हुड्डा लोकसभा चुनाव में हार से आहत हैं और अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं और इसकी रणनीति तैयार करने के लिए उन्होंने बैठक बुलाई है। बैठक में हरियाणा कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेने पर चर्चा होगी और इस पर आर-पार का फ़ैसला हो सकता है।
बैठक के बहाने एक बार फिर से आलाकमान पर इसके लिए दबाव बनाया जाएगा कि जब अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव में पुराने चेहरों पर भरोसा कर कांग्रेस चुनाव जीत सकती है तो हरियाणा में क्यों नहीं।बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हुड्डा के बेटे और पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने नौ जून को रोहतक लोकसभा सीट के कार्यकर्ताओं की दिल्ली में बैठक बुलाई थी। इस बैठक में रोहतक में हुई हार के कारणों की समीक्षा होनी थी। लेकिन अब यह बैठक 16 जून को रोहतक में ही होगी। बताया जा रहा है कि अगर कांग्रेस आलाकमान हुड्डा की बात नहीं मानता है तो हुड्डा समर्थक कांग्रेसी बग़ावत का ऐलान कर देंगे।
हरियाणा में अशोक तंवर और हुड्डा ख़ेमे की आपसी खींचतान आम है। हुड्डा और उनके समर्थक विधायक पिछले काफ़ी समय से आलाकमान पर यह दबाव बना रहे हैं कि हरियाणा की कमान उनके नेता के हाथ में हो, लेकिन आलाकमान के सामने किसी की नहीं चल रही है। अब नौ जून को होने वाली बैठक में क्या फ़ैसला होगा, इस पर सबकी नज़र होगी।
पिछले दिनों लोकसभा चुनाव में हरियाणा में हुई कांग्रेस की हार की समीक्षा और पार्टी मंथन के लिए हरियाणा प्रभारी ग़ुलाम नबी आजाद ने दिल्ली में बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भी कांग्रेस में बग़ावती सुर और गुटबाज़ी देखने को मिली थी।
बैठक के दौरान विधायक रघुवीर कादियान ने खुलकर हुड्डा परिवार को पार्टी की कमान सौंपने की वकालत करते की थी। कादियान ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो लोकसभा चुनावों की तरह ही नतीजे आते रहेंगे। करनाल सीट से उम्मीदवार रहे कुलदीप शर्मा ने भी अशोक तंवर का विरोध किया था। विधायक गीता भुक्कल ने किरण चौधरी पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि वह विधायकों की राय नहीं लेतीं।