केरल, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सुबह 7 बजे से मतदान होगा। सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि किस दल का पलड़ा भारी रहेगा।
केरल, असम और पुदुचेरी में 9 अप्रैल यानी गुरुवार को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होगा। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। सार्वजनिक तौर पर प्रचार अभियान मंगलवार को ही ख़त्म हो गया। इन तीनों जगहों पर एक ही चरण में मतदान होगा। असम में 126 सीटें, केरल में 140 सीटें और पुदुचेरी में 30 सीटें हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे। चुनाव आयोग की सुरक्षा में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से कराने की पूरी तैयारी है। तीनों राज्यों में मतदाताओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है।
केरल: विजयन तीसरी बार सत्ता चाहते हैं
केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केरल के इतिहास में किसी भी गठबंधन ने कभी तीसरी बार सत्ता नहीं जीती है। फिर भी एलडीएफ ने बड़ा दावा किया है कि एलडीएफ के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
एलडीएफ पिछले 10 साल के अपने कल्याणकारी कामों पर भरोसा जता रहा है। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट लोकसभा और स्थानीय चुनावों में मिली सफलता को असेंबली में जीत में बदलना चाहता है। कांग्रेस ने छात्रों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई गारंटी स्कीम्स का वादा किया है।
इस बार बीजेपी भी रेस में
इस बार बीजेपी भी केरल में मजबूत ताकत बनकर उभरी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने केरल में पहली सीट जीती थी। बीजेपी एनडीए का नेतृत्व करती है। अब तीनों गठबंधन एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि सामने वाले दो गठबंधनों में गुप्त समझौता है।केरल में माहौल काफी दिलचस्प है। कांग्रेस के कुछ बड़े नेता पहले से ही मुख्यमंत्री पद की दौड़ में लगे दिख रहे हैं। वहीं, सीपीआई(एम) के चार बड़े नेता पार्टी छोड़कर यूडीएफ के उम्मीदवार बन गए हैं।
असम: हिमंता बिस्वा सरमा का आक्रामक प्रचार
असम में मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली बीजेपी-एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले छह दलों के गठबंधन के बीच है। हिमंता सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने और बीजेपी की तीसरी सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं।प्रचार पूरी तरह हिमंता सरमा के इर्द-गिर्द घूमा। उन्होंने हिंदुत्व, मूल निवासी पहचान, मुस्लिम विरोधी बयानबाजी और विकास के मुद्दों को मिलाकर आक्रामक रणनीति अपनाई। बीजेपी ने महिलाओं के लिए ओरुनोदोई योजना के तहत 40 लाख महिलाओं को सीधा पैसा देकर फायदा उठाने की कोशिश की है।
बीजेपी के अन्य वादे
- अवैध घुसपैठ रोकना
- इमिग्रेंट्स एक्ट लागू करना
- ट्राइबल इलाकों को छोड़कर यूनिफॉर्म सिविल कोड
- दो लाख सरकारी नौकरियां
कांग्रेस ने भी जवाबी हमला किया है। हिमंता सरमा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर पाकिस्तान से लिंक होने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हिमंता सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं और हार की स्थिति में वे देश छोड़कर भाग सकते हैं। प्रचार काफी व्यक्तिगत और तीखा रहा।
पुदुचेरी: छोटा राज्य, उम्मीदवारों का व्यक्तिगत प्रभाव ज्यादा
पुदुचेरी में सिर्फ 30 सीटें हैं। यहां 2021 से ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी AINRC के नेता एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार है। इतनी कम सीटों में बड़े राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता और स्थानीय मुद्दे फैसला करेंगे। एनडीए गठबंधन में AINRC और बीजेपी साथ हैं। रंगासामी लंबे समय से पुदुचेरी की राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी व्यक्तिगत छवि मजबूत मानी जाती है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी जोर लगा रहे हैं।
बहरहाल, तीनों राज्यों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चुनाव आयोग ने सभी उम्मीदवारों और पार्टियों से शांतिपूर्ण चुनाव की अपील की है।
केरल में बाईपोलर फाइट एलडीएफ बनाम यूडीएफ के बीच बीजेपी तीसरा विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। असम में सत्ता विरोधी लहर और विकास के मुद्दे आमने-सामने हैं। पुदुचेरी में गठबंधन की राजनीति और स्थानीय नेता निर्णायक साबित हो सकते हैं। अब सबकी नजरें 9 अप्रैल के मतदान और फिर 4 मई के नतीजों पर टिकी हुई हैं। इन चुनावों का नतीजा राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।