दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले डेढ़ महीने से चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के बावजूद गतिरोध समाप्त होता नहीं दिख रहा है। शनिवार सुबह CJP ने साफ कर दिया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी सबसे बड़ी और गैर-समझौतावादी मांग है, जबकि सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रधान के इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता।
शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर पीटीआई से बातचीत में CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि शुक्रवार की बैठक में कुछ मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई। उन्होंने कहा, "कल की बैठक में मुआवजे और कानूनी मामलों पर हमें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सिद्धांततः सहमति बनी है और हमें उम्मीद है कि आज इसका लिखित मसौदा भी मिल जाएगा। लेकिन हमारी मुख्य मांग- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे- पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।"

रांका ने कहा कि मुख्यधारा के मीडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से यह खबर आई है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। यदि सरकार का यही रुख है तो बैठकों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर सरकार पूरे देश की मांग के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाती है तो हमें आगे की रणनीति पर कठोर फैसले लेने होंगे।"

वाकई, इस्तीफा नहीं देंगे धर्मेंद्र प्रधान

सरकारी सूत्रों ने सरकारी मीडिया में यह खबर साफतौर पर छपवाई है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। सरकारी सूत्रों ने मीडिया से कहा, "इस्तीफा देकर जिम्मेदारी से भाग जाना सबसे आसान रास्ता होगा। जनता ने हमें जनादेश दिया है और हम अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।" सरकार का कहना है कि उसका ध्यान किसी प्रतीकात्मक कार्रवाई के बजाय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की प्रणालीगत कमियों को दूर करने पर है। सूत्रों के मुताबिक NTA की खामियों की विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है और जल्द ही व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे।
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अभी तक छात्रों को जुबानी बयान मिल रहे हैं या फिर पीएम मोदी के वीडियो बयान आ रहे हैं। सरकार का दावा है कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। कई गैंग पकड़े जा चुके हैं और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी। 
शुक्रवार को विठ्ठलभाई पटेल हाउस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ CJP प्रतिनिधिमंडल की लगभग दो घंटे तक बैठक हुई। यह सरकार और आंदोलनकारियों के बीच तीसरे दौर की औपचारिक वार्ता थी। बैठक में CJP ने दोहराया कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेगा।

सरकार के सामने सीजेपी की 5 मांगे

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन ने सरकार के जिन प्रमुख मांगों को रखा है, उनमें हैं-

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
3 मई की NEET परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा।
आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेना।
'संसद चलो' मार्च के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस आयुक्त की सार्वजनिक माफी।
परीक्षा सुधारों से जुड़े पांच सूत्रीय चार्टर को स्वीकार करना।

CJP ने सरकार को सौंपे पत्र में कहा कि देशभर के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से चर्चा के बाद इन मांगों को गैर-समझौतावादी (Non-Negotiable) घोषित किया गया है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन्हें स्वीकार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज करते हुए देशव्यापी बनाया जाएगा।

  • सरकार और CJP के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। CJP ने स्पष्ट किया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर का आंदोलन जारी रहेगा। 
  • सरकार का कहना है कि उसका ध्यान मंत्री बदलने के बजाय परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर रहेगा। 
  • शनिवार सुबह तक की स्थिति यही है कि वार्ता का रास्ता खुला है, लेकिन सबसे अहम मुद्दे- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे- पर कोई सहमति नहीं बन सकी है।

सरकार से आज फिर बातचीत

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को बैठक के बाद कहा था कि सरकार ने CJP की सभी मांगें सुनी हैं और उन पर विचार करने के बाद जवाब दिया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच शनिवार को फिर बैठक होने की बात कही गई थी। हालांकि जंतर मंतर पर जिस तरह से पुलिस की सख्तियां जारी हैं और उन पर सीजेपी बार-बार बयान दे रही है, उससे लगता है कि बातचीत अधर में भी लटक सकती है। 

पेपर लीक पर नया कानून लाने की तैयारी

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी एक वीडियो संदेश में घोषणा की कि सरकार अगले सप्ताह संसद में पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ा कानून लाने जा रही है। इसके कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक के मामलों में और कठोर दंड का प्रावधान करने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी।
इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शुक्रवार को अपना 26 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर दिया। सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। वांगचुक ने 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। 19 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर पहले सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया था। बाद में उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की अदालत में याचिका के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाने की अनुमति मिली।