बंगाली सिनेमा में दो दशकों से ज़्यादा समय से मशहूर लोकप्रिय एक्टर कोयल मल्लिक को सिर्फ़ चार महीने पहले ही तृणमूल के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुना गया था। उनके राज्यसभा से इस्तीफ़े से ममता बनर्जी की पार्टी संसद में और कमजोर हो गई।
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी में जारी बगावत और नेताओं के पार्टी छोड़ने के बीच कोयल मलिक का यह फ़ैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। खास बात यह है कि कोयल मलिक केवल चार महीने पहले ही टीएमसी के टिकट पर राज्यसभा पहुंची थीं। हालाँकि कोयल मलिक ने अभी तक अपने इस्तीफे की वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन मौजूदा बगावत को देखते हुए यह फ़ैसला चौंकाने वाला नहीं लगता।
चार महीने पहले ही बनी थीं राज्यसभा सांसद
बंगाली फिल्म उद्योग की लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मलिक (रुक्मिणी मलिक) को ममता बनर्जी ने इस साल राज्यसभा भेजा था। उनके साथ गायक और नेता बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को भी राज्यसभा के लिए नामित किया गया था।मई महीने में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते समय कोयल मलिक ने पारंपरिक सफेद-लाल किनारी वाली साड़ी पहनकर बंगाली में शपथ ली थी। उन्होंने उस समय ममता बनर्जी का आभार जताते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और यह उनकी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत है। लेकिन यह राजनीतिक सफर केवल चार महीने में ही समाप्त हो गया।
संसद सत्र से पहले आया इस्तीफा
कोयल मलिक का इस्तीफा संसद के मानसून सत्र शुरू होने से ठीक चार दिन पहले आया है। ऐसे समय में उनका पद छोड़ना राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। हालाँकि उन्होंने न तो किसी दूसरे दल में जाने का संकेत दिया है और न ही अपने फ़ैसले का कारण बताया है।कोयल मलिक का इस्तीफ़ा तब आया है जब टीएमसी पहले से ही बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। एक दिन पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के पुराने सहयोगी मदन मित्रा ने बागी गुट का दामन थाम लिया था।
मदन मित्रा ने कहा, 'यह बदलाव का संकेत है और एक बड़े राजनीतिक तूफान की शुरुआत है। मैं अभी भी तृणमूल कांग्रेस में हूँ। मैंने केवल एक कमरे से निकलकर दूसरे कमरे में कदम रखा है। मैंने ममता बनर्जी के खेमे में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है और आज ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असली तृणमूल कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।' मदन मित्रा से पहले भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के भी टीएमसी छोड़ने की ख़बरें सामने आ चुकी हैं।
पहले भी तीन राज्यसभा सांसद छोड़ चुके हैं पार्टी
कोयल मलिक से पहले टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भी पार्टी छोड़ चुके हैं। बाद में इन नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। कोयल मलिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घटकर 13 से 9 सांसद रह गई है।विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में बढ़ी बगावत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से टीएमसी में असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फ़ैसलों पर सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर सबसे ज़्यादा नाराज़गी अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर रही है। इसी वजह से पहले कई विधायक बागी गुट में शामिल हुए और बाद में कई सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी।
लोकसभा में भी झटका
राज्यसभा के अलावा लोकसभा में भी टीएमसी को नुक़सान उठाना पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं। ये सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया यानी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं। इससे संसद में ममता बनर्जी की राजनीतिक ताक़त कमजोर हुई है। कोयल मलिक बंगाली फिल्म जगत का बड़ा नाम हैं और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा केवल संसदीय संख्या का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कोयल मलिक आगे किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़ेंगी या सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखेंगी। फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई बयान नहीं दिया है।
क्या पड़ेगा राजनीतिक असर?
माना जा रहा है कि लगातार हो रहे इस्तीफे और बगावत टीएमसी के लिए चिंता का विषय हैं। संसद में पार्टी की संख्या घटने के साथ-साथ संगठन के भीतर बढ़ता असंतोष भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि यह सिलसिला जारी रहता है तो बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।