अहमदाबाद के आनंद निकेतन स्कूल में मलाला युसुफजई की आत्मकथा और एनी फ्रैंक की किताब को हटाने की दक्षिणपंथियों की मांग से विवाद शुरू हुआ। जब सिविल सोसाइटी के लोगों ने किताबों को हटाने के विरोध में रीडिंग सेशन आयोजित किया तो उनपर हमला हो गया।
मलाला युसुफजई की किताब के विरोध में मारपीट
मलाला युसुफजई की आत्मकथा 'आई एम मलाला' पढ़ने के लिए अहमदाबाद में हुए एक रीडिंग सेशन पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि हमले में शामिल छह अन्य लोगों की पहचान भी कर ली गई है और उनकी तलाश जारी है।
यह बवाल क़रीब एक पखवाड़ा पहले तब खड़ा हुआ जब अहमदाबाद के आनंद निकेतन स्कूल में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मलाला युसुफजई की आत्मकथा और ऐनी फ्रैंक की प्रसिद्ध किताब 'द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' को लेकर दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध जताया। इसके बाद इन किताबों को हटाने के फ़ैसले के विरोध में छात्रों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने गुरुवार को एक साइलेंट रीडिंग सेशन आयोजित किया, जिस पर हमला हो गया।
हमले का आरोप किनपर?
गुरुवार यानी 27 अगस्त को अहमदाबाद के वस्त्रपुर गार्डन में छात्रों और युवाओं के एक समूह ने शांतिपूर्ण तरीके से किताबें पढ़ने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम का आयोजन स्टूडेंट एंड यूथ कलेक्टिव नाम के समूह ने किया था। रीडिंग सेशन में केवल मलाला युसुफजई की आत्मकथा ही नहीं, बल्कि ऐनी फ्रैंक, भगत सिंह, चे ग्वेरा और अन्य लेखकों की किताबें भी पढ़ी जा रही थीं।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम शांतिपूर्वक चल रहा था तभी करीब 30 लोग वहां पहुंचे। उनके हाथों में लोहे की रॉड और डंडे थे तथा वे भगवा गमछा पहने हुए थे। उन्होंने सबसे पहले मलाला की किताब पढ़ने पर सवाल उठाए और फिर विवाद बढ़ने पर प्रतिभागियों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
हमले में कई लोग घायल
रीडिंग सेशन में शामिल लोगों का आरोप है कि हमलावरों ने कई प्रतिभागियों को डंडों से पीटा और महिलाओं के साथ भी बदसलूकी की। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता जय ठक्कर ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने उन्हें, स्नेह भावसार और सावन जलारिया को पीटा। वहीं स्वाति गोस्वामी के बाल खींचे गए और मैत्रेयी छाया के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर लगातार धमकी दे रहे थे कि यदि मलाला और ऐसी अन्य किताबें पढ़ी गईं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। घायलों को पुलिस की मदद से सोला सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
गुरुवार की इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस निरीक्षक जी. एम. चौधरी ने बताया कि मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि छह अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें दंगा करना, ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से भीड़ इकट्ठा करना और लोगों के साथ मारपीट करने जैसी धाराएं शामिल हैं। द क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने कहा है कि जांच के दौरान हमलावर खुद को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा बता रहे थे। हालाँकि जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
मलाला की किताब पर क्यों हुआ विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 अगस्त को हुई थी। उस दिन अहमदाबाद के शिलाज स्थित आनंद निकेतन स्कूल में एक छात्र के खाने में कथित तौर पर कांच का टुकड़ा मिलने का मामला सामने आया था। अभिभावकों के विरोध के दौरान स्कूल की बुक क्लब और वैकल्पिक रीडिंग लिस्ट में शामिल मलाला युसुफजई की आत्मकथा 'आई एम मलाला' और ऐनी फ्रैंक की 'द डायरी ऑफ अ यंग गर्ल' पर भी आपत्ति जताई गई।
कुछ अभिभावकों और दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप था कि ये किताबें छात्रों पर थोपी जा रही हैं और इनमें एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दिया गया है। मलाला के कश्मीर पर पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन्हें 'भारत विरोधी' भी बताया गया।
स्कूल ने क्या कदम उठाए?
विवाद बढ़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल को नोटिस जारी किया। स्कूल ने सफाई दी कि दोनों किताबें अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि केवल बुक क्लब और लाइब्रेरी में वैकल्पिक पढ़ाई के लिए उपलब्ध थीं। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जाँच के आदेश दिए। स्कूल ने उन कंसल्टेंट की सेवाएँ ख़त्म कर दीं, जिनकी भूमिका इन किताबों को रीडिंग लिस्ट में शामिल कराने में बताई गई थी। स्कूल ने साफ़ किया कि विवादित किताबें अब अनिवार्य सूची का हिस्सा नहीं रहेंगी।
विरोध में हुआ रीडिंग सेशन
इन किताबों को हटाने के फ़ैसले के विरोध में छात्रों, शिक्षकों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने वस्त्रपुर गार्डन में साइलेंट रीडिंग सेशन आयोजित किया था। आयोजकों का कहना है कि उनका मक़सद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पढ़ने के अधिकार के समर्थन में शांतिपूर्ण संदेश देना था। उनका आरोप है कि इसी दौरान हमला किया गया।
बजरंग दल ने क्या कहा?
बजरंग दल ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि वह मलाला की किताब को शैक्षणिक संस्थानों में शामिल किए जाने का विरोध करता है। संगठन का दावा है कि उसने पहले लोगों को समझाने की कोशिश की थी। उसका कहना है कि मलाला के कुछ पुराने बयान भारत के हितों के खिलाफ हैं, इसलिए उनकी किताबों का विरोध किया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।