अदालत की मौखिक टिप्पणियों और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों के अवैध व्यावसायिक व राजनीतिक इस्तेमाल तथा सोशल मीडिया पर उनके "मीमीफिकेशन" (Meme-ification) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, सीबीआई और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस पीआईएल में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और इसके नेताओं की गतिविधियों की भी जांच की मांग की गई।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के वकील राजा चौधरी द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील राजा चौधरी ने दाखिल की है। याचिका में 15 मई को अदालत में एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा कही गई "कॉकरोच" टिप्पणी का उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार: इस टिप्पणी को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर "आउटरेज एल्गोरिदम" और ट्रॉलिंग कल्चर के ज़रिए वायरल किया गया। इसी वजह से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से एक राजनीतिक संगठन का उभार हुआ और इस विवाद से जुड़ी प्रतीकात्मक चीजों को ट्रेडमार्क कराने की कोशिशें की गईं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को "डिजिटल तमाशे" (Monetised Digital Spectacle) में बदलना कानून के शासन और न्यायिक गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला है।
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याचिका में की गई प्रमुख मांगें

  • सीबीआई जांच: अदालत की मौखिक टिप्पणियों और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों के गैरकानूनी व्यावसायिक व ट्रेडमार्क इस्तेमाल के खिलाफ सीबीआई जांच के निर्देश दिए जाएं।
  • फर्जी वकीलों पर जांच: कानूनी प्रणाली में फर्जी वकीलों और जाली लॉ डिग्रियों की मौजूदगी की निष्पक्ष जांच (वरीयता के आधार पर सीबीआई द्वारा) कराई जाए।
  • डिजिटल और एआई युग के लिए दिशानिर्देश: डिजिटल और आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में अदालती कार्यवाहियों के प्रसार और कवरेज के लिए नैतिक दिशानिर्देश व सुरक्षा मानक (Safeguards) तय किए जाएं।
  • एमिकस क्यूरी की नियुक्ति: इस नए और जटिल कानूनी सवाल की समीक्षा में अदालत की सहायता के लिए एक स्वतंत्र संवैधानिक न्यायविद को 'एमिकस क्यूरी' (अदालत का मित्र) नियुक्त किया जाए।
  • सीजेपी की जांचः सीजेपी, इससे जुड़े संगठनों, नेताओं की गतिविधियों, फंडिंग की जांच कराई जाए।

जर्मन लेखक फ्रांत्ज़ काफ़्का का संदर्भ

याचिका में 20वीं सदी के प्रसिद्ध लेखक फ्रांत्ज़ काफ़्का की 1915 की कालजयी रचना 'द मेटामॉर्फोसिस' (The Metamorphosis) का विशेष उल्लेख किया गया है। याचिका में काफ़्का के पात्र ग्रोगर साम्सा (Gregor Samsa) के कीट में बदलने का उदाहरण देते हुए कहा गया कि साहित्य, न्यायशास्त्र और कानूनी दर्शन में जानवरों या कीटों के प्रतीकात्मक संदर्भ का लंबा इतिहास रहा है। इसके आधार पर सीजेआई की टिप्पणी को शाब्दिक अर्थ में लेने के बजाय एक "प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति" के रूप में रेखांकित किया गया है, जिसका राजनीतिक व व्यावसायिक लाभ के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी यह कहने की कोशिश की गई है कि सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल प्रतीकात्मक संदर्भ भर है। लेकिन उसे प्रतीकात्मक संदर्भ बताया जा रहा है और उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि अदालत में जजों और वकीलों के बीच होने वाली सहज बातचीत के टुकड़ों (Short clips) को काटकर, मीम बनाकर और ट्रॉलिंग कल्चर के जरिए सोशल मीडिया पर वायरल करके व्यावसायिक लाभ कमाया जा रहा है। इन्हें संदर्भ से काटकर डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर रील्स व कंटेंट के रूप में बेचना अदालत की गरिमा और संवैधानिक प्रक्रियाओं का अपमान है।

CJI की 'कॉकरोच' टिप्पणी और CJP का उदय

इस पूरे मामले की शुरुआत 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से हुई थी। उस दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कानूनी पेशे में गिरते मानकों और फर्जी डिग्री धारकों द्वारा वकालत छोड़कर सोशल मीडिया व RTI एक्टिविज्म में जाने पर चिंता व्यक्त की थी। सुनवाई के दौरान CJI ने अनौपचारिक रूप से "कॉकरोच" शब्द का रूपक के तौर पर इस्तेमाल किया था। बाद में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया था। उनकी टिप्पणी सामान्य बेरोजगार युवाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री और जाली दस्तावेजों के सहारे पेशे में प्रवेश करने वाले लोगों के खिलाफ थी।
इस टिप्पणी के बाद इंटरनेट पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से एक डिजिटल-राजनीतिक आंदोलन शुरू हुआ, जिसकी शुरुआत अमेरिका (बोस्टन) में अभिजीत दिपके द्वारा की गई। दिपके वहां पढ़ाई करने गए थे। सोशल मीडिया पर CJP ने बेहद कम समय में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। Instagram पर 2.2 करोड़ से अधिक और X (Twitter) पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए। CJP ने नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किया था।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों (केंद्र सरकार, CBI, BCI और IT मंत्रालय) को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत अब केंद्रीय एजेंसियों और बार काउंसिल के जवाब के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी। यह केस क्या रुख लेता है, इस पर नज़र रहेगी।