एसआईआर प्रक्रिया में गुजरात की मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर पूरा करने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की। अब राज्य में कुल मतदाता 4.4 करोड़ रह गए हैं। पहले यह संख्या क़रीब 5.08 करोड़ थी, यानी 13.4% की कमी आई है। इस रिवीजन में क़रीब 77 लाख नाम हटा दिए गए, जबकि 9.5 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया। तो सवाल है कि क्या योग्य मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया है? फॉर्म 7 के ग़लत इस्तेमाल का आरोप लगातार लगता रहा है। कई राज्यों में ऐसे मामले आए जहाँ जिंदा लोगों को मृत बताकर नाम काटने के लिए फॉर्म 7 भर दिया गया। लेकिन लोग सबूतों के साथ पहुँच गए कि वे ज़िंदा हैं।

यह एसआईआर अभियान पिछले साल अक्टूबर से शुरू हुआ था। इसका मक़सद वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सही बनाना था। इसमें मरने वालों, दूसरे जगह शिफ्ट हो गए लोगों, डुप्लिकेट नामों और गायब लोगों के नाम हटाए गए। ड्राफ्ट लिस्ट दिसंबर 2025 में जारी हुई थी, तब 73.7 लाख नाम हट चुके थे। फाइनल लिस्ट में और 3.9 लाख नाम हटाए गए। लेकिन ड्राफ्ट से फाइनल सूची आने तक 1.3% बढ़ोतरी हुई, ज्यादातर नए 18 साल के वोटरों की वजह से।
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नाम क्यों हटाए गए?

अधिकारियों ने बताया कि नाम हटाने के पीछे ये मुख्य वजहें हैं-
  • क़रीब 40 लाख लोग अपनी पुरानी एड्रेस से हमेशा के लिए कहीं और चले गए।
  • लगभग 18 लाख लोग मर चुके थे।
  • 9.8 लाख लोग अपने बताए एड्रेस पर नहीं मिले।
  • 3.8 लाख लोगों के डुप्लिकेट वोटर आईडी कार्ड थे।
  • 1.9 लाख नाम अन्य प्रशासनिक कारणों से हटाए गए।
  • ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद आपत्तियां आईं और जांच हुई तो और 3.9 लाख नाम हटाए गए।

किन जिलों में क्या स्थिति?

अहमदाबाद सबसे ज़्यादा मतदाताओं वाला जिला है। यहाँ फाइनल लिस्ट में 49.1 लाख मतदाता हैं। ड्राफ्ट में 48 लाख थे। यहां सबसे ज्यादा 1.5 लाख नए वोटर जोड़े गए। प्रतिशत में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी डांग जिले में हुई - 2.15%। लेकिन कुल मतदाता कम हैं। सिर्फ 1.9 लाख। अन्य जिले जहाँ अच्छी बढ़ोतरी हुई- पोरबंदर (2.1%), जामनगर (2%), बोटाद (1.9%), छोटा उदेपुर (1.9%), गांधीनगर (1.8%)।

बड़े शहरों में माइग्रेशन और युवा वोटरों की वजह से मतदाता सूची में जोड़-घटाव ज्यादा हुआ। सूरत में करीब 1 लाख नए वोटर जोड़े गए, लेकिन 85,734 नाम हटाए गए। शहरों में सबसे ज्यादा डिलीशन। वडोदरा और राजकोट में भी काफी नए वोटर जुड़े, क्योंकि लोग शहरों में आ रहे हैं और युवा 18 साल के हो रहे हैं।

मुस्लिम वोटरों के नाम हटवाए गए?

यह बदलाव काफी बड़ा है, इसलिए राजनीतिक पार्टियां प्रतिक्रिया दे रही हैं। कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि कुछ जगहों पर मुस्लिम वोटरों के नाम ज्यादा हटाए गए या नाम हटाने की अर्जी फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल हुआ। लेकिन चुनाव आयोग का कहना है कि यह सिर्फ साफ-सफाई का काम है। कोई योग्य वोटर बाहर नहीं होना चाहिए और कोई गलत नाम नहीं रहना चाहिए।
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कांग्रेस के गुजरात प्रेसिडेंट अमित चावड़ा ने कहा कि कई फॉर्म 7 रिजेक्ट हुए, मतलब गलत आपत्तियां थीं। लेकिन बीजेपी और चुनाव आयोग इसे जरूरी सफाई बता रहे हैं।

यह एसआईआर कई राज्यों में हुआ है, लेकिन गुजरात में डिलीशन सबसे ज्यादा चर्चा में है। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सभी योग्य वोटर बच पाए?