देश में रोजगार का और बुरा हाल हो गया है। अब तो पढ़े-लिखे की बेरोजगारी भी भयावह रूप ले रही है। बेरोजगार युवाओं में 67% ग्रेजुएट हैं। देश के लगभग 40 प्रतिशत स्नातक युवा बेरोजगार हैं। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में तो कम से कम ऐसा ही कहा गया है। युवाओं में बेरोजगारी का यह आलम तब है जब भारत के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड का मौक़ा है। डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा की बड़ी आबादी का लाभ भारत के पास है। 2023 के बाद युवा आबादी कम होने लगेगी और ये आबादी बुजुर्ग होने की ओर बढ़ रही होगी। तो जब युवाओं का लाभ लेने का मौक़ा है तब इनको बेरोजगार रखा जा रहा है। कांग्रेस ने युवा ग्रेजुएट की बेरोजगारी को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है। 
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने अपनी नई रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' जारी की है। इस रिपोर्ट में एक बहुत गंभीर बात सामने आई है कि भारत के 20 से 29 साल के बेरोजगार युवाओं में से 67 प्रतिशत ग्रेजुएट हैं। यह आंकड़ा पिछले 20 सालों में दोगुना से ज्यादा हो गया है। 2004 में यह सिर्फ 32 प्रतिशत था और यह संख्या करीब 30 लाख है। लेकिन 2023 में बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया यानी यह संख्या क़रीब 1.1 करोड़ हो गई है।
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रिपोर्ट बताती है कि देश में उच्च शिक्षा तक पहुंच बहुत बढ़ गई है। 2004 में युवाओं में ग्रेजुएट्स का हिस्सा सिर्फ 10 प्रतिशत था। यह संख्या 1.9 करोड़ थी। यह 2023 में बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया यानी संख्या 6.3 करोड़ हो गई। यानी हर साल औसतन 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जुड़ रहे हैं। लेकिन नौकरियां इतनी तेजी से नहीं बढ़ रही हैं। हर साल सिर्फ 28 लाख ग्रेजुएट्स को नौकरी मिल पाती है और उनमें से भी सिर्फ 17 लाख को सैलरी वाली स्थायी नौकरी मिलती है।
रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि 'ग्रेजुएट्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए नौकरियाँ नहीं बढ़ रही हैं।' इससे ग्रेजुएट्स की कमाई में भी सुस्ती आ गई है। ग्रेजुएट्स और नॉन-ग्रेजुएट्स की कमाई में जो अंतर था, वह 2004 से 2011 तक बढ़ा था, लेकिन 2017 के बाद युवा पुरुषों की कमाई बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई है।

एक और चिंता की बात है कि युवा पुरुषों में पढ़ाई करने वालों का हिस्सा घट रहा है। 2017 में 38 प्रतिशत युवा पुरुष पढ़ाई कर रहे थे, जो 2024 के अंत तक घटकर 34 प्रतिशत रह गया। मुख्य कारण परिवार की आर्थिक मदद करना है।

रिपोर्ट बताती है कि 15 से 25 साल के युवा ग्रेजुएट्स में करीब 40 प्रतिशत को काम नहीं मिल पा रहा है। 25 से 29 साल के ग्रुप में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत के आसपास है। 1983 से 2023 तक ग्रेजुएट बेरोजगारी 35 से 40 प्रतिशत के बीच ही रही है, जबकि इस दौरान ग्रेजुएट्स की संख्या बहुत बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से 29 साल के 6.3 करोड़ ग्रेजुएट्स में से 1.1 करोड़ यानी 11 मिलियन लोग बेरोजगार हैं। युवाओं की कुल संख्या 15 से 29 साल में 36.7 करोड़ है, जो काम करने वाली उम्र की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।

