एक फिल्म है 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब'। ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित। फ्रांस में रिलीज हो गई। इटली, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया में भी रिलीज हो गई। बाक़ी दुनिया भर के कई देशों में रिलीज हो गई। यहाँ तक कि इसराइल के बेहद क़रीबी साथी देश अमेरिका में भी रिलीज हो गई। लेकिन भारत में रिलीज नहीं हो सकती! क्यों? क्योंकि डर है कि इसराइल को बुरा लग जाएगा? यह फिल्म गज़ा में इसराइली हमले में मारी गई एक पाँच साल की बच्ची की कहानी पर जो आधारित है। क्या हाल हो गया है!
दरअसल, यह मामला कुछ दिनों पहले आया था। भारत में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफिकेशन यानी सीबीएफ़सी ने ऑस्कर नामांकित फिल्म 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' को थिएटर में रिलीज करने से रोक दिया है। यह फिल्म ट्यूनीशियन डायरेक्टर काउथर बेन हानिया की है। फिल्म भारत में रिलीज 6 मार्च को होनी थी, लेकिन सीबीएफ़सी ने सर्टिफिकेट नहीं दिया। वजह बताई गई है कि फिल्म रिलीज होने से भारत-इसराइल संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

फिल्म किस बारे में है?

फिल्म एक असली घटना पर आधारित है। 2024 में गज़ा में इसराइली फोर्सेस ने एक कार पर हमला किया था। उसमें 5 साल की फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब फंसी हुई थी। वह फोन पर इमरजेंसी से मदद मांग रही थी। बाद में उसकी मौत हो गई। फिल्म इस बच्ची की आखिरी घड़ियों को दिखाती है। यह डॉक्यूड्रामा है, जो बहुत संवेदनशील और इमोशनल है।
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फिल्म को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में सितंबर 2025 में दिखाया गया था। वहां इसे 20 मिनट से ज्यादा स्टैंडिंग ओवेशन मिला और सिल्वर लायन अवॉर्ड भी मिला। अब यह ऑस्कर में नामांकित है। अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस जैसे कई देशों में रिलीज हो चुकी है।

क्या हुआ भारत में?

मुंबई की कंपनी जय विरात्रा एंटरटेनमेंट के हेड मनोज नंदवाना ने फ़िल्म के भारत डिस्ट्रीब्यूशन अधिकार लिए थे। उन्होंने फरवरी में सीबीएफ़सी को फिल्म दिखाई और सर्टिफिकेट मांगा। उनका प्लान था कि 6 मार्च को रिलीज हो, ताकि 16 मार्च के ऑस्कर से पहले प्रचार हो सके।

सीबीएफ़सी ने सर्टिफिकेट नहीं दिया। मनोज नंदवाना ने वैरायटी मैगजीन को बताया कि एक सीबीएफ़सी सदस्य ने कहा, 'अगर यह फ़िल्म रिलीज हुई तो भारत-इसराइल रिलेशनशिप टूट सकती है।'

हालाँकि, सीबीएफ़सी और सरकार की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन इससे यह सवाल तो उठता ही है कि क्या जब यूरोपीय देशों या अमेरिका में यह फ़िल्म दिखाई गई तो क्या उनके संबंध टूट गए? क्या संबंध टूटने की वजह से अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटा जा सकता है?
रिपोर्ट है कि सीबीएफ़सी की इस दलील का नंदवाना ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें बताया कि भारत-इसराइल रिश्ता इतना मज़बूत है कि एक फ़िल्म से टूटने वाला नहीं है। यह सोचना बेवकूफी है।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में इसराइल से अच्छे रिश्ते हैं, फिर भी फिल्म वहां रिलीज हुई।
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सीबीएफ़सी पर सवाल

सीबीएफ़सी के फ़ैसले अक्सर विवादास्पद होते हैं। कुछ फिल्मों को राजनीतिक या धार्मिक वजह से कट्स या रोक लगती है, जबकि दूसरी फ़िल्मों में कम आपत्ति पर सर्टिफिकेट मिल जाता है। हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया कि अक्षय कुमार की OMG-2 में भगवान शिव दिखाने पर आपत्ति हुई, लेकिन हाउसफुल 5 में क्रूड ह्यूमर और ऑब्जेक्टिफिकेशन पर कोई समस्या नहीं हुई। तमिल फिल्म जना नायगन भी जनवरी में रिलीज के लिए कोर्ट में लड़ रही है।
बहरहाल, यह मामला भी सीबीएफ़सी की सेंसरशिप पर बहस छेड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय भारत-इसराइल रिश्ते मजबूत हुए हैं। हाल ही में उनकी इसराइल यात्रा भी हुई। फिल्म अब भारत में थिएटर में नहीं दिखाई जा सकेगी, जब तक सीबीएफ़सी अपना फ़ैसला नहीं बदलता। डायरेक्टर काउथर बेन हानिया ने भी इस सेंसरशिप पर सवाल उठाए हैं। यह घटना फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और सिनेमाई स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।