loader

मोदी सरकार क्यों अपनी क़ब्र खोद रही है?

कांग्रेस के प्रवक्ता कह रहे हैं, बस चार-छह महीने की देर है। जैसे ही पप्पूजी सत्ता में आए, रफ़ाल-सौदे की जांच होगी और गप्पूजी अंदर हो जाएंगे। वाह क्या बात है हमारे नेताओं की! उनकी इस अदा पर क़ुरबान हो जाने को जी चाहता है। 
डॉ. वेद प्रताप वैदिक
इधर ख़बरें गर्म हैं कि अलग-अलग प्रांतों में विरोधी दलों के बीच गठबंधन बन रहे हैं, जैसे मायावती और अखिलेश का उत्तर प्रदेश में, शरद पवार और कांग्रेस का महाराष्ट्र में, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का दिल्ली में। दूसरी तरफ़ ख़बर है कि विपक्ष के नेताओं को जेल जाने की तैयारी के लिए कहा जा रहा है। सोनिया और राहुल तो 'नेशनल हेरल्ड' के मामले में ज़मानत पर पहले से हैं, मायावती पर मुक़दमा चल ही रहा है, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी कहा जा रहा है कि तैयार रहो, तुम्हारे ख़िलाफ़ खदान घोटाले की जांच चल रही है और कहीं ऐसा न हो कि 2019 के चुनाव के पहले तुम जेल काटने लगो।

राजनीति में चोर-चोर मौसेरे भाई

चौटाला और लालू यादव को देख रहे हो या नहीं ? उधर कांग्रेस के प्रवक्ता कह रहे हैं, बस चार-छह महीने की देर है। जैसे ही पप्पूजी सत्ता में आए, राफ़ेल-सौदे की जांच होगी और गप्पूजी अंदर हो जाएंगे। वाह क्या बात है, हमारे नेताओं की ! उनकी इस अदा पर कुरबान हो जाने को जी चाहता है। सबको पता है कि भ्रष्टाचार के बिना आज की राजनीति हो ही नहीं सकती। सारे नेता जानते हैं कि जैसे सत्ता में रहते हुए उन्होंने बेलगाम भ्रष्टाचार किया है, बिल्कुल वैसा ही अब उनके विरोधी भी कर रहे हैं या कर रहे होंगे। सत्ता में रहने पर खुद को चोरी करनी पड़ी है तो उसी कुर्सी में बैठनेवाले को चोर कहने में उन्हें संकोच क्यों होगा ? चोर चोर मौसेरे भाई ! लेकिन यहां एक प्रश्न है। यदि आपको यह शक है या आपको पूरा विश्वास है कि
सत्ता में रहते हुए इन विरोधी नेताओं ने अवैध लूटपाट की है तो मैं आपसे पूछता हूं कि आप साढ़े चार साल से क्या घास काट रहे थे ? कौन सा कंबल ओढ़कर आप खर्राटे खींच रहे थे?

आपने अखिलेश, मायावती, हुड्डा वगैरह पर तब ही मुक़दमे क्यों नहीं चलाए? यदि वे मुख्यमंत्री रहते हुए जेल जाते तो अदालत की तो साख बढ़ती ही, आपके बारे में भी यह राय बनती कि यह उन राष्ट्रभक्तों की सरकार है, जो किसी का लिहाज़ नहीं करती है और ‘न ख़ुद खाती है और न किसी को खाने देती है।' लेकिन अब चुनाव के वक़्त आपके पिंजरे का तोता (सीबीआई) चाहे जितना रोए-पीटे, उसकी कोई कद्र होने वाली नहीं है। उसकी कोई सुननेवाला नहीं है। 

इन नेताओं ने सचमुच कुछ जघन्य अपराध यदि किए भी हों, तब भी लोग यही मानेंगे कि सरकार अपनी खाल बचाने के लिए इनकी खाल उधेड़ने में जुटी हुई है। महागठबंधन की खबरों से डरी हुई सरकार अगर इस वक्त यह पैतरा अपनाएगी तो वह अपनी क़ब्र खुद खोदेगी। 

(डॉ. वेद प्रताप वैदिक के ब्लॉग से साभार)
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
डॉ. वेद प्रताप वैदिक
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

ब्लॉग से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें