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जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह व 5 अन्य के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह व 5 अन्य के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर दी है। यह चार्जशीट दविंदर के आतंकवादी समूहों के साथ संबंध होने के मामले में दाख़िल की गई है। 

चार्जशीट भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दाख़िल की गई है। 

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दविंदर सिंह को इस साल जनवरी में आतंकवादी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों के साथ श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर कार में पकड़ा गया था। इसके बाद दविंदर को नौकरी से निलंबित कर दिया गया था।

दविंदर सिंह के साथ पकड़े गए दो आतंकवादियों में से एक नावीद बाबू भी था। नावीद बाबू आतंकवादी संगठन हिजुबल मुजाहिदीन से जुड़ा हुआ है। नावीद बाबू को शोपियां में बेहद ख़तरनाक आतंकवादी माना जाता है और उस पर कई पुलिसकर्मियों और फल व्यापारियों की हत्या का आरोप है। 

नावीद बाबू, रफ़ी अहमद राथर व क़ानून के छात्र इरफ़ान शफ़ी मीर के ख़िलाफ़ भी चार्जशीट दाख़िल की गई है। जिन अन्य लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की गई है, उनमें क्रॉस-एलओसी ट्रेड के पूर्व अध्यक्ष तनवीर अहमद वानी और सैयद इरफान का भी नाम शामिल है। वानी के बारे में पता चला था कि उसने नावीद बाबू को पैसा उपलब्ध कराया था।

इंडिया टुडे के मुताबिक़, एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में यह जानकारी सामने आई है कि नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास में तैनात कुछ अधिकारी इरफ़ान शफ़ी मीर के लगातार संपर्क में थे और और उसे जम्मू-कश्मीर में लोगों को भारत सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट करने को सेमिनार कराने को पैसा उपलब्ध कराते थे।

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इरफ़ान शफ़ी मीर ने कई कश्मीरियों को पाकिस्तान जाने के लिए वीजा की सुविधा भी उपलब्ध कराई थी। 

पिछले महीने दिल्ली पुलिस की ख़ासी आलोचना हुई थी जब वह एक मामले में दविंदर सिंह के ख़िलाफ़ चार्जशीट तक दाख़िल नहीं कर पाई थी और दिल्ली की एक अदालत ने उसे जमानत दे दी थी। हंगामा मचने पर एनआईए को इस बारे में स्पष्टीकरण जारी कर कहना पड़ा था कि मुख्य मामले में दविंदर सिंह को जमानत नहीं मिली है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के वाची गांव के सरपंच तारिक़ अहमद मीर को गिरफ़्तार किया था। तारिक़ का नाम नावीद बाबू से पूछताछ के दौरान सामने आया था।मीर पर हिज़बुल के आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करने का आरोप है।

मीर ने 2014 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और दिसंबर, 2014 में श्रीनगर में हुई एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच भी साझा किया था।

दविंदर के साथ पकड़े गए आतंकवादी उसके श्रीनगर स्थित घर पर भी रुके थे। 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी अफज़ल गुरू ने भी दविंदर सिंह का नाम लिया था। दविंदर सिंह पर यह भी आरोप हैं कि उसने ही अफज़ल गुरू को दिल्ली भेजा था और संसद पर हुए हमले के लिए साजो-सामान जुटाया था। फांसी से पहले अफज़ल गुरू ने एक ख़त लिखा था जिसमें उसने कहा था कि दविंदर सिंह ने उससे संसद पर हमले के दोषियों का साथ देने के लिए कहा था। 

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