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अनुच्छेद 370: खट्टर बोले, कश्मीरी लड़की लाएँगे, रास्ता साफ़ है

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महिलाओं पर फिर विवादित बयान दिया है। खट्टर ने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने से कश्मीर से लड़कियों को शादी के लिए लाया सकता है। अजीब बात यह है कि खट्टर ने महिलाओं के बारे में ऐसी बातें तब कहीं जब वह हरियाणा में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सफलता पर बोल रहे थे। खट्टर ने कहा, ‘हमारे मंत्री ओ.पी. धनखड़ कहते थे कि उन्हें बिहार से बेटियों को लाना होगा। आजकल लोग कहने लगे हैं कि कश्मीर का रास्ता साफ़ हो गया है और अब हम कश्मीर से लड़कियों को लाएँगे।’ हालाँकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मज़ाक की बात अलग है, लेकिन समाज में रेशयो ठीक होगी तो संतुलन ठीक बैठेगा।

हालाँकि बाद में मुख्यमंत्री खट्टर ने इस पर सफ़ाई दी कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया चैनल और न्यूज़ एजेंसियों के हवाले से एक भ्रामक तथा तथ्यहीन प्रचार चलाया जा रहा है।
महिलाओं के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल तो किसी भी रूप में सही नहीं कहा जा सकता है। मनोहर लाल खट्टर का ऐसा अमर्यादित बयान ऐसे समय में आया है जब अनुच्छेद 370 में फेरबदल के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कश्मीर घाटी में फ़ोन लाइन्स बंद हैं, लोगों को आवाजाही की छूट नहीं है, भारी तादाद में पुलिस जवान तैनात हैं। खट्टर के बयान के एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति बहाली के प्रयास के तहत ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसे में लेने के लिए राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। प्रधानमंत्री ने कई बार कश्मीर की महिलाओं के लिए 'बहनों और बेटियाँ' बोलकर संबोधित किया था और ख़ुद को उनका हमदर्द बताया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जहाँ प्रधानमंत्री शांति बहाली के प्रयासों में लगे हैं वहीं क्या बीजेपी के दूसरे नेता उनके प्रयास को विफल करना चाहते हैं?
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बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री खट्टर शुक्रवार को फतेहाबाद में महर्षि भागीरथ जयंती समारोह के एक राज्य-स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग करना क्या दिखाता है? क्या जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 में फेरबदल की ‘ख़ुशी’ इतनी है कि इतने ऊँचे ओहदे पर बैठे राजनेता भी अपनी भाषा की मर्यादा भूल जा रहे हैं। यह एकमात्र नेता नहीं हैं जो इस मुद्दे पर ‘जोश में होश’ खो रहे हैं, कई और ऐसे नेता हैं जो सार्वजनिक तौर पर ऐसी भाषा बोल चुके हैं।

बीजेपी विधायक का विवादित बयान

इससे पहले बीजेपी विधायक विक्रम सैनी ने अनुच्छेद 370 को लेकर विवादित बयान दिया था। सैनी ने कहा था कि देश के मुसलमानों को ख़ुश होना चाहिए कि वे अब बिना किसी डर के 'गोरी' कश्मीरी लड़कियों से शादी कर सकते हैं। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी के कुँवारे नेता भी अब कश्मीर जाकर वहाँ प्लॉट ख़रीद सकते हैं और शादी कर सकते हैं। 

ऐसी भाषा का इस्तेमाल अतिउत्साह में किया जा रहा है या मानसिकता ही सामंती है? सार्वजनिक मंचों को छोड़ दें तो सोशल मीडिया पर तो ऐसी बेतुकी बातें लिखने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में होगी। 

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने संबंधी केंद्र सरकार के फ़ैसले पर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त ट्रोलिंग की जा रही है। अधिकतर ट्रोल की भाषा महिलाओं को लेकर बेहद ही शर्मनाक है। जम्मू-कश्मीर पर लिया गया फ़ैसला राजनीतिक है। लेकिन ट्रोल की भाषा महिलाओं को निशाना बनाने वाली है। क्या इससे सामंती सोच उजागर नहीं होती है?

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बलात्कार पर भी दिया था विवादित बयान

बता दें कि खट्टर ने पिछले साल नवंबर में भी पंचकूला ज़िले के कालका शहर में महिलाओं को लेकर विवादित बयान दिया था और एक तरह से बलात्कार के लिए महिलाओं को ही ज़िम्मेदार ठहरा दिया था। उन्होंने कहा था, ‘सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बलात्कार और छेड़खानी की जो घटनाएँ हैं यह 80 से 90 प्रतिशत जानकारों के बीच में होती हैं। कई मामलों में तो वे एक-दूसरे को लम्बे समय तक जानते हैं और एक दिन बहस हो जाती है तो उस दिन एफ़आईआर दर्ज करा दी जाती है और कहा जाता है कि उसने मेरा बलात्कार किया।’

उनके उस बयान की जब तीखी आलोचना हुई तो वह पलट गए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि अध्ययन के बाद यह पाया गया है कि इन मामलों में 80 प्रतिशत घटनाएँ आपस में जानने वालों के बीच होती हैं।

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