गुजरात में चार पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कथित फर्जी राजनीतिक चंदे और टैक्स चोरी को लेकर FIR दर्ज की गई हैं। आयकर विभाग की शिकायतों के आधार पर गुजरात सीआईडी की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू जाँच कर रही है। शिकायतों में आरोप है कि राजनीतिक चंदे के नाम पर लोगों से रकम ली गई, उन्हें टैक्स छूट का लाभ दिलाने के लिए रसीदें दी गईं और बाद में कमीशन काटकर बड़ी रक़म कथित तौर पर नकद वापस कर दी गई।

गुजरात सीआईडी क्राइम की आर्थिक अपराध शाखा ने चार गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के ख़िलाफ़ अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में पार्टी पदाधिकारियों के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट और दूसरे लोगों के नाम भी सामने आए हैं। दि प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विभाग की शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि इन दलों का इस्तेमाल राजनीतिक चंदे की आड़ में टैक्स लाभ दिलाने और रकम को अलग-अलग कंपनियों के ज़रिए घुमाकर वापस करने के लिए किया गया। शिकायतों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 2 से 10 प्रतिशत तक कमीशन काटे जाने की बात सामने आई है। चार मामलों में कथित टैक्स चोरी का आँकड़ा 700 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

किन चार राजनीतिक दलों पर FIR?

सीआईडी की FIR चार गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ हैं। ये राजनीतिक दल हैं-
  • भारतीय राष्ट्रीय जनता दल, गांधीनगर
  • स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, अहमदाबाद
  • गरीब कल्याण पार्टी, अहमदाबाद
  • सत्यवादी रक्षक पार्टी, गुजरात
आयकर विभाग की शिकायतों के आधार पर सीआईडी की ईओडब्ल्यू ने ये मामले दर्ज किए हैं। अभी ये सभी आरोप जाँच के दायरे में हैं।
ताज़ा ख़बरें

चंदा लिया, टैक्स छूट दिलाई और पैसा वापस किया

आयकर विभाग की शिकायतों के अनुसार कथित तौर पर काम करने का तरीक़ा लगभग एक जैसा था। दि प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार पहले किसी व्यक्ति से राजनीतिक दल के नाम पर बैंकिंग चैनल के ज़रिए चंदा लिया जाता था। इसके बदले उसे राजनीतिक चंदे की रसीद दी जाती थी। इन रसीदों के आधार पर संबंधित व्यक्ति आयकर कानून की धारा 80GGC के तहत उपलब्ध टैक्स डिडक्शन का दावा करता था। इसके बाद शिकायतों के मुताबिक, राजनीतिक दलों के बैंक खातों से पैसा कथित तौर पर शेल कंपनियों या दूसरी कारोबारी संस्थाओं को सामान और सेवाओं की खरीद के नाम पर भेजा जाता था। बाद में इन कंपनियों से रकम नकद निकाली जाती थी और कमीशन काटकर कथित तौर पर मूल दानदाता को वापस कर दी जाती थी।

आयकर विभाग ने कुछ मामलों में कमीशन 2 से 10 प्रतिशत और एक मामले में क़रीब 8 से 9 प्रतिशत तक होने का आरोप लगाया है। यानी जाँच एजेंसियों के आरोपों के मुताबिक, कागज पर यह रकम राजनीतिक चंदे के रूप में दिखाई देती थी, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा बाद में अलग रास्ते से दानदाता तक वापस पहुँच जाता था।

BNJD पर 1143 करोड़ के फर्जी चंदे का आरोप

सबसे बड़ा मामला गांधीनगर स्थित भारतीय राष्ट्रीय जनता दल यानी BNJD से जुड़ा बताया जा रहा है। आयकर विभाग के मुताबिक, नवंबर 2025 में पार्टी के कार्यालय और उसके पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई थी। दि प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार जाँच में विभाग को कथित तौर पर वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच करीब 1,143.85 करोड़ रुपये के ऐसे चंदों का पता चला, जिन्हें विभाग ने फर्जी या संदिग्ध बताया है। 

शिकायत के अनुसार BNJD को क़रीब 1143 करोड़ की यह रक़म क़रीब 56,238 दानदाताओं से प्राप्त हुई थी। विभाग का आरोप है कि इन लोगों को चंदे की रसीदें दी गईं, जिनके आधार पर उन्होंने आयकर में कटौती का दावा किया।

आयकर विभाग ने आरोप लगाया कि इस कथित व्यवस्था से सरकारी खजाने को करीब 343 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जाँच में यह भी आरोप है कि BNJD के खाते से रकम जय ट्रेडिंग कंपनी, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी कंपनियों को भेजी गई। इन भुगतानों को अनाज, दाल और दूसरी वस्तुओं की खरीद के रूप में दिखाए जाने का आरोप है। इसके बाद शिकायत के मुताबिक़ रक़म नकद निकाली गई और 2 से 10 प्रतिशत तक कमीशन काटने के बाद बाक़ी पैसा कथित तौर पर मूल दानदाताओं को वापस कर दिया गया। आयकर विभाग ने BNJD के मामले में पार्टी के ऑडिटर रहे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट पर भी आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक CA ने पार्टी के खातों की वास्तविक जाँच किए बिना कथित तौर पर ऑडिट रिपोर्ट तैयार की और डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए।

