जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान कथित पैलेट चलाए जाने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमित शाह पर हमला और भी तेज कर दिया। एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए पैलेट गन से घायल छात्र साहिल लोचाव के साथ डीसीपी ऑफिस के बाहर राहुल धरने पर बैठ गए।
डीसीपी कार्यालय के बाहर राहुल गांधी धरने पर
राहुल गांधी जंतर मंतर प्रोटेस्ट में पैलेट गन से घायल एक छात्र के साथ नई दिल्ली डीसीपी कार्यालय के बाहर यह आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए कि इस मामले में एफ़आईआर दर्ज नहीं की जा रही है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान उस छात्र की आंख में कथित तौर पर पैलेट गन लगने का आरोप है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार सच छिपाने की कोशिश कर रही है, लेकिन न्याय होकर रहेगा।
राहुल ने मीडिया को बताया, 'लोचब की आँख में तीन छर्रे धँसे हुए थे और शरीर में 200 छर्रे थे। उनके दिल के पास कुछ छर्रे हैं जिन्हें निकाला नहीं जा सकता। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने पैलेट गन नहीं चलाईं। अगर पुलिस ने नहीं चलाईं तो पैलेट गन किसने चलाईं? पुलिस ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिला था कि पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज न की जाए।'
इससे पहले राहुल गांधी 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाव के साथ पहले मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस का आरोप है कि वहां पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद राहुल गांधी छात्र के साथ संसद मार्ग स्थित डीसीपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, जब वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो राहुल गांधी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
FIR दर्ज न करने के लिए 'ऊपर से आदेश' मिले: राहुल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पैलेट गन से लगी चोट के मामले में एफ़आईआर दर्ज न करने के लिए 'ऊपर से आदेश' मिले हैं। साहिल लोचव की चोटों का ज़िक्र करते हुए गांधी ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से पता चला है कि उसके शरीर में, यहाँ तक कि उसकी आँख में भी पैलेट धँसे हुए हैं और हो सकता है कि उसकी एक आँख की रोशनी चली जाए। उन्होंने यह भी कहा कि साहिल के दिल के पास भी पैलेट धँसे हुए हैं और उन्हें निकाला नहीं जा सकता।कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को हजारों छात्र संसद मार्च के लिए निकले थे। छात्र नीट पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया और पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए कार्रवाई की। कांग्रेस और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि इस दौरान रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ़ ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस के मुताबिक, दिल्ली के नजफगढ़ निवासी साहिल लोचाव की दाहिनी आंख में पैलेट लगी थी। उनकी सर्जरी हुई, लेकिन अब भी आंख में धातु का एक टुकड़ा मौजूद है। राहुल गांधी इससे पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साहिल को मीडिया के सामने ला चुके हैं और उनकी चोट को दिखाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं: कांग्रेस
कांग्रेस का कहना है कि साहिल लोचाव ने 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी पुलिस से संपर्क किया गया। लेकिन न तो जांच अधिकारी का नाम बताया गया। और न ही शिकायत की कोई आधिकारिक रसीद या स्वीकारोक्ति दी गई। कांग्रेस का आरोप है कि यह एक संज्ञेय अपराध का मामला है, इसलिए पुलिस को कानून के अनुसार तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी।
राहुल गांधी का अमित शाह पर हमला
धरने के दौरान राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अमित शाह, आप न्याय से इतने डरे हुए क्यों हैं? आपका यह डर बताता है कि आप अपना अपराध स्वीकार कर रहे हैं।'उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर दर्ज होगी, न्यायिक जांच होगी और इस घटना के लिए जिम्मेदार ऊपर से नीचे तक सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। राहुल गांधी पहले भी संसद के भीतर और बाहर अमित शाह से यह सवाल पूछ चुके हैं कि क्या प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने की अनुमति उन्होंने दी थी।
पैलेट गन को लेकर लगातार विवाद
दिल्ली पुलिस लगातार यह कहती रही है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। हालाँकि इस दावे पर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि कई छात्रों के शरीर में पैलेट जैसी चोटें मिलीं। मेडिकल रिपोर्टों में भी ऐसी चोटों का उल्लेख है। और कई तस्वीरें तथा वीडियो इस ओर इशारा करते हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था।
CRPF की जांच में भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ की आंतरिक जांच में भी सवाल उठे। रिपोर्टों के अनुसार, जाँच में पाया गया कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने पैलेट गन से सात राउंड फायर किए, जिनमें से पांच पैलेट प्रदर्शनकारियों को लगे। हालाँकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया है।तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस घटना में कम से कम 10 लोगों को पैलेट लगने से चोटें आईं। इन खुलासों के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
पैलेट गन के कथित इस्तेमाल का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में भी जोर-शोर से उठा। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए लगातार हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही कई दिनों तक प्रभावित रही। वहीं, यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक और असंगत बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है।
अब राहुल गांधी का पुलिस स्टेशन पहुंचना और डीसीपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठना इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ले आया है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक छात्र को न्याय नहीं मिलेगा और एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक वह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।