गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को सार्वजनिक करने की अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी निजी सूचना है और मौजूदा मामले में उसके खुलासे के लिए कोई ऐसा जनहित नहीं है, जो RTI कानून के तहत निजता के अपवाद को ख़त्म कर सके।

चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की डिवीजन बेंच ने 29 सितंबर को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने मार्च 2023 में सिंगल जज द्वारा दिए गए फ़ैसले को बरकरार रखा। उस फ़ैसले में केंद्रीय सूचना आयोग यानी सीआईसी के 2016 के आदेश को रद्द कर दिया गया था और अरविंद केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन के लिए सिफारिश पाईं जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नेतृत्व वाली डिवीजन बेंच ने अब इस जुर्माने को भी बरकरार रखा है।

पीएम होने से डिग्री जनहित की नहीं हो जाती: कोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में साफ़ किया कि सिर्फ़ इसलिए कि संबंधित व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री है, उसकी व्यक्तिगत जानकारी अपने आप ‘जनहित’ या ‘बड़े जनहित’ की श्रेणी में नहीं आ जाती।
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कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता का इस संवैधानिक पद के लिए उनके चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए केवल प्रधानमंत्री का पद इस जानकारी को सार्वजनिक करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत के अनुसार प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए इस मामले में न तो जनहित और न ही बड़ा जनहित स्थापित हुआ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद पर होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी हर निजी जानकारी जनता के सामने लाना अनिवार्य हो जाता है।

अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालयों के पास किसी व्यक्ति की शैक्षणिक डिग्री और रिकॉर्ड आम तौर पर एक तरह के विश्वास-आधारित संबंध में रहते हैं। इसलिए ऐसे रिकॉर्ड को हर स्थिति में RTI के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

केजरीवाल की दलील क्या?

केजरीवाल की ओर से सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई कि गुजरात यूनिवर्सिटी पहले ही डिग्री से संबंधित जानकारी अपनी वेबसाइट पर डाल चुकी थी। इसलिए इस मामले को आगे चलाने का आधार क्या बचता है, यह सवाल भी उठाया गया।

केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सिंगल जज के फ़ैसले में की गई उन टिप्पणियों को चुनौती दी, जिनमें कहा गया था कि वेबसाइट पर डिग्री उपलब्ध होने के बावजूद केजरीवाल ने मामले को आगे जारी रखा। सिंघवी ने 25000 रुपये के जुर्माने को हटाने की भी मांग की। लेकिन डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सिंगल जज के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

सीआईसी के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल

हाईकोर्ट का फैसला केवल डिग्री की जानकारी को निजी सूचना मानने तक सीमित नहीं रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग ने जिस तरीके से इस मामले को आगे बढ़ाया, वह RTI कानून की तय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। मामला 2016 का है। उस समय अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। एक आरटीआई मामले से संबंधित सीआईसी की कार्यवाही के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

28 अप्रैल 2016 को दिए गए लिखित जवाब में केजरीवाल ने मोदी की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद सीआईसी ने इस जवाब को ही आरटीआई आवेदन के तौर पर लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री की डिग्री के नंबर और वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय तथा गुजरात विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराए, ताकि दोनों विश्वविद्यालय अपने रिकॉर्ड में संबंधित जानकारी तलाश सकें। गुजरात यूनिवर्सिटी ने सीआईसी के इस आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

2023 में सिंगल जज ने CIC का आदेश रद्द किया था

गुजरात यूनिवर्सिटी की याचिका पर हाईकोर्ट के सिंगल जज ने मार्च 2023 में CIC के आदेश को रद्द कर दिया था। सिंगल जज ने कहा था कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी RTI एक्ट की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत संरक्षित है और इसे सार्वजनिक करने के लिए ऐसा कोई बड़ा जनहित मौजूद नहीं है, जो इन अपवादों को हटाने का आधार बन सके। इसी फैसले में अरविंद केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। केजरीवाल ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। अब चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल को SC भेजने की सिफारिश

गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 सितंबर को यह फ़ैसला सुनाया है। इससे ठीक एक दिन पहले 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस सुनीता अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी।

कॉलेजियम ने उनके साथ दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के नाम की भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सिफारिश की है। इन सिफारिशों के बाद नियुक्ति की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया बाकी है।