अहमदाबाद विमान हादसे के बाद भी क्या सबक नहीं लिया गया? एयर इंडिया के ड्रीमलाइनर विमान में एक बार फिर फ्यूल स्विच से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। विमान को ग्राउंड क्यों किया गया? पढ़िए ड्रीमलाइनर विमान पर बार-बार सवाल क्यों?
जिस फ्यूल कंट्रोल स्विच की गड़बड़ी को अहमदाबाद में एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे में ढाई सौ लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है, कथित तौर पर वही गड़बड़ी फिर से हुई। इस बार भी एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान ही था। यह विमान लंदन से बेंगलुरु के लिए उड़ान भर रहा था। हालाँकि, खुशकिस्मती रही कि इस बार हादसा टल गया। रिपोर्टों के अनुसार इंजन स्टार्ट करते समय उसका बायां फ्यूल कंट्रोल स्विच दो बार 'रन' पोजीशन में नहीं रहा और 'कटऑफ' पोजीशन में चला गया। इसका मतलब है कि फ्यूल अपने आप बंद हो गया। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने बताया कि इसकी चेतावनी मिलने के बाद एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को ग्राउंड कर दिया गया। यानी इसे उड़ान भरने से रोक दिया गया।
रिपोर्ट है कि एयर इंडिया के एक पायलट ने बोइंग 787 विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी की सूचना दी। यह घटना पिछले साल जून में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया बोइंग 787 क्रैश से जुड़ी जांच के बीच हुई है। उस हादसे में फ्यूल कंट्रोल स्विच में गड़बड़ी ही मुख्य कारण के रूप में सामने आयी है।
ताज़ा घटना क्या हुई?
एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान VT-ANX ने लंदन से बेंगलुरु की उड़ान भरी थी। सोमवार को इंजन स्टार्ट के दौरान लेफ्ट इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच में समस्या आई। स्विच 'रन' पोजीशन में लॉक नहीं रह पाया और दो बार 'कटऑफ़' की तरफ चला गया। यह स्विच इंजन में ईंधन की सप्लाई कंट्रोल करता है। अगर बीच उड़ान में ऐसा होता तो इंजन बंद हो सकता था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एविएशन सेफ्टी ग्रुप 'सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन' ने इसकी जानकारी दी। विमान 9 साल पुराना था और लंदन-बेंगलुरु फ्लाइट पर था। पायलट ने लैंडिंग के बाद या इंजन स्टार्ट के दौरान समस्या नोट की और रिपोर्ट की।
एयर इंडिया का बयान
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हमारे एक पायलट ने बोइंग 787-8 के फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी रिपोर्ट की है। जानकारी मिलते ही हमने विमान को ग्राउंड कर दिया है। हम ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर यानी ओईएम यानी बोइंग से प्रायोरिटी पर जाँच करवा रहे हैं। डीजीसीए को भी बताया गया है।'एयरलाइन ने कहा कि पिछले साल डीजीसीए के आदेश पर उन्होंने पूरे फ्लीट के बोइंग 787 के फ्यूल कंट्रोल स्विच चेक किए थे और कोई समस्या नहीं मिली थी। इसने कहा है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। तो सवाल है कि फिर से वही समस्या क्यों आ गई?
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने कहा है कि यह घटना चिंताजनक है क्योंकि यह उसी तरह की समस्या है। उन्होंने डीजीसीए और एयर इंडिया से तुरंत जांच के नतीजे सार्वजनिक करने, सभी स्विच दोबारा चेक करने और पायलटों को जानकारी देने की मांग की।
अहमदाबाद क्रैश में क्या हुआ था?