शिक्षा-रोजगार के बीच फासला बढ़ा

उच्च शिक्षा में पहुंच बढ़ी है, खासकर लड़कियों और कमजोर वर्गों में। लेकिन इंजीनियरिंग और मेडिसिन जैसे प्रोफेशनल कोर्स महंगे हैं। गरीब परिवारों के लिए इनकी फीस सालाना खर्च से ज्यादा होती है। रिपोर्ट पिछले 40 सालों के सरकारी डेटा पर आधारित है। यह दिखाती है कि शिक्षा और रोजगार के बीच का फासला बढ़ रहा है। युवा ज्यादा पढ़-लिख रहे हैं, आकांक्षाएं बढ़ रही हैं, लेकिन अच्छी और स्थायी नौकरियां कम हैं।
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डेमोग्रेफिक डिविडेंड कैसे गँवा रहे हैं?

रिपोर्ट कहती है कि भारत की युवा आबादी (15-29 साल) 36.7 करोड़ है। यह काम करने वाली उम्र की आबादी का एक तिहाई है। 2030 के बाद यह फायदा कम होना शुरू हो जाएगा। इसलिए अब आने वाले सालों में ज्यादा नौकरियां बनाना बहुत ज़रूरी है, ताकि यह युवा शक्ति देश की आर्थिक तरक्की में बदल सके। रिपोर्ट कहती है, 'युवाओं की यह बड़ी, पढ़ी-लिखी और महत्वाकांक्षी पीढ़ी को अगर अच्छे काम में नहीं लगाया गया, तो देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड आर्थिक लाभ में नहीं बदल पाएगा।'

नौकरी मिलने पर भी समस्या

कई युवा ग्रेजुएट्स को कुछ न कुछ काम तो मिल जाता है, लेकिन स्थायी और अच्छी सैलरी वाली नौकरी बहुत कम मिलती है। रिपोर्ट में पाया गया कि बेरोजगार युवा पुरुष ग्रेजुएट्स में से एक साल के अंदर आधे को कोई न कोई काम मिल जाता है, लेकिन सिर्फ 7 प्रतिशत को स्थायी सैलरी वाली नौकरी मिल पाती है।

कोविड के बाद नौकरियां बढ़ीं, लेकिन ज्यादातर खेती में

2021-22 से 2023-24 के बीच 8.3 करोड़ नई नौकरियाँ बनीं, लेकिन इनमें से 4 करोड़ खेती में आईं। पहले युवा खेती छोड़कर फैक्ट्री और सर्विस सेक्टर में जा रहे थे, लेकिन अब फिर खेती की ओर रुख हो रहा है। इससे युवाओं को अच्छी कमाई वाली नौकरियां कम मिल रही हैं।
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पढ़ाई छोड़ने का बढ़ता ट्रेंड

आर्थिक दबाव के कारण युवा पढ़ाई छोड़ रहे हैं। 2017 में 15-24 साल के युवा पुरुषों में 38 प्रतिशत पढ़ाई कर रहे थे, जो 2024 के अंत तक घटकर 34 प्रतिशत रह गया। पढ़ाई छोड़ने का मुख्य कारण परिवार की मदद करना है। 2017 में 58 प्रतिशत युवा इसी वजह से पढ़ाई छोड़ते थे, जो 2023 में बढ़कर 72 प्रतिशत हो गया।

रिपोर्ट क्या सुझाव देती है?

यह रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा और नौकरियों के बीच बड़ा अंतर है। ज्यादा पढ़ाई के बावजूद युवाओं को अच्छे काम नहीं मिल रहे। देश को जल्दी से अच्छी क्वालिटी वाली नौकरियां बढ़ानी होंगी, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो युवा शक्ति का फायदा नहीं उठा पाएंगे।
यह रिपोर्ट सरकार, कंपनियों और समाज के लिए एक बड़ा संकेत है कि शिक्षा के साथ स्किल डेवलपमेंट और जॉब क्रिएशन पर ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बेरोजगारी की समस्या और बढ़ सकती है।