दिल्ली की DDU मार्ग पर CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद दबाव पड़ने पर दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी ने आरोपियों को अपना कार्यकर्ता बताया है।
प्रोटेस्टरों की पिटाई करते दक्षिणपंथी संगठन के सदस्य।
सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान डीडीयू मार्ग पर छात्रों और महिलाओं के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने दक्षिणपंथी समूह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के हिंदू रक्षा दल से जुड़े होने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार संगठन के प्रमुख पिंकी चौधरी ने उन्हें अपना कार्यकर्ता बताते हुए उनका बचाव करने की बात कही है। यह कार्रवाई 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद की गई। वीडियो में कुछ लोगों को युवाओं को पीटते हुए देखा जा सकता है। महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना दिल्ली के DDU मार्ग पर हुई थी, जो कमला मार्केट थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है। गिरफ्तार किए गए चारों लोगों के हिंदू रक्षा दल से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने खुद को इस संगठन का सदस्य बताया है। घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान 50 वर्षीय रमन सैनी, 32 वर्षीय विवेकानंद उर्फ विवेक, 27 वर्षीय कपिल कुमार और 35 वर्षीय रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि चारों आरोपी हिंदू रक्षा दल के सदस्य होने का दावा करते हैं। घटना की जांच और वायरल वीडियो के आधार पर उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।वायरल वीडियो में क्या दिखा था?
मारपीट का कथित वीडियो 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के पहले दिन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस दिन दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर छात्र और दूसरे प्रदर्शनकारी एकजुट हो रहे थे। वीडियो में कुछ लोगों को युवाओं की पिटाई करते देखा जा सकता है। फुटेज में महिलाओं की भी पिटाई की गई। वीडियो में घटना के दौरान मौके पर पुलिसकर्मी भी नजर आए थे।हालांकि, वीडियो सामने आने के शुरुआती समय में पुलिस को घटना की सही जगह का पता नहीं था। यह फुटेज सोशल मीडिया के अलग-अलग समूहों में साझा किया जा रहा था। बाद में विवाद बढ़ने पर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात कर्मियों की जांच और घटनास्थल से जुड़ी जानकारी के आधार पर जगह की पहचान DDU मार्ग के रूप में की गई।
राहुल गांधी ने भी उठाया था मुद्दा
इस वीडियो को इंडियन यूथ कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA और CJP से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल सहित कई अकाउंट से साझा किया गया। इस घटना पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पर सवाल उठाया था। राहुल ने कहा था, "अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है। जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।"वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए आरोपियों का पता लगाया और चारों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि सार्वजनिक स्थान पर छात्रों और महिलाओं के साथ कथित मारपीट की घटना के समय क्या हुआ था और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने क्या कदम उठाए। वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी के दिखाई देने की बात भी सामने आई है।
हिंदू रक्षा दल प्रमुख पिंकी चौधरी ने क्या कहा?
इस मामले में हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी का नाम भी सामने आया है। उन्होंने गिरफ्तार आरोपियों को अपना कार्यकर्ता बताया है और उनको बचाने का संकल्प लिया है। हालांकि, आरोपियों के संगठन से जुड़े होने और घटना में उनकी भूमिका से संबंधित तथ्यों की जांच पुलिस कर रही है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपों और सबूतों की जांच होगी।
CJP प्रदर्शन के दौरान क्यों बढ़ा विवाद?
10 अक्टूबर को दिल्ली में सीजेपी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन प्रस्तावित था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और लोगों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी विवाद हुआ। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई आरोप सामने आए।इसी माहौल में छात्रों और महिलाओं के साथ कथित मारपीट का वीडियो वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए जाने के बाद घटना की जगह की पहचान हुई और पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया।
नागरिकों की सुरक्षा का क्या?
छात्रों और महिलाओं के साथ कथित मारपीट का यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवाल खड़े करता है। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो पुलिस की जिम्मेदारी स्थिति को नियंत्रित करने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।वीडियो के वायरल होने के बाद गिरफ्तारी हुई है। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही घटना के बारे में अधिक साफ़ जानकारी सामने आएगी।