इस साल गेहूं का रेकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है लेकिन किसानों को उससे क्या फायदा होगा। सरकार की नीतियां क्या हैं, वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर ने उसी तरफ इशारा किया है।
पिछले दिनों गेहूं के दाम खुले बाजार में जिस तरह तेजी से बढ़े उससे ऐसे किसानों ने भी एक उम्मीद बांधी थी कि नई फसल आने पर इस बार शायद कुछ बेहतर दाम मिल जाएं। लेकिन गेहूं के बढ़े दामों ने खाद्य मुद्रास्फीति को बहुत तेजी से बढ़ा दिया था। जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अपने स्टाक से 30 लाख टन गेहूं खुले बाजार में लाने का फैसला किया। इससे मुद्रास्फीति में तो थोड़ी सी कमी आने की उम्मीद बांधी जा रही है लेकिन किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।