जिस स्कूल का प्रिंसिपल स्कूल में शराब के नशे में डगमगाता रहे वह स्कूल कैसे चलेगा? कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने स्कूल के एक प्रिंसिपल का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए यह सवाल उठाया है। सवाल ही नहीं उठाया अभियान भी छेड़ा है। 'स्कूल ठीक करो'। सिर्फ़ दिपके और सीजेपी ही नहीं, स्कूली छात्रों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। छात्रों ने भी अभियान छेड़ रखा है। प्रोटेस्ट का। जेन जी प्रोटेस्ट की तरह ही स्कूली बच्चों का जेन अल्फा प्रोटेस्ट देश भर के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा है।

ये बच्चे भी सवाल उठा रहे हैं कि एक झोंपड़ी में पाँच कक्षाओं को एक साथ बैठाकर एक शिक्षक बच्चों को क्या और कितना पढ़ा पाएगा? दरअसल, कहीं स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, कहीं भवन जर्जर हैं, कहीं बच्चे टीन शेड या झोपड़ियों में पढ़ने को मजबूर हैं, तो कहीं शौचालय, सड़क और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। स्कूलों की ऐसी ही बदहाली को सुधारने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने महाराष्ट्र से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत करते हुए सरकारी स्कूलों का देशव्यापी सोशल ऑडिट कराने की मांग की है। इसी अभियान के तहत दिपके ने हिंगोली जिले लिंबाला गांव के एक सरकारी स्कूल के कथित प्रधानाध्यापक का वीडियो साझा करते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'शराब के नशे में एक प्रिंसिपल सरकारी स्कूल कैसे चला सकता है? बच्चों, खासकर छोटी बच्चियों की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद गंभीर मामला है। ऐसे प्रिंसिपल को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।'
इससे पहले अभिजीत दिपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के हजारों सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने गांव के सरपंच से बातचीत का भी जिक्र करते हुए कहा कि पंचायत ने एक सप्ताह के भीतर स्थानीय स्कूल की समस्याएं दूर करने का भरोसा दिया है। दिपके ने कहा, 'बदलाव संभव है, लेकिन इसके लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा।'

'10 साल में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद'

अभियान के दौरान दिपके ने केंद्र सरकार पर शिक्षा बजट में कटौती का आरोप लगाया। उनका दावा है कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने कहा, 'जब देश में और ज्यादा स्कूल खुलने चाहिए थे, तब सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। इससे गरीब और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।'
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बेहतर स्कूल की मांग पर एक की हत्या: दिपके

अभिजीत दिपके ने बेहतर स्कूली सुविधा की मांग किए जाने पर पश्चिम बंगाल में एक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, "अब्दुल बंगाल के उस सरकारी स्कूल का जायज़ा लेने गए जहाँ उन्होंने कभी पढ़ाई की थी। सरकारी स्कूलों की खराब हालत के बारे में आवाज़ उठाने पर गुंडों (जिनके बारे में कहा जाता है कि वे बीजेपी से जुड़े थे) ने उनके पिता पर हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। मुझे बहुत गुस्सा आता है कि बेहतर स्कूलों की माँग करने पर लोगों की हत्या कर दी जाती है। सीजेपी पूरी मज़बूती से अब्दुल और उनके परिवार के साथ खड़ा है। हम माँग करते हैं कि उनके पिता की मौत के ज़िम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ़्तार किया जाए। सीजेपी की एक टीम पश्चिम बंगाल जाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि अब्दुल और उनके परिवार को न्याय मिले।'

इस पर आशुतोष रांका ने कहा है, 'हम स्कूल ठीक करना चाह रहे हैं। लेकिन पूरे देश में बीजेपी के गुंडे सिर्फ हिंसा फैला रहे हैं। अब्दुल की सिर्फ यह गलती थी कि वो अपने गांव का स्कूल ठीक कराना चाहता था। लेकिन बीजेपी के गुंडों ने उसके पिताजी को इतना मारा कि उनकी मौत हो गई। कल मैं, विजय मल्लांगी रेड्डी, अंकित, सुधीर एवं सीजेपी के तमाम कार्यकर्ता बांकुरा जायेंगे। अब्दुल के परिवार को न्याय दिलाने। हम बीजेपी के गुंडों से डरने वाले नहीं हैं।'
इसके साथ ही रांका ने कहा है, 'राजस्थान से मुझे अब तक जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, बाड़मेर, हनुमानगढ़ में ख़राब स्कूल का निरीक्षण करने की रिक्वेस्ट आई है। इन जगहों पर प्रशासन स्कूल ठीक करने की माँग नहीं मान रहा। अगले कुछ दिनों में मैं यह सभी जगह कवर करूँगा।'

