NDA reservation controversy- एनडीए में आरक्षण विवाद पर दो दलित नेता भिड़ गए हैं। SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर और कोटा के अंदर कोटा की मांग पर चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन से इस्तीफा मांगा।
एनडीए में बीजेपी के सहयोगी दल आपस में लड़ रहे हैं
आरक्षण नीति में बदलाव और अनुसूचित जाति (SC) के भीतर कोटा में कोटा तथा क्रीमी लेयर की मांग को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर सीधा हमला करते हुए कहा है कि अगर वह SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था के समर्थक हैं तो उन्हें पहले खुद इस्तीफा देना चाहिए। चिराग ने मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की भी मांग की है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं और देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बहस एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गई है।
मांझी की पार्टी ने SC-ST आरक्षण में उप-कोटा का किया समर्थन
विवाद की शुरुआत इसी सप्ताह हुई, जब जीतन राम मांझी की पार्टी HAM (सेक्युलर) ने SC और ST आरक्षण के भीतर उप-कोटा यानी सब-क्वोटा की व्यवस्था का समर्थन किया। मांझी के बेटे और बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत है ताकि इसका लाभ समाज के उन सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों तक भी पहुंच सके, जो अभी तक इसका पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाए हैं।सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कर रही है। उनका तर्क है कि आरक्षण को अधिक न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका लाभ वास्तव में उन समुदायों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
दलित आरक्षण का लाभ कुछ समुदायों तक सीमित रहने का दावा
HAM का कहना है कि दलित आरक्षण का लाभ कुछ चुनिंदा समुदायों, विशेष रूप से पासवान और रविदास समुदायों के बीच अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित रहा है, जबकि कई अन्य दलित समुदाय अभी भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित हैं। संतोष कुमार सुमन ने अपने ही समुदाय मुसहर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके समुदाय से अब तक एक भी व्यक्ति IAS अधिकारी नहीं बन पाया है।जीतन राम मांझी खुद मुसहर समुदाय से आते हैं, जिसे बिहार के सबसे पिछड़े दलित समूहों में माना जाता है। यही वजह है कि मांझी और उनकी पार्टी SC आरक्षण के भीतर अधिक पिछड़े समुदायों के लिए अलग हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।
चिराग पासवान का पलटवार- 'पहले इस्तीफा दें मांझी'
HAM की मांग पर चिराग पासवान ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग SC आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले खुद आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहिए।
चिराग ने कहा कि अगर जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर की अवधारणा में विश्वास करते हैं तो उन्हें सबसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की भी मांग की। चिराग के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति यह सवाल उठा रहा है कि आरक्षण में क्रीमी लेयर क्यों नहीं होनी चाहिए, तो उसे पहले खुद आरक्षण से मिले लाभों को छोड़ने की पहल करनी चाहिए।
'SC आरक्षण को आर्थिक आधार पर तय नहीं किया जा सकता'
चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से SC आरक्षण में उप-कोटा का विरोध करती रही है। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति के भीतर सभी समुदाय अब तक एकजुट रहे हैं और संविधान SC आरक्षण को आर्थिक आधार पर तय करने की व्यवस्था नहीं करता।उनका तर्क है कि SC आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना का मुकाबला करना है। ऐसे में आर्थिक आधार पर क्रीमी लेयर लागू करने या SC समुदाय के भीतर अलग-अलग उप-कोटा बनाने से सामाजिक न्याय का मूल उद्देश्य कमजोर हो सकता है। चिराग ने चेतावनी दी कि इस तरह की व्यवस्था समाज को और विभाजित कर सकती है और दलितों के सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को कमजोर कर सकती है।
विवाद की जड़ में 2024 का सुप्रीम कोर्ट फैसला
आरक्षण को लेकर मौजूदा बहस की एक महत्वपूर्ण कड़ी सुप्रीम कोर्ट का 2024 का फैसला है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को SC और ST समुदायों के भीतर उप-वर्गीकरण यानी सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति दी थी, ताकि इन समूहों के अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े समुदायों को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
- इसके बाद SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर भी बहस तेज हुई।
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे निकल चुके लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने की मांग की गई। याचिका में दावा किया गया कि SC और ST श्रेणियों के भीतर अपेक्षाकृत संपन्न परिवार आरक्षण के लाभ पर कब्जा कर रहे हैं। याचिका में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि संविधान पीठ के सात में से चार न्यायाधीशों ने SC और ST के लिए भी क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू करने की संभावना की ओर संकेत किया था।
NDA के दो सहयोगी दल आमने-सामने
इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि चिराग पासवान की LJP (रामविलास) और जीतन राम मांझी की HAM (सेक्युलर) दोनों ही बिहार और केंद्र में NDA की सहयोगी हैं। ऐसे में एक ही गठबंधन के दो केंद्रीय मंत्रियों का आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा होना NDA के भीतर मतभेद की चर्चा को हवा दे रहा है।चिरा ग पासवान जहां SC आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा का विरोध कर रहे हैं, वहीं मांझी की पार्टी का तर्क है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था का लाभ सभी दलित समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है और सबसे पिछड़े समुदायों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है।चिराग की चेतावनी- 'सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर होगी'
चिराग पासवान ने कहा कि SC आरक्षण के भीतर उप-कोटा या आर्थिक आधार पर क्रीमी लेयर लागू करने से समाज में विभाजन बढ़ सकता है। उनके मुताबिक इससे सामाजिक न्याय की लड़ाई का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय आज भी सामाजिक भेदभाव का सामना करता है। ऐसे में आरक्षण की व्यवस्था को आर्थिक आधार पर बांटने के बजाय सामाजिक व ऐतिहासिक वंचना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
चिराग ने दोहराया कि यदि जीतन राम मांझी आर्थिक आधार पर क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर कायम हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने पद से हटने की पहल करनी चाहिए।इस बयान के साथ आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजनीति ही नहीं, बल्कि NDA के भीतर भी मतभेद सार्वजनिक हो गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक रूप ले सकता है, खासकर तब जब आरक्षण का मुद्दा पहले से ही देशभर में आंदोलन और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।