यह मामला 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 क्रैश की जाँच के बीच आया है। पिछले साल के उस हादसे में बोइंग 787 टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद क्रैश हो गया था। शुरुआती जांच रिपोर्ट यानी एएआईबी में कहा गया कि दोनों इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच 'रन' से 'कटऑफ़' हो गए, जिससे इंजन में ईंधन नहीं पहुंचा और वे बंद हो गए। क्रैश में 260 लोगों की मौत हुई थी जिसमें से विमान में सवार यात्री और क्रू के 242 में से 241 लोगों की मौत हुई थी और ज़मीन पर टकराने से 19 लोगों की जानें गई थीं।
हादसे के बाद जाँच में पता चला कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि ईंधन क्यों कटऑफ किया तो दूसरे ने कहा कि उन्होंने नहीं किया। जांच में यह सवाल है कि स्विच खुद बदल गया या कोई तकनीकी, मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर समस्या थी। फाइनल रिपोर्ट कुछ महीनों में आएगी।
पहले भी फ्यूल कंट्रोल स्विच की समस्या आई थी
2018 में अमेरिकी एफ़एए ने बोइंग 787 सहित कुछ प्लेन के फ्यूल कंट्रोल स्विच के लॉकिंग मैकेनिज्म में समस्या की चेतावनी दी थी। लेकिन यह सिर्फ सलाह थी, इसलिए कई एयरलाइंस ने चेक नहीं किया। अहमदाबाद क्रैश के बाद डीजीसीए ने भारत में लगभग सभी बोइंग प्लेन के स्विच चेक करवाए।
व्हिसलब्लोअर चेताते रहे हैं
क्या बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में कुछ गंभीर खामियाँ हैं? वर्षों तक इसको लेकर व्हिसलब्लोअर चेताते रहे हैं। बोइंग में क़रीब दो दशक तक काम कर चुके एक व्हिसलब्लोअर इंजीनियर सैम सालेहपौर ने काफ़ी पहले ही कंपनी के विनिर्माण प्रक्रियाओं में गंभीर खामियों का आरोप लगाया था। बोइंग के इंजीनियर सैम सालेहपौर ने 2024 में अमेरिकी अधिकारियों के सामने गवाही दी थी कि बोइंग ने अपने 777 और 787 ड्रीमलाइनर विमानों के निर्माण में शॉर्टकट्स अपनाए, जिसके कारण सुरक्षा मानकों से समझौता हुआ। एक व्हिसलब्लोअर सालेहपौर ने दावा किया था कि इन विमानों के निर्माण में पुर्जों के बीच छोटे गैप्स जैसी छोटी-छोटी खामियाँ थीं जिससे लंबे समय में ये ख़तरनाक हो सकते हैं।
उन्होंने कहा था कि बोइंग ने गुणवत्ता नियंत्रण को नज़रअंदाज़ किया और उत्पादन में तेज़ी लाने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने विशेष रूप से 787 ड्रीमलाइनर के डिज़ाइन और असेंबली में खामियों की ओर इशारा किया, जिसमें विमान के हिस्सों को जोड़ने में ग़लत तकनीकों का उपयोग शामिल था। उनकी गवाही ने बोइंग की विनिर्माण प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए और कंपनी पर दबाव डाला कि वह अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करे। हालाँकि, बोइंग ने इन आरोपों का खंडन किया और दावा किया कि उनके विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सैम सालेहपौर ने अप्रैल 2024 में एनबीसी न्यूज को बताया था कि बोइंग को दुनिया भर में 'हर 787 ड्रीमलाइनर जेट को ग्राउंड करना चाहिए' क्योंकि उन्होंने चेतावनी दी थी कि इनमें समय से पहले खराबी आने का जोखिम है।
एक अन्य व्हिसलब्लोअर जॉन बार्नेट बोइंग में 30 से अधिक वर्षों तक काम कर चुके थे। वह नॉर्थ चार्ल्सटन प्लांट में क्वालिटी मैनेजर के रूप में कार्यरत थे जहां 787 ड्रीमलाइनर बनाया जाता है। उन्होंने 2019 में बीबीसी को बताया था कि दबाव में काम करने वाले कर्मचारी 'जानबूझकर' उत्पादन लाइन पर विमानों में घटिया पार्ट्स लगाते थे ताकि उत्पादन में देरी न हो।
बीबीसी के अनुसार, 2017 में रिटायर हुए बार्नेट ने दावा किया था कि उन्होंने प्रबंधकों को अपनी चिंताओं से अवगत कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2017 में रिटायर होने के बाद उन्होंने कंपनी के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू की थी। वे कंपनी के ख़िलाफ़ व्हिसलब्लोअर मुकदमे में सबूत दे रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्होंने ऑक्सीजन सिस्टम में गंभीर समस्याएं उजागर की थीं। उन्होंने कहा था कि कुछ मामलों में घटिया पार्ट्स को 'स्क्रैप बिन से निकालकर' उन विमानों में लगाया गया जो बनाए जा रहे थे। मार्च 2024 में उनकी अचानक मृत्यु हो गई थी। कुछ लोग इसे संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मानते हैं। हालाँकि, बोइंग उनके दावों को खारिज करते रहा है।
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को कंपनी ने अपने सबसे उन्नत और सबसे ज्यादा बिकने वाले यात्री विमानों में से एक बताया है। इसकी हल्की संरचना, ईंधन दक्षता और लंबी दूरी की उड़ान क्षमता ने इसे एयरलाइनों के बीच लोकप्रिय बनाया। हालांकि, इस विमान का इतिहास विवादों से भरा रहा है। 2013 में बैटरी से संबंधित समस्याओं के कारण 787 ड्रीमलाइनर की सभी उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी।
बहरहाल, यह ताज़ा घटना बोइंग 787 की सेफ्टी पर नए सवाल उठा रही है। एयर इंडिया ने सावधानी बरतते हुए प्लेन ग्राउंड किया है, लेकिन जानकार कहते हैं कि जांच जरूरी है ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।