कॉकरोच जनता पार्टी ने SIR में गड़बड़ी के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध अपना विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रखने का संकल्प लिया है। प्रोटेस्ट देशभर में फैल रहा है। विपक्ष का भी आज सुप्रीम कोर्ट मार्च है। ताज़ा अपडेटः
पटेल चौक मेट्रो स्टेशन आज शाम 4 बजे तक बंद है
हाईकोर्ट प्रदर्शनकारियों पर हमलों और जंतर मंतर बंद करने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित हमलों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने की सहमति दे दी है। याचिका में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच, सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और पुलिस की प्रतिक्रिया की जांच की मांग की गई है। उधर, दिल्ली हाईकोर्ट शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर बंद किए जाने के खिलाफ याचिका पर भी सुनवाई करेगा। हालांकि, अदालत ने कहा कि वह मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करेगी, यह देखते हुए कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मुद्दे पर विचार कर रहा है।
- राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फेंस 11.30 बजे
- अखिलेश यादव और ममता बनर्जी विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च में शामिल होंगे
- विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट मार्च अब 4 बजे, पहले यह दोपहर 1.30 बजे था
- जंतर मंतर जाने वाली सभी सड़कें बैरिकेड लगाकर बंद
- सुप्रीम कोर्ट के वकील आज काले बैज लगायेंगे
ये 6 मेट्रो स्टेशन आज शाम 4 बजे तक बंद
विपक्ष के विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो ने छह स्टेशनों पर शाम 4 बजे तक एंट्री और एग्जिट बंद कर दिया गया है। विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशनों - जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक पर सोमवार शाम 4 बजे तक प्रवेश और निकास द्वार बंद रहेंगे। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने कहा कि सभी छह स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध रहेगी। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति की समीक्षा करेंगी और आगे की जानकारी दी जाएगी। कांग्रेस ने "वोट चोरी" के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।सीजेपी नेता आज 10 बजे पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति लेने जायेंगे
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। सीजेपी के आशुतोष रांका ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए तारीख लेने के लिए आज सोमवार को पुलिस स्टेशन जाएंगे। उन्होंने कहा, “सुबह 10 बजे, मैं, सौरव दास, रत्ना सिंह और अन्य सीजेपी नेता जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए तारीख लेने के लिए संसदीय स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे। दिल्ली पुलिस हमें 24 घंटे के भीतर जंतर-मंतर के लिए तारीख दे सकती है, अन्यथा हम खुद एक और विरोध प्रदर्शन का आह्वान करेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट मार्च आज 1.30 दोपहर को इस जगह से
CJI से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद विपक्ष ने अपने मार्च के कार्यक्रम को जारी रखने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है। कांग्रेस के मुताबिक, प्रदर्शन में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ युवा, नागरिक समाज के संगठन और संविधान तथा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों को सोमवार दोपहर 1:30 बजे दिल्ली में कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड के जंक्शन पर एकत्र होने के लिए कहा गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने की योजना है।
देश की पहली विधानसभा आज ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव ला रही है
केरल विधानसभा में आज 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रस्ताव पेश किया जाएगा। केरल में कांग्रेस सरकार सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करेगी, जिसमें केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का आग्रह किया जाएगा। इसके साथ ही, केरल विधानसभा सीईसी को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव लाने वाली देश की पहली विधानसभा बन जाएगी। विधानसभा के बुलेटिन के अनुसार, यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री वी डी सतीशान द्वारा पेश किया जाएगा। पिछले साल सितंबर में, राज्य विधानसभा ने तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव को पारित किया था, जिसमें एसआईआर (मुख्य चुनाव आयुक्त) को लागू करने का विरोध किया गया था।
पूरे देश में फैला ज्ञानेश कुमार विरोधी आंदोलन
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे, गोवा, हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु समेत कई शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अमित ठाकरे ने मोर्चा संभाला, जबकि पुणे में 85 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
मुंबई में सीईसी के खिलाफ प्रचंड प्रदर्शन, कई गिरफ्तार और हिरासत में
मुंबई के शिवाजी पार्क में रविवार को प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जुटी। मौके पर पुलिस की बड़ी तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभियान के समर्थन में आयोजित किया गया था। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे और मनसे नेता अमित ठाकरे ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचकर महाराष्ट्र और केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। अमित ठाकरे ने शिवसेना भवन के पास पुलिस की एक वैन पर चढ़कर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने घोषणा की कि सोमवार से आंदोलन और तेज किया जाएगा।आदित्य ठाकरे ने मौजूदा हालात को 'अघोषित आपातकाल' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई भाजपा और भारत के बीच है और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आदित्य ठाकरे ने दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में कारगिल युद्ध के दौरान से भी अधिक बल तैनात कर दिए हैं। उन्होंने सवाल किया कि भारतीय नागरिकों के खिलाफ दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) को क्यों तैनात किया गया है। मुंबई में प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
पुणे में 85 लोग हिरासत में लिये गये
पुणे में SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन हुए। रविवार शाम डेक्कन इलाके के गुड लक चौक और एफसी रोड के पास बड़ी संख्या में युवा, छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। पुलिस ने 85 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी जैसे ही जुटने लगे, पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू कर दिया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन उठाकर पुलिस वाहनों में बैठाया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और SIR प्रक्रिया रद्द की जाए। एक प्रदर्शनकारी ने सरकार से तानाशाही जैसा व्यवहार नहीं करने की अपील की। पुणे के पुलिस उपायुक्त कृष्णिकेश रावले के अनुसार, प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति नहीं ली गई थी। उनके मुताबिक, भीड़ के कारण यातायात प्रभावित हुआ और सड़क पर जाम की स्थिति पैदा हुई। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया।गोवा में सात लोग हिरासत में, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रिहाई
गोवा की राजधानी पणजी में कॉकरोच जनता पार्टी ने 'इनफ इज इनफ' आंदोलन के समर्थन से प्रदर्शन आयोजित किया। पुलिस ने इस दौरान पार्षद जैक सुखिजा समेत सात लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दायर की गई। इसके बाद रविवार को अदालत में तत्काल सुनवाई हुई और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आदेश दिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद बढ़ रहा है।हैदराबाद में धरना चौक पर जुटे करीब 100 प्रदर्शनकारी
हैदराबाद के धरना चौक पर लगभग 100 लोगों ने प्रदर्शन किया। इसमें तेलंगाना के CJP सदस्य एम. रंगा साई रेड्डी और राजेश कोरापाका भी शामिल हुए।
दोनों को हाल ही में दिल्ली जाते समय भोपाल में हिरासत में लिया गया था। राजेश कोरापाका ने आरोप लगाया कि पुलिस के पास प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें थीं। इस घटना ने प्रदर्शनकारियों की पहचान और आंदोलन में शामिल लोगों पर पुलिस की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है।कोलकाता में टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों ने उठाई नए चुनाव की मांग
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM ने राज्य में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग उठाई।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा, लेकिन इससे पहले बड़े पैमाने पर जन आंदोलन खड़ा करना जरूरी है। इस बयान से स्पष्ट है कि SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विपक्ष इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है।बेंगलुरु में 300 से अधिक लोगों का प्रदर्शन
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कम से कम 300 प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान एक तख्ती पर लिखा था, “सवाल पूछना अराजकता नहीं है। सत्ता का दुरुपयोग करना अराजकता है।” यह नारा आंदोलन के व्यापक राजनीतिक संदेश को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन, चुनाव आयोग की जवाबदेही और विरोध करने के अधिकार पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।