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सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करने की तैयारी में है बीजेपी?

क्या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपने सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करेगी? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार को अभी शपथ लिए तीन दिन भी नहीं हुए थे और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरे दम से कहा कि तीन तलाक़ की प्रथा पर पाबंदी लगाने के लिए सरकार संसद में फिर से विधेयक लाएगी। समान नागरिक संहिता को लेकर भी उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक विचार-विमर्श करेगी। वह इस मुद्दे पर विधि आयोग की रिपोर्ट पर भी ग़ौर करेगी। बता दें कि तीन तलाक़ के मुद्दे को बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था।
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पिछले कुछ सालों से बीजेपी ने तीन तलाक़ को लेकर देश में ख़ासी बहस छेड़ी हुई है। तीन तलाक़ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक कह चुके हैं वे इसे ख़त्म करने के लिए क़ानून लाएँगे और वे मुसलिम महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
फ़रवरी, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में जब कई सालों से सत्ता के वनवास पर गई बीजेपी को प्रंचड बहुमत मिला था और उसे अपने दम पर 312 सीटों पर जीत मिली थी, तो बीजेपी ने इसे यह कहकर प्रचारित किया था कि उसे बड़ी संख्या में मुसलिम महिलाओं ने भी वोट दिया है। जबकि विपक्ष का कहना था कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कई भाषणों में कहा कि तीन तलाक़ का मुद्दा विपक्ष के कारण अटका हुआ है। पिछली सरकार ने दिसंबर 2018 में इस बिल को लोकसभा में पास कर दिया था। बहरहाल, रविशंकर प्रसाद का बयान दिखाता है कि मोदी सरकार की प्राथमिकता क्या है।
इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार कश्मीर से धारा 370 हटाने, अनुच्छेद 35 को हटाने को लेकर कार्रवाई तेज़ कर सकती है। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने इन दोनों ही को मुद्दा बनाया था और इन्हें हटाने का वादा किया था। हालाँकि तब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फ़ारुक अब्दुल्ला ने इसका पुरजोर विरोध किया था।
बता दें कि अनुच्छेद 35A, धारा 370 का ही हिस्सा है। इस धारा की वजह से कोई भी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहाँ का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है।
अब इसके बाद बात आती है राम मंदिर के मुद्दे की। राम मंदिर को लेकर भी बीजेपी अपने स्टैंड पर कायम है और उसके मातृ संगठन आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने ताज़ा बयान दिया है कि  ‘राम का काम करना है तो राम का काम हो कर रहेगा।’ बीजेपी ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में अयोध्या में राम मंदिर बनाने का भी वादा किया था। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर कोई ठोस क़दम उठा सकते हैं।

इसके अलावा जिस मुद्दे पर बीजेपी सबसे ज़्यादा सक्रिय है, वह है नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन यानी एनआरसी। एनआरसी बनाने का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है, जिसके तहत असम में ग़ैर क़ानूनी प्रवासियों की पहचान की जा रही है। बीजेपी वादा कर चुकी है कि वह असम में रह रहे अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालेगी। माना जा रहा है कि अब वह इस दिशा में तेज़ी से काम करेगी क्योंकि असम में भी उसकी सरकार है। बता दें कि उन्हीं लोगों को एनआरसी में जगह दी जाएगी जो 24 मार्च 1971 की आधी रात तक असम आए हैं और जिनके पास इस बात के सबूत भी होंगे। इस मुद्दे को लेकर भी बीजेपी को असम सहित पूर्वोत्तर में फायदा हुआ है। 

नागरिकता संशोधन विधेयक भी एक मुद्दा है। इस बिल के तहत अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख, पारसी, बौद्ध, ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने की बात कही गई है।
नागरिकता संशोधन विधेयक के कारण स्थानीय लोगों में डर बैठ गया है कि असम समझौते के तहत उन्हें जो सुरक्षा मिली हुई थी, वह ख़त्म हो जाएगी और वे अपनी ही जमीन पर अल्पसंख्यक हो जाएँगे। एक बार नागरिकता विधेयक क़ानून बन गया तो लोग धर्म के आधार पर बँट जाएँगे, जो पूरी तरह संविधान के विपरीत होगा। लेकिन इस धार्मिक ध्रुवीकरण से बीजेपी को ज़रूर फायदा होगा।
बीजेपी ने बंगाल में भी इस बात का वादा किया है कि वह वहाँ भी एनआरसी बनाएगी और अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को उखाड़ फेंकेगी। लगता है कि इस चुनाव में उसे इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन भी मिला है क्योंकि वह 2014 में 2 सीटों के मुक़ाबले 18 सीटें जीती है और उसका वोट शेयर बढ़कर 23.23% वोट के मुक़ाबले 40.25% हो गया है।
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सत्ता में आते ही बीजेपी नेताओं के बयान यह बताते हैं कि बीजेपी सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करेगी। लोकसभा चुनाव के प्रचार को देखें तो बीजेपी ने अपने 2014 के चुनावी नारे अच्छे दिन का ज़िक्र तक नहीं किया। उसका पूरा प्रचार बालाकोट हवाई हमले, आतंकवाद, पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने, राष्ट्रवाद के मुद्दों पर केंद्रित रहा। चुनाव प्रचार के दौरान ही उसने ज़ाहिर कर दिया था कि वह सत्ता में आने के बाद इन मुद्दों को लेकर काम करेगी और पहले हफ़्ते में ही उसने इसकी झलक दिखा दी है। लगता है कि बीजेपी को अपने सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करने के लिए सहयोगियों को छोड़ने से भी कोई परहेज नहीं है। क्योंकि एनडीए में उसकी अहम सहयोगी जेडीयू इन तमाम मुद्दों पर अपना अलग रुख ज़ाहिर कर चुकी है। लेकिन बावजूद इसके बीजेपी अपने एजेंडे पर अडिग दिखाई देती है।

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