दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद Cockroach Janta Party (CJP) और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव बढ़ गया है। CJP के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे को जंतर-मंतर में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया। CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दावा किया है कि पुलिस ने तीनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, दिल्ली पुलिस इसे एहतियातन गिरफ्तारी (Preventive Arrest) बता रही है।
यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच हुई है। जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाए जाने के अगले ही दिन CJP नेताओं ने वहां पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था।

5 दिनों की न्यायिक हिरासत और मोदी को दिपके की चुनौती

सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में भेज दिया गया। जबकि अजिंक्य शिंदे को ज़मानत पर छोड़ दिया गया। यह घटना सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह द्वारा उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की सूचना देने के कुछ घंटों बाद हुई। 
दिपके की कड़ी प्रतिक्रियाः इस घटनाक्रम के फौरन बाद अभिजीत दिपके ने ट्वीट किया- आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना। हिम्मत दिखाओ, @narendramodi (नरेंद्र मोदी) अगर आप असहमति को कुचलने पर इतने ही तुले हुए हैं, तो इन कायर हथकंडों के पीछे छिपने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाइए।

अजीबोगरीब गिरफ्तारी

बुधवार को NCP(SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे की निवारक गिरफ्तारी को “अजीबोगरीब” बताया। “असल शिकायत क्या है? JD(U) द्वारा दर्ज की गई अतिक्रमण की शिकायत? नीतीश कुमार जी छात्र आंदोलनों से उभरे हैं, वे जंतर-मंतर आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और राम मनोहर लोहिया के आदर्शों का अनुसरण करते हैं। क्या वे वास्तव में जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश कर रहे युवाओं के खिलाफ इस अतिक्रमण FIR का समर्थन करते हैं?” उन्होंने कहा-“अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह JD(U) के लिए वाकई एक दुखद दिन है और भारतीय लोकतंत्र के लिए उससे भी ज्यादा दुखद दिन है।”
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जंतर-मंतर के बंद गेट फांदकर अंदर पहुंचे CJP नेता

मंगलवार, 13 अक्टूबर की सुबह CJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए बंद गेट फांद दिए। इस समूह में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे शामिल थे। आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना का वीडियो साझा किया। वीडियो में कुछ लोगों को बंद गेट पर चढ़कर अंदर प्रवेश करते हुए देखा गया। समूह के कुछ सदस्यों के हाथ में तिरंगा था। अंदर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने 'भारत माता की जय' और 'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाए। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। CJP नेताओं का कहना था कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा देने के बावजूद वे वहां विरोध प्रदर्शन करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

CJP की वकील रत्ना सिंह का दावा- तीनों को गिरफ्तार किया गया

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बुधवार सुबह दावा किया कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने कहा कि तीनों नेताओं को बुधवार को पहले विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate) के सामने पेश किए जाने की संभावना है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इसे एहतियातन गिरफ्तारी बताया है। पुलिस की कार्रवाई और CJP के दावे के बीच मुख्य अंतर यही है कि संगठन इसे गिरफ्तारी बता रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि नेताओं को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या रोकने के लिए हिरासत में लिया गया है।

तीनों नेताओं को कहां रखा गया?

CJP नेताओं को मंगलवार सुबह हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई थी। सौरव दास ने सोशल मीडिया पर बताया था कि उन्हें जाफराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में पुलिस स्टेशन को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आईं।
CJP की कानूनी टीम ने आरोप लगाया कि नेताओं को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। लिवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, रत्ना सिंह ने दावा किया कि तीनों को तड़के लगभग 3 बजे एक निजी वैन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन लाया गया। इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में दिल्ली पुलिस का वह फैसला है, जिसके तहत जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जारी एक सर्कुलर में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध प्रदर्शन और धरना देने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक स्थानों की पहचान के लिए एक समिति गठित की थी। इसके बाद तीन स्थानों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान, सीबीडी मैदान, शाहदरा। जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद CJP ने इस फैसले का विरोध किया। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वहीं प्रदर्शन करने की बात कही थी।

CJP का ऐलान- 'प्रतिरोध को अधिसूचना से खत्म नहीं कर सकते'

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तिरंगा लेकर CJP के कार्यकर्ता सुबह-सुबह जंतर-मंतर में दाखिल हुए और बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दिपके ने अपने संदेश में कहा कि प्रतिरोध को अधिसूचना जारी करके खत्म नहीं किया जा सकता। सौरव दास ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि संगठन ने जंतर-मंतर में प्रवेश कर उसे फिर से अपने विरोध प्रदर्शन का स्थल बनाया है। आशुतोष रांका ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जंतर-मंतर से ही उठाई जाएगी। इन बयानों से साफ है कि CJP इस कार्रवाई को केवल पुलिस की हिरासत का मामला नहीं, बल्कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा विवाद बता रही है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन

CJP और विपक्षी दलों का विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी आंदोलन का हिस्सा है। संगठन चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और उसके बाद CJP नेताओं के वहां पहुंचने की घटना ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार और प्रशासन की अनुमति संबंधी शर्तों पर बहस को और तेज कर दिया है।