दिल्ली हाई कोर्ट ने EOW की एफआईआर और ईडी के केस में न्यूज़ पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' और उसके मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत दी है।
ईडी के जिस मनी लॉन्ड्रिंग केस और EOW की एफ़आईआर से NewsClick के ख़िलाफ़ हव्वा खड़ा किया गया था वह आख़िरकार फुस्स साबित हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट ने NewsClick और उसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ विदेशी फंडिंग के आरोप में दर्ज ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW की एफ़आईआर को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस केस में कोई सबूत नहीं है और यह कानून का घोर दुरुपयोग है। अदालत का यह फ़ैसला केंद्र की मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ़ कहा कि अगर एफ़आईआर में लगाए गए सारे आरोप मान भी लिए जाएं तो भी आईपीसी की धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात और 420 यानी धोखाधड़ी के जरूरी मामले बनते ही नहीं हैं। इसलिए ये केस चलाए रखना गलत है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'FIR को खारिज करने के बाद ई़डी का ईसीआईआर अपने आप खारिज हो जाता है।'
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने साफ़ साफ़ कह दिया कि पूरी ईसीआईआर यानी मनी लॉन्ड्रिंग केस को खारिज किया जाता है। यह केस कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
मोदी सरकार के लिए झटका
अगस्त 2020 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि NewsClick ने अमेरिका की कंपनी वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स LLC से 9.59 करोड़ रुपये विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई के रूप में लिए। आरोप लगाया गया कि शेयरों को ज्यादा मूल्य देकर एफडीआई नियमों को दरकिनार किया गया और पैसा सैलरी, कंसल्टेंसी फीस आदि में निकाल लिया गया। ईडी ने भी इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।ईडी ने फरवरी 2021 में NewsClick दफ्तर और संपादकों के घरों पर छापे मारे थे। लेकिन सरकार की ऐसी कार्रवाइयों के बाद भी यह मामला अदालत में टिक नहीं सका।
कोर्ट ने आरोपों को खारिज क्यों किया?
कोर्ट ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को ध्यान से देखा और पाया-
- निवेश पूरी तरह कानूनी था: अमेरिकी कंपनी ने कुल 4.5 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 9.59 करोड़ रुपये तीन किस्तों में देने का समझौता किया था। पहली किस्त अप्रैल 2018 में मिल गई थी। उस समय डिजिटल न्यूज़ मीडिया में एफ़डीआई पर कोई सीमा नहीं थी।
- शेयर मूल्यांकन सही था: शेयरों का मूल्य डिस्काउंटेड कैश फ्लो तरीके से तय किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है। दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से तय किया था। यह आर्थिक फैसला है, इसमें कोई अपराध नहीं।
- RBI की सफाई: रिजर्व बैंक ने बताया कि विदेशी पैसा ऑटोमैटिक रूट से आया था। कोई देरी नहीं हुई और FEMA नियमों का पालन हुआ।
'धोखाधड़ी या विश्वासघात साबित नहीं'
कोर्ट ने कहा कि विदेशी निवेशक कंपनी ने कभी शिकायत नहीं की कि उसे धोखा दिया गया। कोई भी व्यक्ति या कंपनी नहीं है जिसने कहा हो कि उसे धोखा हुआ या नुकसान हुआ। पैसा सौंपने और उसे गबन करने का कोई सबूत नहीं।
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ निवेश समझौता करने भर से आपराधिक साजिश का केस नहीं बनता। ईडी ने भी सिर्फ सामान्य आरोप लगाए थे, कोई ठोस सबूत नहीं दिए।
प्रबीर पुरकायस्थ को भी राहत
प्रबीर पुरकायस्थ को जून 2021 से ही गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई थी। यानी कोई दबाव न डालने का आदेश था। इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा। अब केस ही खारिज होने से उन्हें पूरी राहत मिल गई है।कोर्ट का सख्त संदेश
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि यदि ज्यादा खर्च या ओवर पेमेंट भी हुए हों तो भी वह अपराध नहीं बनता। सिर्फ संदेह के आधार पर किसी मीडिया संस्थान या व्यक्ति को परेशान करना कानून का दुरुपयोग है।
यह फैसला मीडिया की आजादी और विदेशी निवेश संबंधी नीतियों के सही उपयोग के मामले में भी अहम माना जा रहा है। NewsClick की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट में दलीलें पेश की थीं। फैसले के बाद NewsClick ने इसे न्याय की जीत बताया है। ईडी और EOW अब इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल दोनों जाँच एजेंसियों के केस खत्म हो गए हैं।