देशभर में छात्र कर रहे प्रदर्शन

सरकारी स्कूलों की खराब हालत को लेकर अब कई राज्यों में छात्र सड़क पर उतर आए हैं।

मध्य प्रदेश: उज्जैन में छात्राओं का विरोध

उज्जैन में सैकड़ों छात्राओं ने सरकार के उस फैसले का विरोध किया, जिसमें उनके सरकारी स्कूलों को शहर से 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। छात्राओं का कहना है कि यदि स्कूल दूर चला गया तो कई लड़कियों की पढ़ाई छूट जाएगी, क्योंकि उनके परिवार रोजाना इतना लंबा सफर कराने में सक्षम नहीं हैं।
मध्य प्रदेश के विदिशा में छात्राओं ने निजी बसों द्वारा किराया बढ़ाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद बढ़ा हुआ किराया वापस ले लिया गया।

राजस्थान: 'क्या यही आजादी है?'

राजस्थान की एक छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। जब उससे पूछा गया कि आजादी का मतलब क्या है, तो उसने कहा, 'क्या यही आजादी है? 80 साल बाद भी हमारा स्कूल टूटा हुआ है। शिक्षक नहीं हैं, खेल का मैदान नहीं है और स्कूल तक जाने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है।' छात्रा ने बताया कि बारिश के दौरान बच्चों को उफनती नदी पार करके स्कूल जाना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश: सड़क के लिए बच्चों का मार्च

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के चंदूपुर गांव में करीब 200 छात्र और उनके अभिभावक तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे। उनकी मांग थी कि स्कूल तक जाने के लिए पक्की सड़क बनाई जाए।
फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में भी छात्रों ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया कि समस्याओं का समाधान किया जाएगा। लखनऊ के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने भी शिक्षकों की कमी के विरोध में सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।

बिहार: पंखे, बेंच और हैंडपंप खराब, बच्चों का धरना

बिहार के गया जिले के सिमुआरा मध्य विद्यालय में छात्रों ने स्कूल की बदहाल स्थिति के खिलाफ धरना दिया। बच्चों ने बताया कि स्कूल के पंखे, बेंच और हैंडपंप खराब हैं। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। 

महाराष्ट्र: स्कूलों में पानी और शौचालय की समस्या

महाराष्ट्र के दहानू में छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूलों में केवल निरीक्षण के दिन पानी उपलब्ध कराया जाता है। छात्रों ने गंदे शौचालयों और असुरक्षित परिसर की शिकायत भी की। कोंडीवाड़े गांव की छात्राओं ने स्कूल तक जाने के लिए सड़क नहीं होने की समस्या उठाई। त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र के छात्रों ने वीडियो बनाकर स्कूल जाने वाले रास्ते की खराब हालत दिखाई।

तमिलनाडु: शराब की दुकान हटाने की मांग

तमिलनाडु के कोडाली क्षेत्र में सरकारी स्कूल के छात्रों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर सरकारी शराब की दुकान बंद करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि शराब की दुकान के कारण इलाके का माहौल खराब हो गया है और स्कूल जाने वाली बच्चियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं, मिन्जूर के पास कट्टूर गांव में छात्रों ने एक शिक्षक के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया।

शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की मांग

सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर उठ रहे विरोध प्रदर्शनों में छात्रों की मांगें लगभग एक जैसी हैं-
  • सुरक्षित स्कूल भवन
  • पर्याप्त शिक्षक
  • साफ शौचालय और पीने का पानी
  • स्कूल तक पहुँचने के लिए सड़क
  • बेहतर शिक्षा व्यवस्था
  • सरकारी स्कूलों का बंद करना रोका जाए
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का अनुपात लगातार घटा है। वहीं, नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस वर्षों में देशभर में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ऐसे में छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव की जरूरत है।
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'स्कूल ठीक करो' कैंपेन क्या है?

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा है कि इस कैंपेन में महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाएगी। सीजेपी सोशल मीडिया के ज़रिए एक स्टैंडर्ड असेसमेंट फ़ॉर्म उपलब्ध करा रहा है, जिससे माता-पिता और स्थानीय लोग स्कूलों के बारे में वीडियो और दूसरी जानकारी अपलोड करके कमियों की रिपोर्ट कर सकें।

प्रस्तावित चेकलिस्ट में बिजली, पीने का पानी, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग चालू टॉयलेट, बेंच और मिड-डे मील की क्वालिटी जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

दिपके ने कहा कि माता-पिता, स्थानीय लोगों और सरपंचों को कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरपंचों को सुधारों को 'पहले और बाद' की तस्वीरों के ज़रिए डॉक्यूमेंट करने और उन्हें शेयर करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि दूसरी जगहों पर भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि कैंपेन के अगले चरण में वे महाराष्ट्र के दूसरे तालुकाओं में सरकारी स्कूलों का दौरा करेंगे।