सीबीएसई का वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल कम से कम 2 दिनों तक खुला रहने की उम्मीद है। इसे सोमवार को लाइव होना था लेकिन सीबीएसई इसे मंगलवार को ही लाइव कर पाई।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कई बार हुई देरी के बाद आखिरकार कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों के लिए मार्क्स वेरिफिकेशन (अंकों के सत्यापन) और री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल खोल दिया है। जो छात्र अपने नंबरों की दोबारा जांच या पुनर्मूल्यांकन कराना चाहते हैं, वे सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर सीधा लिंक पा सकते हैं।
अभी भी आ रही है छात्रों को समस्या
सीबीएसई के पोर्टल को लेकर नई समस्याएँ सामने आईं हैं। प्रक्रिया शुरू होने के तुरंत बाद छात्रों ने लॉगिन संबंधी परेशानियों का सामना करने की शिकायत की। अधिकांश छात्रों को अपने लॉगिन विवरण अपलोड करने के बाद स्क्रीन के अटक जाने की समस्या का सामना करना पड़ा। कुछ छात्रों ने त्रुटियों के वीडियो भी ऑनलाइन साझा किए। यह घटनाक्रम कई बार देरी और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा बार-बार दिए गए आश्वासनों के बाद सामने आया है।
आवेदन से पहले वीडियो देखने की सलाह
सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए छात्रों से अपील की है कि वे पोर्टल पर उपलब्ध गाइडलाइन वीडियो (instructional video) को आवेदन सबमिट करने से पहले ध्यान से देखें। बोर्ड ने मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया को स्टेप-बाय-स्टेप (चरणबद्ध तरीके से) समझाया है।पोर्टल खुलने में क्यों हुई देरी?
पहले इस पोर्टल को 29 मई को उन छात्रों के लिए खोला जाना था, जिन्होंने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं (evaluated answer books) की स्कैन की गई कॉपियां प्राप्त कर ली थीं। सीबीएसई ने इसकी तारीख को आगे बढ़ाकर 1 जून कर दिया था। बोर्ड का कहना था कि पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन (error-free) बनाने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी। छात्रों को 19 मई से 25 मई के बीच अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 26 मई के बाद से पोर्टल बंद या इनएक्सेसिबल हो गया था।शिकायत और सुधार की प्रक्रिया
शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, संशोधित शेड्यूल के तहत जिन उम्मीदवारों को उनकी आंसरशीट मिल चुकी हैं, वे किसी विशेष प्रश्न को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, यदि उन्हें लगता है कि नंबर गलत दिए गए हैं या जांचने में छूट गए हैं। इन आपत्तियों की जांच संबंधित विषय के विशेषज्ञों द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के जरिए की जाएगी।सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्रों को तय शुल्क देना होगा:
- मार्क्स वेरिफिकेशन (अंकों के सत्यापन) के लिए: ₹500 प्रति उत्तर पुस्तिका (Answer Book)
- री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए: ₹100 प्रति प्रश्न (Question)
- समय सीमा: बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों को स्कैन की गई और जांची गई आखिरी आंसरशीट उपलब्ध कराने के बाद, यह वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल कम से कम 2 दिनों तक खुला रहने की उम्मीद है।
क्या है सीबीएसई का पूरा विवाद
बोर्ड परीक्षाओं के बाद सीबीएसई के परिणाम घोषित होने पर मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे। कई मेधावी और होनहार छात्रों को उनकी उम्मीद और साल भर के प्रदर्शन के विपरीत बेहद कम अंक मिले। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का आरोप था कि कॉपियों को बिना ठीक से पढ़े और बेहद लापरवाही से जांचा गया है। इस वजह से बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य और कॉलेज एडमिशन दांव पर लग गया, जिससे देश भर के छात्रों में असंतोष और निराशा का माहौल पैदा हो गया।
इस पूरे विवाद को तथ्यात्मक रूप से सामने लाने और सीबीएसई की खामियों को उजागर करने में सार्थक सिद्धांत (Sarthak Siddhant) और निसर्ग अधिकारी (Nisarg Adhikari) नाम के दो छात्रों ने मुख्य भूमिका निभाई। इन दोनों छात्रों ने कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त करने के बाद एक विस्तृत तकनीकी और डेटा-आधारित विश्लेषण किया। उन्होंने दिखाया कि कैसे सीबीएसई के शिक्षकों ने मूल्यांकन के दौरान सही उत्तरों को भी पूरी तरह से गलत काट दिया था या कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के अंक जोड़ना ही भूल गए थे।
सार्थक और निसर्ग ने इस पूरे मामले को केवल व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि डेटा शेयरिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से इसे एक बड़े अभियान में बदल दिया।
उन्होंने कई अन्य प्रभावित छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का डेटा जुटाया और यह साबित किया कि अंकों की यह हेराफेरी कोई मानवीय भूल (Human error) का अकेला मामला नहीं थी, बल्कि यह सीबीएसई के पूरे मूल्यांकन सिस्टम की एक व्यवस्थागत विफलता (Systemic Failure) थी। उनके द्वारा पेश किए गए ठोस दस्तावेजी सबूतों के कारण सीबीएसई को बैकफुट पर आना पड़ा और आम जनता के सामने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
इस खुलासे के बाद सीबीएसई को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा और अपनी साख बचाने के लिए पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार के निर्देश देने पड़े। इन दोनों छात्रों के इस प्रयास ने देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक जरूरी बहस छेड़ दी। सार्थक और निसर्ग के इस कदम ने यह साबित किया कि जागरूक छात्र अगर सही और तथ्यात्मक रूप से आवाज उठाएं, तो वे एक स्थापित और बड़ी प्रशासनिक प्रणाली में भी सुधार लाने के लिए दबाव बना सकते हैं।