ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम सिस्टम को लेकर एक के बाद एक विवादों में फँसी सीबीएसई ने अब हैकिंग के दावे को खारिज किया है। बोर्ड ने कहा है कि वायरल हो रहा URL सिर्फ एक टेस्टिंग पोर्टल था, जिसमें असली छात्रों का कोई डेटा नहीं था। सीबीएसई की यह सफ़ाई तब आई है जब खुद को एथिकल हैकर बताने वाले क्लास 12 के छात्र निसर्ग अधिकारी ने एक्स पर ओएसएम सिस्टम के हैक होने का दावा किया था।

बहरहाल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने आधिकारिक बयान जारी कर साफ़ किया है कि सोशल मीडिया पर cbse.onmarks.co.in URL का जिक्र किया जा रहा है। लेकिन बोर्ड ने कहा, 'यह पोर्टल आंसर शीट्स के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। असली मूल्यांकन वाला पोर्टल अलग URL वाला था, जिसमें न कोई सिक्योरिटी ब्रेक हुआ है और न ही कोई कमजोरी पाई गई है।'

CBSE का पूरा बयान

बोर्ड ने कहा कि वायरल URL केवल आंतरिक टेस्टिंग और रिव्यू के लिए बनाया गया था। इसमें सिर्फ सैंपल डेटा था, न कि छात्रों के असली अंक, आंसर शीट या व्यक्तिगत जानकारी। सीबीएसई ने जोर देकर कहा कि असली मूल्यांकन सिस्टम में कोई सिक्योरिटी ब्रेक नहीं हुआ है और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। बोर्ड ने ओएसएम सिस्टम का बचाव करते हुए कहा कि यह पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए भी व्यवस्था है।
हालाँकि, सीबीएसई द्वारा खंडन किए जाने के बाद भी छात्र हैकर ने दावा किया है कि सीबीएसई की वेबसाइट कमजोर है और इसको दुरुस्त करने के बजाए वे इसको मानने को भी तैयार नहीं हैं। इसने कई स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया है कि वह इस मामले में सही हैं।

छात्र हैकर का दावा

इस मामले में खुद को एथिकल हैकर बताने वाले क्लास 12 के छात्र निसर्ग अधिकारी ने पहले दावा किया था कि उन्होंने फरवरी 2026 में ओएसएम पोर्टल में कमजोरियां पाई थीं। इंडिया टुडे से बातचीत में निसर्ग ने कहा था,'उन्होंने 30 मिनट में पहली कमजोरी ढूंढ ली। कुल 2-3 घंटे में एग्जामिनर लेवल तक पहुंच बना ली। वे एग्जामिनर की तरह अंक भी भर सकते थे और एग्जामिनर की डिटेल्स देख सकते थे।'

निसर्ग का कहना है कि उन्होंने इन कमजोरियों की जानकारी सीबीएसई और संबंधित सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसियों को दी थी, लेकिन उन्हें सिर्फ एक्नॉलेजमेंट मिला। उन्होंने दावा किया कि एक समस्या ठीक हुई, लेकिन बाकी नहीं। हालाँकि, निसर्ग के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। और इसी बीच अब सीबीएसई ने बयान जारी कर कहा है कि ओएसएम सिस्टम के हैक होने का दावा ग़लत है।

आंसर शीट की कॉपी का बड़ा विवाद भी

हैकिंग का यह विवाद सीबीएसई के रिजल्ट के बाद की आंसर शीट की कॉपी, वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन जैसी प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच सामने आया है। कुछ छात्रों ने स्कैन की गई आंसर शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। ओएसएम यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम इस साल शुरू किया गया, जिसमें आंसर शीट को डिजिटल रूप से स्कैन करके ऑनलाइन चेक किया जाता है। इसका मक़सद मूल्यांकन को ज्यादा पारदर्शी बनाना था।

CBSE का आश्वासन

सीबीएसई ने सभी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को आश्वासन दिया है कि असली मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है। बोर्ड ने कहा कि सिस्टम में मजबूत सुरक्षा उपाय किए गए हैं और मूल्यांकन की अखंडता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। अभी तक कोई सबूत सामने नहीं आया है कि असली छात्रों के अंकों में कोई बदलाव किया गया हो।
यह मामला परीक्षा बोर्डों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बड़े डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा और छात्रों के डेटा की सुरक्षा को लेकर फिर से चर्चा शुरू कर गया है। सीबीएसई ने कहा है कि वह इस मामले पर पूरी नज़र रखे हुए है।