने के काम में हुई गड़बड़ियों में शामिल थे। सीबीआई ने विजय नायर और ईडी ने समीर महेंद्रू को गिरफ्तार किया था। नायर आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग का प्रभारी रहा है। विजय नायर ही आम आदमी पार्टी को बॉलीवुड तक लेकर गया। कारवां मैगजीन ने विजय नायर के बॉलीवुड कनेक्शन को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए थे।