स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी: 519 करोड़ का चंदा

दूसरा मामला स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी यानी एसएपी से जुड़ा है। आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, पार्टी के जरिए करीब 519 करोड़ रुपये की संदिग्ध राजनीतिक चंदे की एंट्री कराई गई। आरोप है कि लोगों ने चेक या RTGS जैसे बैंकिंग माध्यमों से रकम पार्टी को दी और बदले में उन्हें ऐसी रसीदें दी गईं, जिनसे वे टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकें।

इसके बाद रकम कथित तौर पर जय ट्रेडिंग कंपनी जैसी इकाई के जरिए घुमाई गई और नकद वापस की गई। शिकायत में 8 से 9 प्रतिशत तक कमीशन काटे जाने का आरोप है। आयकर विभाग ने आरोप लगाया कि इस मामले में करीब 155 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई। जाँच में पार्टी के पदाधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी सामने आई है।

गरीब कल्याण पार्टी पर 206 करोड़ के फर्जी चंदे का आरोप

तीसरा मामला गरीब कल्याण पार्टी यानी जीकेपी का है। दि प्रिंट की रिपोर्ट में आयकर विभाग के हवाले से कहा गया है कि 2022 से 2026 के बीच पार्टी के ज़रिए क़रीब 206 करोड़ रुपये के संदिग्ध चंदे की व्यवस्था की गई। आरोप है कि यह पैसा बाद में जालाराम एंटरप्राइजेज और कृष्णा एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों के जरिए घुमाया गया। शिकायत के मुताबिक, कंपनियों के रास्ते रकम निकालकर दानदाताओं को वापस की गई और इसमें कमीशन काटा गया। इस मामले में कमीशन 5 से 7 प्रतिशत तक होने का आरोप भी सामने आया है। आयकर विभाग ने इस मामले में सरकारी खजाने को करीब 62 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया है।

जाँच में यह भी सामने आया कि जालाराम एंटरप्राइजेज और कृष्णा एंटरप्राइजेज के खातों में 2022 से 2026 के बीच कुल करीब 1,295.76 करोड़ रुपये जमा हुए। यह रकम उस अवधि में गरीब कल्याण पार्टी द्वारा दिखाए गए चंदे से काफी ज्यादा थी। इसी आधार पर आयकर विभाग को संदेह है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल केवल इस एक राजनीतिक दल के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे लेन-देन के लिए भी किया गया हो सकता है।

सत्यवादी रक्षक पार्टी से जुड़ा 415 करोड़ का मामला

चौथा मामला सत्यवादी रक्षक पार्टी से जुड़ा है। आयकर विभाग ने आरोप लगाया है कि पार्टी के ज़रिए क़रीब 415 करोड़ रुपये की ऐसी रक़म ली गई, जिसे राजनीतिक चंदे के रूप में दिखाया गया। शिकायत के मुताबिक़, इस रकम को बाद में दूसरे माध्यमों से घुमाकर दानदाताओं को वापस किया गया और इसके बदले कमीशन लिया गया। इस मामले में पार्टी के पदाधिकारियों और एक अकाउंटिंग प्रोफेशनल को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में सरकारी खजाने को करीब 124.5 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप बताया गया है।
गुजरात से और खबरें
इन मामलों की जाँच ऐसे समय में सामने आई है जब राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता और छोटे राजनीतिक दलों के जरिए कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर मीडिया रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। हालाँकि, FIR और आयकर विभाग की जाँच का आधार संबंधित विभागों द्वारा जुटाए गए दस्तावेज और शिकायतें हैं।

कांग्रेस ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

इसी महीने कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर बिना मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के ज़रिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और राजनीतिक चंदे में कथित फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया था। पार्टी का दावा है कि देशभर में मौजूद 3260 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के माध्यम से क़रीब 10 हज़ार करोड़ रुपये का चंदा दिखाकर आयकर से बचने की व्यवस्था बनाई गई है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग की। इसके साथ ही इसने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने इस कथित गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं की।

कांग्रेस का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80GGC के तहत कोई भी व्यक्ति यदि किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को चंदा देता है तो उस राशि पर टैक्स छूट मिलती है। इसी तरह कंपनियों के लिए धारा 80GGB के तहत राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर कर छूट का प्रावधान है। गोहिल ने आरोप लगाया कि इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए हजारों ऐसे राजनीतिक दलों को चंदा दिखाया गया जो चुनाव में लगभग कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाते।