CJI सूर्यकांत ने छात्र प्रदर्शन पर अर्जी की सुनवाई फौरन नहीं करने की मीडिया रिपोर्टों पर अपनी सफाई देते हुए ऐसी रिपोर्टों को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया। सीजेआई ने साफ किया कि इस मामले में कोई याचिका दायर नहीं हुई थी।
भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका को सूचीबद्ध (List) करने से इनकार करने की मीडिया रिपोर्टों का पूरी तरह से खंडन किया है। खुली अदालत में CJI ने इन रिपोर्टों को "पूरी तरह से झूठा" और मीडिया के रवैये को "लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना" करार दिया।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कोई औपचारिक रिट याचिका (Writ Petition) दायर ही नहीं की गई थी, बल्कि केवल एक वकील द्वारा एक पत्र-प्रतिनिधित्व (Letter Representation) भेजा गया था।
झूठी रिपोर्टिंग की गई: CJI सूर्यकांत
सीनियर एडवोकेट शोएब आलम के एक अन्य मामले को सूचीबद्ध कराने के दौरान CJI ने इस भ्रम पर नाराजगी जताई। CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की: "पिछले दो दिनों से यह बिल्कुल झूठी बात कही जा रही है कि मामला दायर किया गया था और मीडिया अपनी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर झूठी रिपोर्टिंग कर रहा है कि सीजेआई ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। उस दिन सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना फाइल नहीं किया गया। यह सिर्फ एक प्रतिनिधित्व था... जो किसी मिश्रा या किसी अन्य द्वारा भेजा गया था। मैं किसी प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? और लोग बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्टिंग करने लगते हैं।"अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक नियमों के तहत औपचारिक रूप से कोई रिट याचिका दाखिल नहीं की जाती, तब तक किसी केवल भेजे गए पत्र को याचिका मानकर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता।
इससे पहले, लाइव लॉ और बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को वकील नरेंद्र मिश्रा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित बर्बरता और कार्रवाई के खिलाफ मौखिक रूप से एक पत्र-याचिका का उल्लेख CJI के समक्ष किया था और इस पर तुरंत सुनवाई (Urgent Listing) की मांग की थी।
उस समय मौखिक उल्लेख (Oral Mentioning) के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने फौरन सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था: "हमारा समय बर्बाद न करें, अपना समय भी बर्बाद न करें।" जब वकील ने कहा कि उनके पास पुलिस कार्रवाई के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तो पीठ ने कहा, "हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास देखने का समय नहीं है।"
इसी टिप्पणी और मौखिक इनकार के बाद मीडिया में खबरें चलने लगी थीं कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, CJI ने अब स्पष्ट किया है कि कागज पर कोई भी औपचारिक याचिका दर्ज नहीं थी, इसलिए इसे खारिज करने या सूचीबद्ध न करने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत था।
सीजेआई चर्चा में क्यों रहते हैं
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पैदाइश 15 मई को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक टिप्पणी से हुई थी, जिसमें CJI सूर्य कांत ने इस बात पर चिंता जताई थी कि बेरोजगार युवा सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज़्म की ओर भटक रहे हैं। CJI सूर्यकांत ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसे युवा समाज में "कॉकरोच" की तरह परजीवी बन रहे हैं। बाद में CJI कांत ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जिनके पास फ़र्ज़ी डिग्रियां हैं और जो ऐसी गतिविधियों में शामिल रहते हैं। सीजेपी ने अब पेपर लीक को मुद्दा बनाकर आंदोलन छेड़ा हुआ है।