संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार जल्द ही संसद में इस एंटी पेपर लीक बिल को पेश करेगी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि इसमें 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट से भारी दबाव में मोदी सरकार ने गुरुवार को पेपर लीक के ख़िलाफ़ जिस कड़े क़ानून को लाने की बात की थी उसको लेकर कैबिनेट ने एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके लिए पेपर लीक रोकथाम कानून यानी प्रिवेंशन ऑफ़ पेपर लीक क़ानून में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इधर, नीट पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर छात्र आंदलोन से बुरी तरह घिरी सरकार ने अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने 47 अधिकारियों की सेवाएं खत्म कर दी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने यह क़दम तब उठाया है जब छात्रों के प्रोटेस्ट के बीच नीट पेपर लीक मामले में सुधार होता हुआ दिखाना चाहती है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है कि एजेंसी उनके खिलाफ 'कानूनी और आपराधिक कार्रवाई' भी शुरू करेगी।
इधर, प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के दोषियों के लिए सजा और जुर्माने को पहले से कहीं अधिक सख्त बनाया गया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नए क़ानून में अधिकतम 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने का भी प्रस्ताव है।
संसद में जल्द पेश होगा बिल
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार जल्द ही इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ निर्देश दिए हैं कि छात्रों से जुड़े इस अहम क़ानून को लाने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। रिजिजू ने कहा, 'हम बिल पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि छात्रों से जुड़े इस क़ानून में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। देश भी यही चाहता है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जाए।'
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही दिए थे संकेत
कैबिनेट की बैठक से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया था कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए और कड़े क़ानून लाने जा रही है। उन्होंने कहा था कि सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और पेपर लीक के दोषियों के ख़िलाफ़ पहले से अधिक सख्त कार्रवाई का प्रावधान करेगी।अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद माना जा रहा है कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नया संशोधित क़ानून जल्द संसद में पेश करेगी।
क्या होंगे नए प्रावधान?
प्रस्तावित संशोधन में सख़्त कर्रवाई के प्रावधान किए गए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि पेपर लीक के मामलों में अधिकतम 10 साल तक की जेल, दोषियों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और न्यूनतम सजा तीन साल से बढ़ाकर पांच साल किया गया है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और कानून लागू होने के बाद जाँच और मुक़दमों को अधिक प्रभावी बनाने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और लाखों छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है।
छात्र आंदोलन से भारी दबाव में सरकार
कैबिनेट का यह फ़ैसला तब आया है जब देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। जंतर-मंतर पर छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेतृत्व में कई दिनों से आंदोलन चल रहा है।
हाल ही में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और सीजेपी नेताओं के बीच बातचीत भी हुई थी। बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया था कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर सिद्धांततः सहमति जताई है। इनमें से एक मांग नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या करने वाले परिवारों को मुआवजा देने का प्रस्ताव है। दूसरी मांग आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों को वापस लेने पर सकारात्मक रुख है। हालाँकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फ़ैसला लेने के लिए और समय मांगा था।
विपक्ष पर लगाया संसद नहीं चलने देने का आरोप
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार शुरू से ही नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधार के मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा नहीं होने दी।उन्होंने कहा, 'पिछले पाँच दिनों तक नीट पेपर लीक पर चर्चा नहीं हो सकी। आज भी हमने विपक्ष से कहा कि तुरंत चर्चा शुरू की जाए, लेकिन कांग्रेस ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।' रिजिजू ने कहा कि अब जब छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल सोनम वांगचुक भी अपना अनशन ख़त्म कर चुके हैं और संसद में चर्चा की मांग कर चुके हैं, तब इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का कोई औचित्य नहीं है।
'छात्रों का भविष्य हमारी प्राथमिकता'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का मक़सद केवल सजा बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। उन्होंने विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाना सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा, 'संसद की कार्यवाही बाधित करने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। अगर विपक्ष चर्चा से बचता रहा तो देश का युवा इसका जवाब देगा।'