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कितना है काला धन, सरकार को कोई अनुमान नहीं

क्या काले धन पर पाँच साल में नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी का रुख़ बदल गया है? 2014 के चुनाव से पहले काला धन विदेश से वापस लाने और फिर हर भारतीय के खाते में 15 लाख डालने का ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने अब काले धन की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। सरकार ने इसके लिए गोपनीयता का हवाला दिया है। आरटीआई के तहत पूछे गये सवालों के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड ने काला धन मामले पर जो सूचना दी है, वह गोपनीयता प्रावधान के अंतर्गत आती है। सरकार के इस जवाब से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या काला धन के मोर्चे पर मोदी सरकार पूरी तरह फ़ेल रही?

काला धन वापस आने पर ग़रीबों के खाते में 15 लाख रुपये डालने के वादे को अमित शाह ने ‘जुमला’ बताया था तो क्या काला धन वापस लाना भी एक जुमला साबित होगा?

आख़िर मोदी सरकार चाहती क्या है? जब आरटीआई से जवाब माँगा गया तो वित्त मंत्रालय ने जानकारी देने की बजाय बगलें झाँकने लगा। स्विट्ज़रलैंड से काला धन पर मिली सूचना के बारे में मंत्रालय से कंपनियों, लोगों के नाम और अन्य ब्योरा माँगा गया था। सूचना के आधार पर की गयी कार्रवाई के बारे में भी जानकारी माँगी गयी थी। बता दें कि भारत और स्विट्ज़रलैंड ने कर मामलों पर द्विपक्षीय प्रशासनिक सहायता पर हस्ताक्षर किये हैं जिसके तहत दोनों देशों के बीच वित्तीय लेखा का ब्यौरा साझा करने की व्यवस्था है। इसी संबंध में वित्त मंत्रालय ने कहा कि ज़रूरी क़ानूनी-व्यवस्था स्थापित की गयी है और 2019 से भारत को भारतीयों के स्विट्ज़रलैंड में वित्तीय खातों के बारे में 2018 की सूचना मिलेगी। यह व्यवस्था आगे चलती रहेगी। 

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यदि भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच इस स्तर पर व्यवस्था हुई तो सवाल उठता है कि क्या अब भारत सरकार के पास कोई पुख्ता जानकारी है कि देश और विदेश में कितना काला धन है? मंत्रालय ने तो साफ़ तौर पर इससे इनकार किया है। मंत्रालय ने यह भी जवाब में कहा है कि देश के भीतर और बाहर काले धन के चलन के बारे में कोई अनुमान नहीं है। अन्य देशों से मिली काले धन की सूचना के बारे में भी ब्योरा उपलब्ध कराने को वित्त मंत्रालय से कहा गया था। इसके बारे में सिर्फ़ इतना ही कहा गया है कि भारत-फ्रांस दोहरा कराधान बचाव संधि के तहत फ्रांस से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करने योग्य सभी 427 एचएसबीसी बैंक खातों के आकलन की कार्यवाही पूरी की जा चुकी है। 

मंत्रालय ने यह भी कहा कि इन मामलों में क़रीब 8,465 करोड़ रुपये की अघोषित आय को कर के दायरे में लाया। यह राशि बिना किसी सूचना के विदेशी बैंक खातों में रखी गयी थी। उन 427 मामलों में से 162 मामलों में जानकारी छिपाने को लेकर 1,291 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।

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प्रधानमंत्री का क्या रहा है रुख?

नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तभी से वह काला धन का मुद्दा उठाते रहे हैं। 2013-14 में जब उनका नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर चल रहा था तब छत्तीसगढ़ के कांकेर में 7 नवंबर, 2013 को नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रैली में ‘15 लाख’ का ज़िक्र किया था। मोदी ने तब मंच से कहा था, ‘पूरी दुनिया कहती है कि भारत में सभी चोर-लुटेरे अपना पैसा विदेशों में बैंकों में जमा करते हैं। विदेशों के बैंकों में काला धन जमा है। कांकेर के मेरे भाइयों और बहनों, मुझे बताओ, यह चोरी का पैसा वापस आना चाहिए या नहीं? यह काला धन वापस आना चाहिए या नहीं? क्या हम इन बदमाशों द्वारा जमा किए गए हर पैसे को वापस लेना चाहिए या नहीं?... अगर एक बार भी, विदेशों में बैंकों में इन चोर-लुटेरों द्वारा जमा किया गया धन, भले ही हम केवल वही वापस लाते हैं, तो हर ग़रीब भारतीय को 15 से 20 लाख रुपये तक मुफ़्त मिलेगा। वहाँ इतना पैसा है।’

इस भाषण के बाद भी पिछले चुनाव में मोदी क़रीब-क़रीब हर चुनावी रैलियों और जनसभाओं में काले धन और 15 लाख का ज़िक्र करते रहे। हालाँकि जब मोदी प्रधानमंत्री चुन लिए गये तो वह इन मुद्दों पर बोलने से बचते रहे। उन्होंने जमाख़ोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष अदालतें बनाने का भी वादा किया था। लेकिन हकीकत है कि आज तक जमाख़ोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए किसी विशेष अदालत का गठन नहीं किया गया।

कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियाँ मोदी पर यह कहते हुए हमलावर रही हैं कि मोदी ने विदेशों में पड़े काले धन को वापस लाने और हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालने का वादा किया था, लेकिन मोदी इसमें असफल रहे। इन दलों के नेता यह कहकर भी मोदी पर तंज कसते रहे कि यह मोदी जी का जुमला था।

शाह ने क्यों कहा था 'जुमला'

दरअसल, ‘15 लाख’ की बात को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ही जुमला क़रार दे दिया था। 2015 में एक इंटरव्यू के दौरान अमित शाह ने इसे ‘जुमला’ कहा था। शाह ने कहा था, ‘देखो, यह एक जुमला है। किसी के खाते में 15 लाख जमा नहीं किए जाएँगे। विपक्ष इसे जानता है, आप इसे जानते हैं और देश भी इसे जानता है। ग़रीब लोगों की बेहतरी के लिए काले धन को वापस लाने और उसका उपयोग करने पर विचार चल रहा है। आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए योजनाएँ बनाई जाएँगी। किसी को भी कभी भी नकदी नहीं मिलेगी और वे सभी इसे जानते हैं। यह एक भाषण देने का एक तरीक़ा है… एक रूपक। जो भी काला धन वापस आएगा, उसका इस्तेमाल ग़रीबों के लिए योजनाएँ बनाने के लिए किया जाएगा और यही मोदी कहना चाहते थे।’

यानी इसके साथ ही अमित शाह ने यह साफ़ कर दिया कि चुनाव के पहले मोदी के चुनावी भाषण में ‘15 लाख’ वाली बात को जुमला नहीं माना जाए। कहीं काले धन की बात भी जुमला तो नहीं है?

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