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कांग्रेस पर बीजेपी का ताज़ा हमला, कहा, राजीव गांधी फ़ाउंडेशन ने चीन से पैसे लिए

चीन के साथ झड़प के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के सवाल पूछे जाने से तिलमिलाई भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी पर ज़बरदस्त हमला किया है। सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा है कि चीनी दूतावास ने राजीव गांधी फ़ाउंडेशन को 2005-2006 के दौरान चंदा दिया। 
बता दें कि राजीव गांधी फ़ाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं, इसके बोर्ड में मनमोहन सिंह, पी. चिंदबरम और प्रियंका गांधी हैं। 
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चीन से चंदा

बीजेपी ने कहा है कि फ़ाउंडेशन के 2005-2006 की सालाना रिपोर्ट में ही कहा गया है कि इसे चीनी दूतावास से चंदा मिला है। यह चंदा सामान्य दानदाताओं से मिले पैसे की श्रेणी में है। 
क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पूछा, 'क्या तत्कालीन यूपीए सरकार ने चीन से घूस नहीं लिया?' बीजेपी के इस नेता ने सवाल किया,

'क्या यह सच नहीं है कि यह चंदा लेने के बाद राजीव गांधी फ़ाउंडेशन ने चीन के साथ मुक्त व्यापार संगठन का समर्थन किया था, जो पूरी तरह चीन के पक्ष में झुका हुआ था?'


रविशंकर प्रसाद, क़ानून मंत्री

'क्या किया पैसे का?'

प्रसाद ने यह आरोप भी लगाया कि यूपीए सरकार ने इस चंदे को कहीं भी सरकारी काग़ज़ात में नहीं दिखाया है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसने चीन से मिले पैसे का क्या किया?'

बीजेपी इसके पहले इस तरह के आरोप कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं पर लगा चुकी है। इसके पहले पार्टी ने कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस का गुप्त समझौता हुआ था। इसी तरह बीजेपी ने 2008 में राहुल गाँधी के चीनी दूतावास के एक कार्यक्रम में भाग लेने पर भी सवाल उठाया था। 

बीजेपी नेता भी मिले हैं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से?

लेकिन बीजेपी का यह आरोप हास्यास्पद इसलिए है कि साल 2004-2014 के बीच बीजेपी के कई नेता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से कई बार मिल चुके हैं।
साल 2007 में दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल और राजनाथ सिंह के बीच मुलाक़ात हुई थी।
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा है कि बीजेपी ये मुद्दे इसलिए उठा रही है कि वह असली मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है। 
पार्टी ने कहा है कि इसने जिससे जो चंदा लिया, वह पूरी तरह पारदर्शी है और पार्टी की वेबसाइट पर है। इसने सवाल उठाया है कि विवेकानंद फ़ाउंडेशन ने भी चीन से चंदा लिया, इसका मतलब यह नहीं कि वह राष्ट्र-विरोधी है। 
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