इन 6 भाजपा प्रत्याशियों को अब तरह-तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। हिमाचल के शांतिप्रिय लोग दलबदलुओं को पसंद नहीं करते। ये सभी प्रत्याशी जहां-जहां जनसंपर्क के लिए जाते हैं, वहां उनसे सवाल पूछा जाता है कि हमने तो आपको कांग्रेस टिकट पर जिताया था। अब भाजपा से कैसे। ये सवाल चुभ रहे हैं। कांग्रेस ने पूरी ताकत से इन पर गंभीर आरोपों की बौछार कर दी है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इन्हें हाल ही में "काले नाग" कहा और आरोप लगाया कि ये लोग "ब्रीफकेस" के भूखे हैं, "सम्मान" के नहीं। सुक्खू ने यह भी आरोप लगाया कि छह बागियों को वोट बेचने के लिए 15-15 करोड़ रुपये मिले। जनता आरोपों को गंभीरता से ले रही है।
पुलिस ने दो कांग्रेस विधायकों की शिकायत पर राज्यसभा चुनाव से संबंधित "चुनावी अपराध" को लेकर हमीरपुर से निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा और चैतन्य शर्मा के पिता राकेश शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके बाद विद्रोहियों यानी भाजपा प्रत्याशियों ने सुक्खू के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर बिना सबूत आरोप लगाने की बात कही।
जनता ने हमें वोट दिया और उनकी अपेक्षाओं को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है, चाहे हम भाजपा में हों, कांग्रेस में हों या निर्दलीय हों। महिलाएं और युवा हमसे 1,500 रुपये प्रति माह और एक लाख नौकरियां मांग रहे हैं, लेकिन हमारे पास कोई जवाब नहीं है।
कुटलेहर से दोबारा चुनाव लड़ रहे देविंदर कुमार भुट्टो ने मुख्यमंत्री को जनता को गुमराह करने के लिए झूठे आरोप लगाने के बजाय सबूत होने पर कार्रवाई करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ''कांग्रेस सरकार उसी तरह गिर जाएगी जैसे वह बहुमत में होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव हार गई।''