बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात बीजेपी शासित राज्य हैं। आज इन तीनों राज्यों से उपचुनाव के नतीजे आ रहे हैं। नतीजों से जनता के मूड का पता चलेगा।बांकीपुर पर पूरे देश की नज़रें हैं।
प्रशांत किशोर बांकीपुर से जनसुराज के विधायक बन गए हैं।
देशभर में पेपर लीक मामले पर छात्रों और युवकों के बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद आज तीन प्रमुख भाजपा शासित राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों के नतीजे आ रहे हैं तीन सीटों पर हुए उप-चुनावों की वोटों की गिनती जारी है।पेपर लीक विवाद के बाद यह पहला मौका है जब मतदाता, विशेषकर युवा (Gen Z), अपने मताधिकार के ज़रिए राजनीतिक मिज़ाज का संदेश दे जा रहे हैं।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर करीब 19 वोटों से जीते
बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर सीट जन सुराज के संस्थापक व चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने जीत ली है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी को करीब 19 हजार वोटों से हराया। आरजेडी यहां तीसरे नंबर पर रही। बांकीपुर सीट को भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जहाँ से पार्टी को आज तक कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नितिन नवीन के राज्यसभा चुने जाने के बाद खाली हुई थी।
बांकीपुर चुनाव में उस वक्त राजनीतिक गर्माहट आ गई जब नामांकन पत्र दाखिल करने के ठीक अगले दिन भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने "पारिवारिक कारणों" का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया। इस घटनाक्रम पर विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा था कि भाजपा हार के डर से घबराई हुई है। आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि उनकी पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को सभी जातियों, धर्मों और सामाजिक वर्गों का समर्थन मिला है और वे एक चौंकाने वाला परिणाम देंगी।
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस ने 6 हज़ार वोटों से जीती
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। दतिया सीट 2 अप्रैल को कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act) के तहत अयोग्य घोषित किए जाने के बाद खाली हुई थी। यहाँ भाजपा के आशुतोष तिवारी (जो अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक कुंवर घनश्याम सिंह के बीच सीधा मुकाबला था। घनश्याम सिंह पूर्व रियासत परिवार से आते हैं और 1993 तथा 2003 में यहाँ से विधायक रह चुके हैं। दतिया सीट को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गढ़ माना जाता है, जो 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार यहाँ से विधायक रहे, हालाँकि 2023 के चुनाव में वे हार गए थे। इस बार नए चेहरे (आशुतोष तिवारी) को टिकट दिए जाने से नरोत्तम मिश्रा के समर्थक नाराज थे और उन्होंने राज्य में विरोध प्रदर्शन भी किए थे।
मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जीती
गुजरात के वडोदरा स्थित मांजलपुर सीट बीजेपी ने जीत ली है। बीजेपी के सतीश गोविंदभाई पटेल ने 30 हज़ार से ज्यादा वोटों से कांग्रेस को हराया। यह सीट भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री योगेशभाई नारनदास पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी। योगेश पटेल ने 1990 से 2007 तक रावपुरा सीट से 5 बार और परिसीमन के बाद 2012, 2017 और 2022 में मांजलपुर सीट से जीत दर्ज की थी (कुल 36 वर्षों में लगातार 8 बार विधायक रहे)। यहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा के पूर्व वडोदरा नगर निगम पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल और कांग्रेस के पूर्व मंत्री व गुजरात कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष भीखाभाई राबारी के बीच था।युवाओं के मिज़ाज ने दिया भावी राजनीति का संकेत
इन तीन राज्यों के उप-चुनावों के नतीजे ने इस बात का संकेत दे दिया है कि देशभर में पेपर लीक और नौकरियों से जुड़े मुद्दों पर छात्रों व युवाओं में बने गुस्से का चुनावी नतीजों पर पूरा प्रभाव पड़ा है। बीजेपी शासित राज्यों के कामकाज पर भी यह एक तरह का संदेश है। क्योंकि बीजेपी ने इन तमाम राज्यों में डबल इंजन की सरकार का प्रचार कर रखा था।