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श्योक-गलवान संगम तक चीन ने किया कब्जा, पीएलए ने बदल दी सीमा

प्रधानमंत्री चीनी सैनिकों के भारतीय इलाक़े में घुसपैठ नहीं करने का दावा भले ही करें, सच तो यह है कि चीनी सेना कई किलोमीटर अंदर श्योक-गलवान संगम तक पहुँच गई है। उसने पीपी 14 यानी पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 को भारतीय सेना के लिए पूरी तरह काट दिया है। 

चीनी सेना ने बदल दी सीमा

नतीजतन, दोनों नदियों के संगम के पास का नाला भारत और चीन की नयी सीमा रेखा बन गया है। वहाँ चीन ने ज़बरदस्त किलेबंदी कर ली है। ऐसे में ‘वाई’ नाला दोनों देशों के बीच विवाद का नया मुद्दा बन चुका है। 
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इकोनॉमिक टाइम्स ने एक ख़बर में कहा है कि जिस जगह गलवान नदी श्योक में गिरती है, उसके पास के ‘वाई’ आकार के नाले तक चीनी सैनिकों ने कब्जा कर लिया है।
चीनी सेना ने ठोस संरचना बना लिए हैं, मोर्चेबंदी कर ली है, पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 तक के इलाक़े पर कब्जा कर पीपी 14 को पूरी तरह काट दिया है। यह इलाक़ा भारतीय सीमा में लगभग एक किलोमीटर अंदर है।

रणनीतिक महत्व

हालाँकि दोनो सेनाओं के स्थानीय अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद उस जगह पर चीनी सैनिकों की संख्या में कुछ कमी आई है, पर अभी भी वहाँ बड़ी तादाद में चीनी सैनिक जमे हुए हैं।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस इलाके को पीपल्स लिबरेशन आर्मी खाली कर देगा, इसकी संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि वह जगह दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। श्योक नदी पर भारत ने पुल बनाया है और उसे पार कर लेने के बाद भारतीय सैनिक अक्साइ चिन तक पहुँच सकते हैं।

कब्जे की पुष्टि

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार स्थानीय लोगों ने गलवान घाटी में फिंगर एरिया और पैंगोंग झील के किनारे के इलाक़े पर चीनी सैनिकों का कब्जा कर लेने की पुष्टि की है। 
पूर्वी लद्दाख में तांगत्से से निर्वाचित बीजेपी प्रतिनिधि ताशी नामग्याल ने भी चीनी सैनिकों की मौजूदगी की पुष्टि की है। उन्होंने पीपी 14 के पास चीनी सेना के कब्जे और सैनिक साजो-सामान के जमावड़े की पुष्टि भी की है।
चीनियों ने इसके अलावा दूर अंदर तक अपनी पकड़ बना ली है। इससे सैनिक रूप से महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर चीनी सेना का कब्जा हो गया है। 

फिंगर फ़ोर

बीजेपी कौंसिलर ने कहा कि झील के किनारे-किनारे बसे खल्लात, मान और मराक गाँवों के लोगों ने चीनी सैनिकों को फिंगर फोर की ओर जाते देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीनियों ने वहाँ ठोस चौकी बना ली है। लोगों का यह भी कहना है कि चीनी झंडे और रात को वहां से आने वाली तेज़ रोशनी इन गाँवों से आसानी से देखी जा सकती है। 
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि भारतीय इलाक़े में न तो कोई घुसा और न ही कोई घुस कर बैठा हुआ है।  
क्या बातचीत के ज़रिए भारत इस इलाक़े को खाली करवा लेगा? इस बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर उतना ही मुश्किल है। इस जगह का सामरिक व रणनीतिक महत्व है, यहाँ से अक्साइ चिन तक जाया जा सकता है, यहाँ से लद्दाख के दूसरे इलाक़े तक पहुँचा जा सकता है, पैंगोंग झील पर पूरी तरह कब्जा किया जा सकता है। चीनी यहाँ जमे हुए हैं। यह उम्मीद करना ज़्यादती होगी कि वे बातचीत से इतना अहम इलाक़ा खाली कर दें।

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