loader

किसान आंदोलन में मारे गए किसानों को मुआवज़ा दे केंद्र, सूची हम देंगे: राहुल 

केंद्र सरकार की ओर से यह कहे जाने पर कि उसके पास किसान आंदोलन में मारे गए किसानों का कोई आंकड़ा नहीं है, इसलिए वह मुआवज़ा नहीं दे सकती, इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को हमला बोला है। 

वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की मुआवज़े की मांग को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों की मांगों का पूरा समर्थन करती है। 

ताज़ा ख़बरें

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री एक ओर माफ़ी मांगने की बात कहते हैं और दूसरी ओर वे मारे गए लोगों के बारे में कहते हैं कि वे हैं ही नहीं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में मारे गए किसानों की सूची पंजाब सरकार के पास है, हम इसे केंद्र सरकार को दे सकते हैं और प्रधानमंत्री चाहें तो इनके परिजनों को फ़ोन भी कर सकते हैं। 

Center should give compensation to farmers killed in andolan - Satya Hindi
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार ने 403 किसानों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया और 152 किसानों के परिजनों को नौकरी भी दी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास आंदोलन में मारे गए 503 किसानों के नाम सहित पूरी जानकारी है। 
राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार लाखों-करोड़ों रुपये पेट्रोल-डीजल से कमा रही है, ऐसे में उसके पास पैसे क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब भी ग़रीबों की बात होती है तो सरकार कहती है कि पैसे नहीं हैं लेकिन उद्योगपतियों को लेकर वह ऐसा नहीं कहती।

रद्द करने पड़े क़ानून 

राहुल गांधी ने कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पंजाब से आवाज़ उठाई थी और उसके बाद संसद से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने इन क़ानूनों को रद्द करने की मांग जोरदार ढंग से की। आख़िरकार किसानों और विपक्ष के संघर्ष के बाद केंद्र सरकार को पीछे हटते हुए कृषि क़ानूनों को रद्द करना ही पड़ा। 

देश से और ख़बरें

किसानों की लंबित मांगें 

किसान कह चुके हैं कि एमएसपी पर गारंटी क़ानून और किसानों पर दर्ज मुक़दमे वापस लिए बिना आंदोलन ख़त्म नहीं होगा। किसानों की बाक़ी मांगों में बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेना, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना और आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को मुआवजा देना भी शामिल है। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें