केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में सोमवार 1 जून को आग नहीं लगी। यह ट्वीट एएनआई ने शाम 4.23 पर किया। इससे पहले सुबह एएनआई ने ही बताया था कि शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में आग लग गई है। उसने अनगिनत वीडियो भी जारी किए थे। लेकिन शाम को एएनआई ने एक ट्वीट करके कहा- विकास मार्ग स्थित शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय में लगी आग के संबंध में पहले किए गए ट्वीट (तस्वीरों सहित) दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद हटा दिए गए हैं। डीएफएस और शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आग दिल्ली के आईटीओ के पास स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) में लगी थी। शुरुआती जानकारी दिल्ली अग्निशमन सेवा द्वारा प्रदान की गई थी।
इस स्पष्टीकरण का समय महत्वपूर्ण है। आग सुबह 9.37 बजे लगी थी। लेकिन स्पष्टीकरण देने में शाम हो गई।
इससे पहले एएनआई और तमाम टीवी चैनलों ने खबर दी थी कि दिल्ली के आईटीओ (ITO) इलाके में स्थित शिक्षा मंत्रालय के एक कार्यालय में सोमवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत (जानमाल का नुकसान) नहीं हुआ है। चैनलों ने इसका लाइव कवरेज तक कर डाला था।
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एएनआई ने पहले घटना का विवरण ऐसा दिया था

एएनआई ने फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार बताया था कि यह आग नई दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र में स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) कैंपस के भीतर लगी है, जहां शिक्षा मंत्रालय का कार्यालय (सेकंड फ्लोर) संचालित होता है।

समय: दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 9:37 बजे आग लगने की सूचना मिली।

कार्रवाई: सूचना मिलते ही दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 8 फायर टेंडर्स (आग बुझाने वाली गाड़ियां) को मौके पर रवाना किया।

वर्तमान स्थिति: दमकलकर्मियों की मुस्तैदी से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।
टीवी चैनलों पर जब यह खबर चलने लगी और कुछ ने लाइव प्रसारण शुरू कर दिया तो जनता ने भी सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को घेरने में देर नहीं लगाई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तो 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा कर दी। उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना 11.30 बजे सभी पत्रकारों तक पहुंच चुकी थी। उसके बावजूद मोदी सरकार की ओर से, शिक्षा मंत्रालय की ओर से या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर से कोई स्पष्टीकरण उस समय तक नहीं आया। उधर, कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में आग लगने की खबर को सही मानकार टिप्पणियां हो रही थीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब परीक्षा अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विवादों में घिरे हुए हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) दोनों को कई पक्षों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। 

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: "दाल में कुछ काला है"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस घटना पर गहरी चिंता और संदेह व्यक्त किया। जयराम रमेश ने कहा: "शिक्षा मंत्रालय के कार्यालयों में आग लगने की खबर बेहद चिंताजनक है। इसके साथ ही यह मामला बेहद संदिग्ध (fishy) भी है।" पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा कि शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में आग संयोग है या प्रयोग। हालांकि दोनों नेताओं की टिप्पणियां टीवी चैनलों की खबरों पर आधारित थीं। जिनमें से अधिकांश को सरकार समर्थक माना जाता है। एएनआई पर भी इसी तरह का आरोप विपक्षी दल लगा चुके हैं।

विपक्ष ने उस समय आशंका जताई थी कि कहीं इस आग के पीछे चल रहे विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों या डिजिटल साक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने की कोई कोशिश तो नहीं थी। फिलहाल, पुलिस और दमकल विभाग आग के मूल कारणों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। लेकिन दमकल विभाग अब कह रहा है कि आग शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में नहीं लगी थी।

क्या है सीबीएसई OSM विवाद, जिससे जोड़ा जा रहा है यह हादसा?

कांग्रेस ने इस आग को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार किया था, क्योंकि यह खबर ऐसे समय में आई जब शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई पहले से ही एक बड़े विवाद के घेरे में हैं।
डेटा ब्रीच और पोर्टल में गड़बड़ी: हाल ही में सीबीएसई की कक्षा 12 की परीक्षा के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाले 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम और उसके 'OnMark' पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामियां (vulnerabilities) सामने आई थीं। आरोप है कि लगभग 20 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का डेटा प्रभावित हुआ और कई छात्रों के पास गलत कॉपियां पहुंच गईं।
वेंडर कंपनी (COEMPT) पर आरोप: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सीबीएसई ने 'COEMPT' नामक एक ऐसी विवादित कंपनी को यह ठेका सौंपा, जो इसके योग्य नहीं थी। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, बोर्ड ने सितंबर में अपने नियमों में बदलाव (corrigendum) करके इस वेंडर कंपनी को ब्लैकलिस्ट होने से बचाने की कोशिश भी की थी। छात्र सार्थक सिद्धांत ने अपनी रिसर्च से इस पर कई खुलासे किए हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग: विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को "अहंकार और अक्षमता का प्रतीक" बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
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कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए पूछा, "देश को कब तक मंत्री प्रधान को झेलना पड़ेगा, जिनके मंत्रालय ने टेंडरों में इतनी अकल्पनीय अनियमितताओं को अंजाम दिया है और लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को धूमिल किया है?" उन्होंने आरोप लगाया, "मंत्री प्रधान अहंकार और अक्षमता की जीती-जागती मिसाल हैं, जो राष्ट्र के प्रति किसी भी जिम्मेदारी से ऊपर अपने राजनीतिक एजेंडे को रखते हैं।"
सीबीएसई और नीट में अनियमिताओं को लेकर प्रधानमंत्री एक भी शब्द नहीं बोल रहे हैं। जबकि पीएम मोदी दिन परीक्षा पर चर्चा करते रहते हैं। इसने पीएम मोदी के कार्यक्रम को भी विवादों में ला दिया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के आरोप छात्रों के खुलासों पर आधारित हैं। कई सीबीएसई कक्षा 12 के छात्रों ने पोर्टल पर अपलोड की गई स्कैन की गई आंसरशीट को देखने के बाद गड़बड़ी की शिकायत की थी, क्योंकि उन्हें पता चला था कि आंसरशीट उनकी नहीं हैं। सीबीएसई ने बाद में उनसे संपर्क किया और उन्हें उनकी सही आंसरशीट उपलब्ध कराईं। बोर्ड ने कहा कि उसने इस मामलों को "सर्वोच्च प्राथमिकता" पर लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आईआईटी-मद्रास और आईआईटी-कानपुर के विशेषज्ञ, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीआईसीआई) के साथ मिलकर सिस्टम की जांच कर रहे हैं और पोर्टल और पेमेंट गेटवे के एकीकरण को मजबूत कर रहे हैं।